राहुल गांधी मुस्लिम ओवैसी
राहुल गांधी मुस्लिम ओवैसी असदुद्दीन ओवैसी ने राहुल गांधी पर निशाना साधा कि वे ‘मुस्लिम’ शब्द से कतराते हैं। कांग्रेस के मुस्लिम नेताओं में भी असंतोष, पार्टी में बगावत—ओवैसी ने नींद उड़ाई।

भारतीय राजनीति में मुस्लिम वोट बैंक हमेशा से एक संवेदनशील और निर्णायक मुद्दा रहा है। हाल के दिनों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—वे अपने जोशीले भाषणों में SC, ST, OBC जैसे समुदायों का बार-बार जिक्र करते हैं, लेकिन ‘मुस्लिम’ शब्द का इस्तेमाल करने से क्यों कतराते हैं? इस सवाल को AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने और तेज कर दिया है। ओवैसी के तीखे हमलों ने कांग्रेस की नींद उड़ा दी है, और अब पार्टी के अंदर ही मुस्लिम नेताओं ने बगावत का मोर्चा खोल दिया है।
ओवैसी का तीखा हमला: ‘मुस्लिम’ शब्द से डर क्यों?
- असदुद्दीन ओवैसी ने कई मौकों पर राहुल गांधी और कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाए हैं।
- उन्होंने कहा है कि कांग्रेस ‘मुस्लिम’ शब्द से परहेज कर रही है,
- क्योंकि पार्टी को डर है कि इससे हिंदू मतदाता नाराज हो जाएंगे।
- ओवैसी का आरोप है कि राहुल गांधी सॉफ्ट हिंदुत्व की राजनीति खेल रहे हैं,
- जहां मुस्लिम मुद्दों को सीधे उठाने से बचते हैं।
उन्होंने पुराने बयानों में भी याद दिलाया कि कांग्रेस शासनकाल में मुसलमानों के खिलाफ हिंसा हुई, लेकिन अब राहुल गांधी मुसलमानों की सुरक्षा की बात करते हुए भी ‘मुस्लिम’ शब्द से बचते नजर आते हैं। ओवैसी का कहना है कि AIMIM का उभार कांग्रेस और अन्य सेक्युलर दलों की नाकामी से हुआ है, जहां मुस्लिमों की असली आवाज दबाई जा रही है। ओवैसी ने यहां तक कहा कि कांग्रेस को ‘कंट्रोल में रहने वाले’ मुस्लिम नेता चाहिए, न कि हक मांगने वाले।
राहुल गांधी मुस्लिम ओवैसी: कांग्रेस के अंदर बगावत अपनों ने ही खोला मोर्चा
- कांग्रेस में यह मुद्दा अब बाहर नहीं, बल्कि अंदर से फूट रहा है।
- कई मुस्लिम नेता खुले तौर पर राहुल गांधी की रणनीति पर सवाल उठा रहे हैं।
- पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद ने राहुल को ‘डरपोक’ और ‘असुरक्षित’ तक कह डाला।
- उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस मुस्लिम नेताओं को नजरअंदाज कर रही है,
- क्योंकि हिंदू वोट खोने का डर है।
- शकील ने कहा कि राहुल गांधी मुस्लिम मुद्दों पर बोलने से बचते हैं,
- जबकि SC-ST-OBC पर जोर देते हैं।
वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने भी शिकायत की कि राहुल गांधी से मिलना मुश्किल है, और मुस्लिम नेताओं की अनदेखी हो रही है। बिहार के सांसद तारिक अनवर ने भी इस पर चुप्पी साधते हुए संवाद की सलाह दी, लेकिन असंतोष साफ है। महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में AIMIM के बढ़ते प्रभाव ने कांग्रेस के मुस्लिम वोट बैंक को प्रभावित किया है, जिससे पार्टी के अंदर बैचेनी बढ़ गई है।
कुछ कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी ने मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाए जाने जैसे गंभीर मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से आवाज उठाना बंद कर दिया है। इससे AIMIM जैसे दलों को फायदा हो रहा है।
राहुल की रणनीति: सॉफ्ट हिंदुत्व या वोट बैंक की मजबूरी?
राहुल गांधी की रणनीति पर सवाल है कि क्या वे जानबूझकर ‘मुस्लिम’ शब्द से दूरी बना रहे हैं? विश्लेषकों का मानना है कि यह सॉफ्ट हिंदुत्व की कोशिश है, ताकि हिंदू वोटरों को आकर्षित किया जा सके। राहुल के भाषणों में जाति जनगणना, आरक्षण और सामाजिक न्याय पर जोर है, लेकिन मुस्लिम-विशेष मुद्दों पर चुप्पी साफ दिखती है।
कांग्रेस को डर है कि मुस्लिम मुद्दों को सीधे उठाने से भाजपा को ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ का हथियार मिल जाएगा। लेकिन इसी चुप्पी से मुस्लिम समुदाय में असंतोष बढ़ रहा है, और ओवैसी जैसे नेता इसे भुनाते नजर आ रहे हैं।
मुस्लिम वोट बैंक का भविष्य: कांग्रेस या AIMIM?
- यह विवाद महज शब्दों का नहीं, बल्कि राजनीतिक अस्तित्व का है।
- अगर कांग्रेस मुस्लिम नेताओं की अनदेखी जारी रखती है,
- तो AIMIM जैसे दल और मजबूत होंगे।
- ओवैसी पहले ही कई राज्यों में कांग्रेस के वोट काट चुके हैं।
- कांग्रेस के लिए यह समय है कि वह अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करे,
- वरना अपनों की बगावत और ओवैसी के हमले पार्टी को और कमजोर कर देंगे।
क्या राहुल गांधी ‘मुस्लिम’ शब्द बोल पाएंगे, या चुप्पी ही उनकी रणनीति बनी रहेगी? समय बताएगा, लेकिन फिलहाल कांग्रेस में हलचल तेज है।
