सऊदी यूएई विवाद
सऊदी यूएई विवाद यमन में हालिया बॉम्बिंग के बाद सऊदी अरब और यूएई के बीच रिश्तों में तनाव बढ़ा है। सऊदी सरकार ने इस कार्रवाई की वजह बताते हुए गल्फ देशों में विवाद की पुष्टि की है।

सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच लंबे समय से चले आ रहे भाईचारे में अब गहरी दरार पड़ गई है। यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर सऊदी के हवाई हमले ने इस तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है, जहां सऊदी ने यूएई से आए हथियारों को निशाना बनाया।
घटना का पूरा विवरण
29-30 दिसंबर 2025 को सऊदी अरब ने यमन के दक्षिणी बंदरगाह शहर मुकल्ला पर “सीमित” हवाई हमला किया। सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार, यह हमला यूएई के फुजैराह बंदरगाह से आए जहाजों पर था, जो सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) नामक अलगाववादी गुट के लिए हथियार और लड़ाकू वाहन ला रहे थे। सऊदी ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए कार्रवाई का बचाव किया, जबकि कोई नागरिक हताहत नहीं होने की बात कही गई।
इसके बाद यमन की सऊदी समर्थित अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने यूएई की सेनाओं को 24 घंटे में यमन छोड़ने का अल्टीमेटम दिया। साथ ही, 72 घंटे के लिए हवाई, स्थलीय और समुद्री सीमाओं पर नाकाबंदी तथा 90 दिनों की आपातकाल घोषणा कर दी गई। यूएई ने हमलों से इंकार किया और अपनी बची हुई सेनाओं को स्वेच्छा से वापस बुलाने की घोषणा कर दी।
सऊदी यूएई विवाद : यमन संकट का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यमन में 2015 से ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी-यूएई गठबंधन लड़ रहा है। लेकिन दोनों देशों की रणनीतियां अलग हो गईं। सऊदी एक एकीकृत यमन चाहता है, जो उसके समर्थित केंद्रीय सरकार के अधीन हो। वहीं, यूएई दक्षिणी STC को बढ़ावा दे रहा है, जो 2017 में बना और दक्षिण यमन को स्वतंत्र राज्य बनाना चाहता है। STC अदन और आसपास के क्षेत्रों पर कब्जा जमाए हुए है।
दिसंबर 2025 में STC ने हद्रामौत और माहरा प्रांतों में बड़े पैमाने पर क्षेत्र हथिया लिए, जिसमें तेल सुविधाएं भी शामिल हैं। सऊदी ने 25 दिसंबर को STC से पीछे हटने की मांग की, लेकिन इनकार पर 26 दिसंबर को हद्रामौत में हमले किए। मुकल्ला हमला इसी तनाव का चरम था, जो सऊदी-UAE के बीच गठबंधन को तोड़ने वाला साबित हुआ।
सऊदी की बताई मुख्य वजहें
- सऊदी ने स्पष्ट कहा कि यूएई का STC को समर्थन “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए लाल रेखा” पार कर गया।
- जहाजों पर ट्रैकिंग डिवाइस निष्क्रिय थे, जो संदिग्ध था।
- रियाद का मानना है कि STC की विस्तारवादी कार्रवाइयां यमन को विखंडित कर रही हैं,
- और समुद्री व्यापार मार्गों को अस्थिर कर सकती हैं।
- विशेषज्ञों के अनुसार, सऊदी अब हूथी युद्ध से थक चुका है और एकीकृत यमन पर जोर दे रहा है,
- जबकि यूएई दक्षिण को इस्लामवादियों और हूथियों के खिलाफ बफर जोन मानता है।
दोनों देशों के रिश्तों पर प्रभाव
- एक समय सऊदी-यूएई खाड़ी के सबसे मजबूत सहयोगी थे,
- लेकिन यमन ने उनकी गहरी खाई उजागर कर दी।
- यमन सरकार ने यूएई के साथ संयुक्त रक्षा समझौता रद्द कर दिया।
- यह तनाव लाल सागर व्यापार और तेल कीमतों को प्रभावित कर सकता है,
- क्योंकि हूथी पहले ही जहाजों पर हमले कर चुके हैं।
- विश्लेषकों का कहना है कि यह मध्य पूर्व में पावर बैलेंस बदल सकता है।
वैश्विक और क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएं
- यूएई ने सऊदी के आरोपों को खारिज किया और अपनी वापसी को “स्वैच्छिक” बताया।
- कतरी मीडिया अल जजीरा ने इसे “स्पष्ट उत्तेजना” कहा।
- अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र की नजर इस पर है,
- क्योंकि 2022 के युद्धविराम को खतरा है।
- ईरान समर्थित हूथी इसका फायदा उठा सकते हैं।
भविष्य की संभावनाएं
यह दरार सऊदी-UAE गठबंधन के अंत का संकेत देती है। सऊदी सीमा पर सैन्य जमावड़ा बढ़ा रहा है। शांति वार्ता की गुंजाइश कम है, क्योंकि STC अपने क्षेत्रों पर डटा रहेगा। खाड़ी में नया संघर्ष तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला सकता है। भारत जैसे देशों को भी लाल सागर मार्ग पर असर का सामना करना पड़ेगा।
