शशि थरूर केरल चुनाव
शशि थरूर केरल चुनाव शशि थरूर ने केरल की सत्ता को लेकर बड़ा खुलासा किया। सांसद ने सस्पेंस और राजनीतिक संभावनाओं के बीच अपनी रणनीति पर रोशनी डाली।

केरल विधानसभा चुनाव 2026 अब कुछ ही हफ्तों दूर हैं। 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा और 4 मई को नतीजे आएंगे। राज्य की 140 सीटों पर कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) और वामपंथी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही है। इस बीच, तिरुवनंतपुरम से सांसद और कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे ज्यादा चर्चा में है। सोशल मीडिया, सर्वे और राजनीतिक गलियारों में यह सवाल बार-बार उठ रहा है कि क्या थरूर केरल की कमान संभालेंगे? कई सर्वे में उन्हें UDF की पहली पसंद बताया गया है। लेकिन अब खुद शशि थरूर ने इस सस्पेंस पर बड़ा खुलासा किया है, जिसने सभी को चौंका दिया है।
शशि थरूर केरल चुनाव: सस्पेंस की शुरुआत
- पिछले कुछ महीनों से शशि थरूर का नाम केरल CM के रूप में सबसे आगे चल रहा है।
- जुलाई 2025 में एक बड़े सर्वे में उन्हें सबसे पसंदीदा उम्मीदवार बताया गया था।
- थरूर की लोकप्रियता, उनकी अंतरराष्ट्रीय छवि, किताबें,
- विदेश नीति पर पकड़ और तिरुवनंतपुरम में लगातार जीत ने उन्हें मजबूत दावेदार बना दिया।
- कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता उन्हें राज्य का चेहरा बनाना चाहते हैं,
- खासकर LDF की दोबारा सत्ता में आने की चुनौती के बीच।
- थरूर 2009 से लोकसभा में हैं और कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर पर सबसे चमकदार चेहरों में शुमार हैं।
- उनकी उम्र (69 वर्ष) और अनुभव भी उनके पक्ष में माने जा रहे हैं।
- लेकिन क्या वे विधानसभा चुनाव लड़ेंगे और CM बनेंगे? यह सवाल महीनों से लटका हुआ था।
थरूर का बड़ा बयान
मार्च 2026 में PTI को दिए इंटरव्यू में शशि थरूर ने स्पष्ट रूप से इस सस्पेंस को खत्म कर दिया। उन्होंने कहा, “मैं मुख्यमंत्री पद की संभावना वाले उम्मीदवारों में नहीं हूं।” थरूर ने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री का चयन निर्वाचित विधायकों में से होना चाहिए। चूंकि वे विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, इसलिए वे किसी एक सीट पर फोकस नहीं करेंगे। बल्कि पूरे राज्य में UDF के लिए प्रचार करेंगे – “उत्तर से दक्षिण तक, राज्य भर में घूम-घूम कर।” उन्होंने कहा, “मुझे CM बनने की कोई इच्छा नहीं है, क्योंकि मैं चुनाव नहीं लड़ रहा।” यह बयान उन लोगों के लिए झटका था जो थरूर को केरल का अगला CM देखना चाहते थे। थरूर ने यह भी कहा कि CM का फैसला हाईकमान करेगा, चुनाव के बाद। उन्होंने पुराने अमेरिकी सैन्य जवाब का हवाला दिया – “यह मेरे पे ग्रेड से ऊपर की बात है।”
क्यों नहीं लड़ रहे चुनाव? रणनीतिक फैसला
थरूर ने विधानसभा न लड़ने का कारण स्पष्ट नहीं किया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रणनीतिक है। वे लोकसभा में मजबूत हैं और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की आवाज हैं। विधानसभा चुनाव लड़ने से उनकी छवि सीमित हो सकती है। साथ ही, कांग्रेस हाईकमान शायद उन्हें राज्य स्तर पर बांधना नहीं चाहता। थरूर ने कहा कि चुनाव जल्दी घोषित होने से UDF को तैयारी का कम समय मिला, जबकि LDF के पास मौजूदा सरकार के फायदे हैं। लेकिन वे आश्वस्त हैं कि UDF जीतेगा। उन्होंने कहा, “हम 85-100 सीटें जीतकर खुश हो जाएंगे।” केरल में बहुमत के लिए 71 सीटें चाहिए, लेकिन थरूर का लक्ष्य मजबूत बहुमत है।
केरल की राजनीति में थरूर की भूमिका
- थरूर का यह बयान कांग्रेस की एकजुटता दिखाता है।
- हाल ही में कुछ अफवाहें थीं कि वे LDF की ओर झुक रहे हैं,
- लेकिन उन्होंने पार्टी और राहुल गांधी के प्रति वफादारी दोहराई।
- वे पूरे राज्य में प्रचार करेंगे, जो UDF के लिए बड़ा फायदा होगा।
- उनकी बोलचाल, बुद्धिमत्ता और अंतरराष्ट्रीय छवि युवाओं और शहरी वोटरों को आकर्षित करती है।
- अगर UDF जीतता है, तो CM कौन बनेगा? यह हाईकमान पर निर्भर करेगा।
- कई नाम जैसे वी.डी. सतीशन या अन्य स्थानीय नेता चर्चा में हैं।
निष्कर्ष
शशि थरूर ने खुद CM बनने की अटकलों पर विराम लगा दिया है। उनका बयान साफ है – वे रेस में नहीं हैं। लेकिन उनकी प्रचार भूमिका केरल चुनाव को रोचक बनाएगी। UDF अगर जीतता है, तो थरूर की लोकप्रियता का फायदा मिलेगा। केरल की जनता अब विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर फैसला लेगी। थरूर का यह खुलासा सस्पेंस तो खत्म करता है, लेकिन चुनावी जंग को और तेज करता है। आने वाले हफ्तों में देखना होगा कि केरल की सत्ता किसके हाथ लगती है।
