योगी कृषि इंटरक्रॉपिंग मॉडल
योगी कृषि इंटरक्रॉपिंग मॉडल सीएम योगी आदित्यनाथ का नया कृषि मॉडल: गन्ने के साथ तिलहन-दलहन की अंतःफसली (इंटरक्रॉपिंग) खेती से किसानों की आय दोगुनी से कई गुना बढ़ेगी। मिशन मोड में लागू होगी योजना, उत्पादन बढ़ेगा और जोखिम कम होगा। यूपी कृषि क्रांति!

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत की है। गन्ना आधारित इंटरक्रॉपिंग (अंतःफसली खेती) को मिशन मोड में लागू करने का उनका फैसला किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। यह मॉडल न केवल गन्ना किसानों की आय को दोगुना करने का वादा करता है, बल्कि इसे कई गुना बढ़ाने की क्षमता रखता है। आइए जानते हैं इस क्रांतिकारी मॉडल का पूरा राज, कैसे यह काम करता है और किसानों को क्या-क्या फायदे मिल रहे हैं।
इंटरक्रॉपिंग क्या है और योगी मॉडल में इसकी भूमिका
- इंटरक्रॉपिंग यानी एक ही खेत में मुख्य फसल के साथ दूसरी फसलों को साथ-साथ उगाना।
- योगी सरकार ने इसे गन्ने की खेती के साथ जोड़ा है।
- गन्ना एक लंबी अवधि की फसल है, जो 10-12 महीने तक खेत में रहती है।
- इस दौरान खेत की जमीन बेकार नहीं पड़ती,
- बल्कि उसमें तिलहन (जैसे सरसों) और दलहन (जैसे मूंग, उर्द, मसूर) की फसलें बोई जा सकती हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में उच्चस्तरीय बैठक में कहा कि यह मॉडल गन्ने की पैदावार पर कोई असर डाले बिना अतिरिक्त उत्पादन, अतिरिक्त आय और फसल जोखिम से सुरक्षा प्रदान करता है। उत्तर प्रदेश में वर्तमान में लगभग 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती हो रही है। इसमें से बड़े हिस्से में इंटरक्रॉपिंग लागू करने से लाखों किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
मुख्य फसल गन्ना + सहायक फसलें: फॉर्मूला कैसे काम करता है
इस मॉडल का मूल फॉर्मूला सरल लेकिन प्रभावी है:
- मुख्य फसल: गन्ना – जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है।
- सहायक फसलें (इंटरक्रॉप): सरसों, मसूर, उर्द, मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली तिलहनी और दलहनी फसलें।
- समय: गन्ने की रोपाई के शुरुआती महीनों में इन फसलों को बोया जाता है। ये फसलें 3-4 महीने में तैयार हो जाती हैं, जबकि गन्ना लंबे समय तक रहता है।
- फायदा: सहायक फसलें गन्ने के पौधों को छाया देती हैं, मिट्टी की नमी बनाए रखती हैं, कीटों से बचाव करती हैं और अतिरिक्त आय देती हैं।
उदाहरण के तौर पर, एक एकड़ गन्ने के खेत में सरसों या मूंग की इंटरक्रॉपिंग से किसान को मुख्य फसल के अलावा 20-30 हजार रुपये तक अतिरिक्त कमाई हो सकती है। बड़े पैमाने पर यह आय दोगुनी से बहुगुणित हो जाती है।
योगी कृषि इंटरक्रॉपिंग मॉडल: किसानों को मिलने वाले प्रमुख लाभ
योगी मॉडल के तहत इंटरक्रॉपिंग से किसानों को तीन बड़े लाभ मिलते हैं:
अधिक उत्पादन:
एक ही खेत से दो-तीन फसलें, जिससे कुल उत्पादकता बढ़ती है।
अधिक आय:
- मुख्य फसल के साथ अतिरिक्त फसलों से नकदी प्रवाह साल भर बना रहता है।
- गन्ने का भुगतान मिलने तक तिलहन-दलहन से तुरंत कमाई।
जोखिम में कमी:
- अगर एक फसल प्रभावित हो तो दूसरी फसल बचाव बन जाती है।
- मौसम, कीट या बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम होता है।
इसके अलावा, तिलहन और दलहन फसलें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती हैं, नाइट्रोजन फिक्सेशन करती हैं और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करती हैं। इससे खेती टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बनती है।
सरकार की योजना: मिशन मोड में लागू, 2026-27 से 2030-31 तक
सीएम योगी ने इस इंटरक्रॉपिंग मॉडल को 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए:
- वर्षवार रोडमैप तैयार किया जा रहा है।
- किसानों को प्रशिक्षण, बीज, तकनीकी सहायता और सब्सिडी दी जाएगी।
- कृषि विभाग, गन्ना विभाग और कृषि विश्वविद्यालय मिलकर काम करेंगे।
- बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान और डेमो प्लॉट लगाए जाएंगे।
यह योजना उत्तर प्रदेश को कृषि में आत्मनिर्भर बनाने और राष्ट्रीय स्तर पर मॉडल राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सफलता के उदाहरण और भविष्य की संभावनाएं
- पहले से ही कई जिलों में इंटरक्रॉपिंग के प्रयोग सफल हो रहे हैं।
- गन्ना किसान अतिरिक्त फसलों से खुश हैं।
- विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल पूरे 29 लाख हेक्टेयर में लागू हो गया,
- तो प्रदेश की कृषि GVA में बड़ा योगदान देगा और किसानों की आय में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
- योगी सरकार की यह पहल “खेत से खुशहाली” की दिशा में एक मजबूत कदम है।
- यह न केवल किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगी,
- बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और तिलहन-दलहन की आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देगी।
निष्कर्ष
योगी का क्रांतिकारी कृषि मॉडल इंटरक्रॉपिंग फॉर्मूला साबित कर रहा है कि स्मार्ट खेती से कम संसाधनों में अधिक कमाई संभव है। यदि आप गन्ना किसान हैं तो इस मॉडल को अपनाएं, सरकार की मदद लें और अपनी आय को दोगुना-बहुगुना करें। उत्तर प्रदेश अब कृषि क्रांति का नया केंद्र बन रहा है – जहां अन्नदाता सशक्त हो रहा है और सपने हकीकत में बदल रहे हैं।
