Kejriwal Sisodia CBI Allegations
Kejriwal Sisodia CBI Allegations हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान CBI ने बड़ा दावा करते हुए मामले को देश के सबसे बड़े घोटालों में से एक बताया। एजेंसी ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर गंभीर आरोप लगाए, जिससे राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया।

दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर तूफान आ गया है। 9 मार्च 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जो दावा किया, उसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा – “ये देश की राजधानी के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक है। मैं इसे एक राष्ट्रीय शर्म कहूंगा।” ये शब्द दिल्ली आबकारी नीति घोटाले (शराब घोटाला) से जुड़े हैं, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को राउज एवेन्यू कोर्ट ने महज 27 फरवरी 2026 को आरोपों से मुक्त (डिस्चार्ज) कर दिया था। अब CBI ने उस फैसले को चुनौती दी है और हाईकोर्ट में जोरदार बहस हुई।
Kejriwal Sisodia CBI Allegations: क्या था पूरा मामला?
2021-22 में दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति लागू की। पुरानी व्यवस्था में सरकारी ठेके थे, लेकिन नई नीति में थोक व्यापार निजी हाथों में सौंप दिया गया। लाइसेंसधारियों का मुनाफा मार्जिन 5% से बढ़ाकर 12% कर दिया गया। टर्नओवर की शर्तें ढीली की गईं। CBI का आरोप था कि ये बदलाव जानबूझकर किए गए ताकि कुछ खास शराब कंपनियों (खासकर ‘साउथ ग्रुप’) को फायदा पहुंचाया जा सके। बदले में रिश्वत ली गई – लगभग 100 करोड़ रुपये। ये पैसा हवाला के जरिए दिल्ली से गोवा विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल हुआ।
CBI ने दावा किया कि नीति बनाने से लेकर रिश्वत वितरण तक एक सतत आपराधिक साजिश चली। इसमें केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य AAP नेताओं की प्रत्यक्ष भूमिका बताई गई। जांच एजेंसी ने हजारों पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें डिजिटल साक्ष्य, वरिष्ठ नौकरशाहों के बयान और गवाहों के रिकॉर्डेड स्टेटमेंट शामिल थे।
ट्रायल कोर्ट ने क्यों दिया क्लीन चिट?
Kejriwal Sisodia CBI Allegations : 27 फरवरी 2026 को विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह की अदालत ने सनसनीखेज फैसला सुनाया। सभी 23 आरोपियों – केजरीवाल, सिसोदिया, के. कविता समेत अन्य – को बरी कर दिया गया। कोर्ट ने CBI पर तीखे हमले किए:
- “CBI ने सिर्फ अनुमान और कहानी गढ़ी है, ठोस सबूत नहीं हैं।”
- केजरीवाल का नाम बिना किसी फाइल नोटिंग, ईमेल, व्हाट्सएप चैट या फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन के जोड़ा गया।
- “कोई सबूत नहीं कि केजरीवाल किसी साजिश की बैठक में थे या उन्हें अवैध सौदे की जानकारी थी।”
- जांच को “पूर्व नियोजित और कोरियोग्राफ्ड एक्सरसाइज” बताया गया।
- CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए।
AAP ने इसे “ईमानदारी की जीत” बताया। केजरीवाल ने कहा – “सत्यमेव जयते। हम कट्टर ईमानदार हैं।”
CBI का पलटवार: हाईकोर्ट में ‘राष्ट्रीय शर्म’ वाला दावा
ट्रायल कोर्ट के फैसले के कुछ घंटों के अंदर ही CBI ने 974 पन्नों की विस्तृत अपील दाखिल कर दी। 9 मार्च को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के सामने सुनवाई हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आग उगली:
- “ये राजधानी के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला है। कुछ खास व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए नीति में हेरफेर किया गया।”
- “हमारे पास धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज गवाहों के बयान हैं, जो विस्तार से बताते हैं कि साजिश कैसे रची गई, पैसा कैसे ट्रांसफर हुआ और रिश्वत किसे दी गई।”
- “ट्रायल कोर्ट ने मिनी ट्रायल चलाया।
- शुरुआती स्टेज में सिर्फ प्राइमा फेसी केस देखना होता है, पूरे सबूतों का विश्लेषण नहीं।
- जज ने पूरे षड्यंत्र को समग्र रूप से नहीं पढ़ा।”
- CBI ने दावा किया कि उसके पास “पर्याप्त सबूत और गवाह” हैं।
- नीति में जानबूझकर बदलाव, रिश्वत का क्विड प्रो क्वो (लेन-देन) और चुनावी फंडिंग – सब साबित करने लायक दस्तावेज हैं।
मेहता ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का आदेश “आपराधिक कानून को उलट देता है”। उन्होंने यह भी मांग की कि निचली अदालत की CBI पर की गई तीखी टिप्पणियां रद्द की जाएं और ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग केस पर इसका असर न पड़े।
हाईकोर्ट का फैसला क्या रहा?
- कोर्ट ने CBI की अपील पर सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी कर दिया।
- अब उन्हें 16 मार्च 2026 तक जवाब दाखिल करना होगा।
- हालांकि, कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के डिस्चार्ज ऑर्डर पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
- केजरीवाल-सिसोदिया अभी भी आरोपमुक्त हैं।
- लेकिन कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा CBI अधिकारियों पर की गई
- “पूर्वाग्रहपूर्ण टिप्पणियों” पर रोक लगा दी।
- साथ ही ईडी केस की सुनवाई को तब तक टाल दिया,
- जब तक CBI अपील का फैसला नहीं हो जाता।
इसका मतलब क्या है?
- यह केस अब सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक भी है।
- AAP इसे “BJP की साजिश” बता रही है,
- जबकि BJP और CBI इसे “भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण” मानते हैं।
- अगर हाईकोर्ट CBI के पक्ष में फैसला देता है,
- तो केजरीवाल-सिसोदिया पर दोबारा मुकदमा चल सकता है।
- ED का केस भी प्रभावित होगा।
- दूसरी ओर, अगर अपील खारिज हुई तो CBI की जांच पर फिर सवाल उठेंगे।
- देश देख रहा है कि आखिरकार सच्चाई क्या है –
- क्या ये सचमुच “राष्ट्रीय शर्म” वाला घोटाला था या सिर्फ राजनीतिक प्रतिशोध?
निष्कर्ष
9 मार्च 2026 का दिन दिल्ली की सियासत में याद रखा जाएगा। CBI ने साफ कहा – “ये सबसे बड़े घोटालों में एक है, हमारे पास सबूत और गवाह हैं।” केजरीवाल और सिसोदिया पर गंभीर आरोप दोबारा कोर्ट की कसौटी पर कसे जा रहे हैं। अब 16 मार्च को अगली सुनवाई होगी। क्या हाईकोर्ट ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट देगा या AAP की राहत बरकरार रहेगी? जवाब आने वाला है, लेकिन फिलहाल ये केस भारतीय लोकतंत्र की न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है।
