वेदांता डीमर्जर : 16 दिसंबर 2025 को एक बड़ा फैसला आया है। मुंबई बेंच ऑफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने वेदांता लिमिटेड के बहुप्रतीक्षित डीमर्जर प्लान को मंजूरी दे दी है। इससे अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली यह ऑयल-टू-मेटल्स कंपनी पांच अलग-अलग सेक्टर-स्पेसिफिक लिस्टेड कंपनियों में विभाजित हो जाएगी। यह डीमर्जर योजना 2023 में पहली बार प्रस्तावित की गई थी, लेकिन सरकारी आपत्तियों और रेगुलेटरी हर्डल्स की वजह से इसमें देरी हुई। अब NCLT की मंजूरी के बाद कंपनी मार्च 2026 तक इस विभाजन को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
वेदांता डीमर्जर क्या है और क्यों जरूरी?
#वेदांता एक डाइवर्सिफाइड conglomerate है, जिसमें एल्युमीनियम, ऑयल एंड गैस, पावर, आयरन एंड स्टील और बेस मेटल्स जैसे कई बिजनेस शामिल हैं। डीमर्जर का मतलब है कि इन सभी बिजनेस को अलग-अलग कंपनियों में बांट दिया जाएगा। इससे हर बिजनेस पर फोकस बढ़ेगा, मैनेजमेंट ज्यादा कुशल होगा और निवेशकों को अलग-अलग सेक्टर्स में डायरेक्ट निवेश का मौका मिलेगा।

कंपनी का कहना है कि यह कदम वैल्यू अनलॉकिंग के लिए महत्वपूर्ण है। प्रत्येक नई कंपनी का अपना अलग कैपिटल स्ट्रक्चर, मैनेजमेंट टीम और स्ट्रैटेजिक फोकस होगा। इससे भारत की ग्रोथ स्टोरी – जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, एनर्जी ट्रांजिशन और मैन्युफैक्चरिंग – में बेहतर भागीदारी संभव होगी।
डीमर्जर के बाद पांच कंपनियां कौन-कौन सी होंगी?
NCLT अप्रूवल के बाद वेदांता निम्नलिखित पांच लिस्टेड कंपनियों में बंट जाएगी:
- वेदांता एल्युमीनियम – एल्युमीनियम बिजनेस को संभालेगी।
- वेदांता ऑयल एंड गैस – ऑयल एंड गैस एसेट्स (जैसे राजस्थान ब्लॉक) यहां आएंगे।
- वेदांता पावर – पावर जनरेशन बिजनेस, जिसमें तलवंडी साबो पावर लिमिटेड शामिल है।
- वेदांता आयरन एंड स्टील – स्टील और फेरस मटेरियल्स बिजनेस।
- वेदांता लिमिटेड (रेजिडुअल कंपनी) – बेस मेटल्स (जैसे जिंक और सिल्वर), हिंदुस्तान जिंक की हिस्सेदारी और नए उभरते बिजनेस (टेक्नोलॉजी, डिस्प्ले ग्लास आदि) यहां रहेंगे।
नोट: मर्चेंट पावर बिजनेस का डीमर्जर अलग प्रोसीडिंग में पेंडिंग है।
शेयरधारकों को क्या फायदा मिलेगा?
यह सबसे रोचक हिस्सा है! वेदांता के मौजूदा शेयरधारकों को हर एक शेयर के बदले चार नई कंपनियों में एक-एक अतिरिक्त शेयर मिलेगा। यानी कुल मिलाकर एक शेयर पर पांच कंपनियों के शेयर! रिकॉर्ड डेट की घोषणा बाद में होगी। इससे निवेशकों को अलग-अलग रिस्क प्रोफाइल वाले बिजनेस में चुनिंदा निवेश का ऑप्शन मिलेगा।
- NCLT अप्रूवल की खबर आते ही वेदांता के शेयर में जबरदस्त उछाल आया।
- 16 दिसंबर को शेयर 4% तक चढ़कर 52-सप्ताह के हाई पर पहुंच गए। अगले दिन भी रैली जारी रही।
चुनौतियां और सरकारी आपत्तियां
यह रास्ता आसान नहीं था। पेट्रोलियम मंत्रालय ने ऑयल एंड गैस एसेट्स से जुड़े डिस्क्लोजर और लायबिलिटी को लेकर आपत्ति जताई थी। सरकार को डर था कि डीमर्जर से उसके बकाया वसूली में दिक्कत हो सकती है। लेकिन वेदांता ने सभी स्टेच्यूटरी कंप्लायंस पूरा करने का दावा किया और SEBI से भी क्लियरेंस लिया। NCLT ने योजना को फेयर और रीजनेबल मानते हुए मंजूरी दे दी।
आगे क्या?
- कंपनी अब एक्जीक्यूशन फेज में प्रवेश कर चुकी है। कुछ अन्य रेगुलेटरी और
- स्टेकहोल्डर अप्रूवल बाकी हैं, लेकिन मुख्य हर्डल पार हो गया। अनिल अग्रवाल ने इसे
- “लैंडमार्क मोमेंट” बताया और कहा कि इससे वेदांता भारत की ग्रोथ एम्बिशंस से बेहतर अलाइन हो सकेगी।
- वेदांता डीमर्जर भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर में वैल्यू क्रिएशन का एक बड़ा उदाहरण बनेगा।
- निवेशक अब अलग-अलग प्योर-प्ले कंपनियों में डायरेक्ट एक्सपोजर पा सकेंगे। अगर
- आप वेदांता के शेयरधारक हैं, तो यह आपके लिए बड़ी खुशखबरी है!
