होर्मुज शिपिंग क्राइसिस
होर्मुज शिपिंग क्राइसिस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के बीच ईरान पर जहाजों से भारी रकम वसूलने के आरोप लगे हैं। इस घटनाक्रम से वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज – यह संकरी जलडमरूमध्य दुनिया के वैश्विक तेल और गैस व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण चोक पॉइंट है। यहां से रोजाना लगभग 20% वैश्विक तेल और काफी मात्रा में प्राकृतिक गैस गुजरती है। लेकिन मार्च 2026 में ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष के बीच यह क्षेत्र अब युद्ध का मुख्य केंद्र बन गया है। ईरान पर आरोप है कि वह कुछ जहाजों से 20 लाख डॉलर (लगभग 18-19 करोड़ रुपये) तक की ‘ट्रांजिट फीस’ या टोल वसूल रहा है, ताकि वे सुरक्षित रूप से होर्मुज से गुजर सकें। यह कदम न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना जा रहा है, बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा खतरा मंडरा रहा है।
होर्मुज शिपिंग क्राइसिस: ईरान की नई रणनीति
- ईरान ने हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट पर एक तरह का ‘टोल गेट’ सिस्टम लागू कर दिया है।
- ईरानी संसद के सदस्य और राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य
- अलाद्दीन बोरौजेर्दी ने राज्य प्रसारक IRIB को बताया कि युद्ध के
- खर्चों को देखते हुए कुछ जहाजों से 20 लाख डॉलर की फीस ली जा रही है।
- यह फीस “सुरक्षित मार्ग” के बदले ली जा रही है।
- रिपोर्ट्स के अनुसार, कम से कम एक टैंकर ऑपरेटर ने यह रकम चुकाई है,
- और IRGC (इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) जहाजों की जांच कर रहा है।
ईरान ने पहले से ही स्ट्रेट को “क्लोज” घोषित कर दिया था, लेकिन अब चुनिंदा जहाजों को “सेफ कॉरिडोर” में पास करने की अनुमति दे रहा है – बशर्ते वे फीस दें। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पेमेंट कैश, क्रिप्टो या अन्य माध्यमों से स्वीकार किए जा रहे हैं। ईरानी सांसद सोमायेह रफीई ने भी संसद में एक बिल का जिक्र किया, जिसमें सभी देशों से टोल और टैक्स वसूलने का प्रस्ताव है, क्योंकि ईरान “सुरक्षा प्रदान” कर रहा है।
यह कदम ईरान की पुरानी धमकियों को आर्थिक रूप देने जैसा है। पहले ईरान सैन्य हमलों या जहाज जब्त करने की बात करता था, लेकिन अब वह आर्थिक नियंत्रण की ओर बढ़ रहा है।
वैश्विक व्यापार पर प्रभाव
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों का ट्रैफिक 70% तक गिर गया है।
- कई टैंकर रुक गए हैं, और कुछ ने AIS (ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम)
- बंद कर दिया है या GPS जाम कर दिया है।
- इससे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं –
- ब्रेंट क्रूड एक समय 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया।
- एशिया के कई देशों में ईंधन की कमी और राशनिंग शुरू हो गई है।
यूरोप कतर से LNG का 12-14% इसी रास्ते से प्राप्त करता है। भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर भी असर पड़ रहा है – तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ सकती है। शिपिंग कंपनियां अब वैकल्पिक रूट तलाश रही हैं, लेकिन वे लंबे और महंगे हैं। इंश्योरेंस कंपनियां वॉर रिस्क प्रीमियम बढ़ा चुकी हैं, जिससे शिपिंग कॉस्ट दोगुनी-तिगुनी हो गई है।
अमेरिका और इजरायल की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया – स्ट्रेट को पूरी तरह खोलो, वरना ईरान के पावर प्लांट्स पर हमला होगा। ईरान ने जवाब में कहा कि अगर उसके पावर प्लांट्स पर हमला हुआ, तो वह स्ट्रेट को पूरी तरह बंद कर देगा और क्षेत्रीय देशों के एनर्जी और वॉटर सिस्टम पर हमला करेगा।
अमेरिकी नेवी ने पहले ही कुछ ईरानी नौसैनिक ठिकानों पर हमले किए हैं। CENTCOM ने वीडियो जारी कर दिखाया कि कैसे ईरानी खतरे को खत्म किया गया। लेकिन ईरान का IRGC अभी भी मजबूत है और प्रॉक्सी ग्रुप्स के जरिए दबाव बनाए हुए है।
भारत और दुनिया के लिए खतरा
- भारत के लिए यह संकट गंभीर है।
- हमारा ज्यादातर तेल आयात मध्य पूर्व से होता है,
- और होर्मुज बंद होने से सप्लाई चेन बाधित हो सकती है।
- वैश्विक स्तर पर यह युद्ध अब आर्थिक युद्ध में बदल रहा है।
- ईरान की यह रणनीति दिखाती है कि वह परमाणु साइट्स और रिजीम चेंज के बाद भी हार नहीं मान रहा,
- बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को निशाना बना रहा है।
निष्कर्ष
होर्मुज शिपिंग क्राइसिस: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब सिर्फ एक जलमार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का प्रतीक बन गया है। ईरान की टोल वसूली की रणनीति से दुनिया को बड़ा सबक मिल रहा है – युद्ध केवल सैन्य नहीं, आर्थिक भी हो सकता है। सभी पक्षों को कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहिए, वरना वैश्विक मंदी और ऊर्जा संकट गहरा सकता है। स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए सतर्क रहना और सही जानकारी पर भरोसा करना जरूरी है।
