SC रिज़र्वेशन फैसला
SC रिज़र्वेशन फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला — अगर किसी उम्मीदवार ने एक बार आरक्षण कोटा का लाभ लिया है, तो वह अब सामान्य श्रेणी की सीट पर दावा नहीं कर सकेगा। जानें पूरे फैसले का मतलब।

सुप्रीम कोर्ट ने 6 जनवरी 2026 को एक अहम फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया कि यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में यदि आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार प्रारंभिक चरण में आरक्षण का लाभ ले चुका है, तो वह सामान्य श्रेणी की सीटों पर दावा नहीं कर सकता, भले ही अंतिम मेरिट में उसकी रैंक बेहतर हो। यह फैसला कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को पलटते हुए केंद्र सरकार की अपील पर आया। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और विजय बिश्नोई की बेंच ने भारतीय वन सेवा (IFएस) 2013 परीक्षा के मामले में यह निर्णय दिया।
SC रिज़र्वेशन फैसला : केस का पूरा बैकग्राउंड
- केस 2013 की यूपीएससी भारतीय वन सेवा परीक्षा से जुड़ा है।
- प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य वर्ग का कटऑफ 267 अंक था,
- जबकि एससी के लिए 233। एससी उम्मीदवार जी.
- किरण ने 247.18 अंक लाकर आरक्षित कटऑफ पर क्वालिफाई किया,
- जबकि सामान्य उम्मीदवार एंटनी एस. मारियप्पा ने 270.68 अंक के साथ सामान्य कटऑफ क्लियर किया।
- अंतिम मेरिट में किरण की रैंक 19 और एंटनी की 37 रही।
कर्नाटक कैडर में जनरल इनसाइडर वैकेंसी एक थी, एससी इनसाइडर कोई नहीं। केंद्र ने एंटनी को जनरल सीट दी, किरण को तमिलनाडु कैडर। किरण ने हाईकोर्ट में अपील की, जो उनके पक्ष में फैसला देकर सामान्य सीट देने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट का मुख्य तर्क
कोर्ट ने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण लाभ लेने वाले उम्मीदवार को सामान्य श्रेणी की सीट नहीं मिल सकती। “एक बार आरक्षण का लाभ ले लिया तो सामान्य रिक्तियों पर नियुक्ति का हक नहीं।” नियम 14(ii) के अनुसार, यदि किसी स्टेज पर छूट ली तो ओपन कैटेगरी से बाहर।
बेंच ने स्पष्ट किया कि मुख्य परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद, प्रीलिम्स में रियायत लेने से सामान्य दावा अमान्य। यह आरक्षण नीति के उद्देश्य को मजबूत करता है।
फैसले का प्रभाव सरकारी भर्तियों पर
- यह फैसला यूपीएससी, एसएससी और राज्य लोक सेवा आयोगों पर लागू होगा।
- आरक्षित उम्मीदवारों को सोचना पड़ेगा कि प्रीलिम्स में कोटा लें या मेरिट पर जाएं।
- सामान्य वर्ग को फायदा, क्योंकि ओपन सीटें सुरक्षित रहेंगी।
पिछले फैसलों से अंतर: दिसंबर 2025 में राजस्थान केस में कोर्ट ने कहा था कि बिना छूट के मेरिट पर आरक्षित उम्मीदवार ओपन सीट ले सकते हैं। लेकिन छूट लेने पर नहीं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
- फैसला आरक्षण विरोधियों को राहत, समर्थकों में असंतोष।
- विशेषज्ञों का कहना है कि यह मेरिट को प्राथमिकता देता है।
- विपक्ष ने इसे आरक्षण कमजोर करने वाला बताया, सरकार ने नीति का सम्मान।
UPSC ने स्पष्टीकरण मांगा था, अब नए नियम संभव।
निष्कर्ष और आगे की राह
यह फैसला आरक्षण प्रणाली को और पारदर्शी बनाएगा। उम्मीदवारों को सलाह: मेरिट पर भरोसा करें।
