बौद्धकालीन इतिहास
कभी अविरल बहने वाली हिरण्यवती नदी अब केवल नाम भर रह गई थी, लेकिन अब इसे पुनर्जीवित करने की बड़ी पहल शुरू हो चुकी है। प्रशासन, सफाईकर्मियों और स्थानीय लोगों के संयुक्त प्रयास से इस ऐतिहासिक नदी को फिर से बहता देखने की उम्मीद जाग गई है।
बुधवार को डीएम Mahendra Singh Tanwar के नेतृत्व में कुलकुला देवी मंदिर के पास विशेष सफाई अभियान चलाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों और सफाई कर्मियों ने लगभग 200 मीटर क्षेत्र में नदी की सफाई की। प्रशासन का लक्ष्य बरसात शुरू होने से पहले नदी के अधिकतम हिस्से को साफ करना है ताकि पानी का प्राकृतिक प्रवाह दोबारा शुरू हो सके।
DM महेंद्र सिंह तंवर ने खुद लिया अभियान का जायजा
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने मौके पर पहुंचकर सफाई कार्य का निरीक्षण किया और लोगों को नदी संरक्षण के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन और जनता इसी तरह मिलकर काम करते रहे तो मृतप्राय हो चुकी हिरण्यवती नदी कुछ ही दिनों में फिर से बहती दिखाई दे सकती है।
डीएम ने यह भी कहा कि हिरण्यवती नदी का पुनर्जीवन केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं बल्कि धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। नदी के पुनर्जीवित होने से कुलकुला देवी मंदिर की सुंदरता और आकर्षण बढ़ेगा, जिससे पर्यटन को भी नया बढ़ावा मिलेगा।
पर्यटन विकास की भी बड़ी तैयारी
प्रशासन केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि पूरे क्षेत्र को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बना रहा है। डीएम ने बताया कि वन क्षेत्र में बड़े स्तर पर पौधरोपण कराया जाएगा ताकि नदी के आसपास हरियाली बढ़े और पर्यावरण संतुलन मजबूत हो सके।
इसके अलावा पर्यटकों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में प्रकाश व्यवस्था, पेयजल और बिजली की बेहतर व्यवस्था की जाएगी। प्रशासन त्रिमुहानी घाट तक नदी की सफाई कराने की योजना पर भी काम कर रहा है।
नदी पर पुल निर्माण का भी बनेगा प्रस्ताव
डीएम ने जानकारी दी कि पर्यटन विभाग के सहयोग से कुलकुला देवी मंदिर के सुंदरीकरण और हिरण्यवती नदी पर पुल निर्माण का प्रस्ताव तैयार कराया जाएगा। इससे क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
जरूरत पड़ने पर नदी की सफाई के लिए जेसीबी मशीनों का भी
उपयोग किया जाएगा ताकि अभियान को तेजी से पूरा किया जा सके।
प्रशासन और जनता मिलकर बदल रहे तस्वीर
इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि इसमें प्रशासन के
साथ-साथ आम जनता भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। ग्रामीणों, सफाईकर्मियों और अधिकारियों की
संयुक्त भागीदारी से यह पहल जनआंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है।
अभियान के दौरान एसडीएम डॉ. संतराज सिंह बघेल, डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी,
तहसीलदार धर्मवीर सिंह, नायब तहसीलदार संदीप कुमार यादव, वीडीओ आरके सेठ,
सचिव नीरज चतुर्वेदी सहित कई अधिकारी और ग्रामीण मौजूद रहे।
हिरण्यवती नदी क्यों है खास?
हिरण्यवती नदी का संबंध बौद्धकालीन इतिहास से भी माना जाता है। इतिहासकारों के
अनुसार यह नदी धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रही है। समय के साथ अतिक्रमण,
गंदगी और जल प्रवाह रुकने के कारण यह नदी धीरे-धीरे मृतप्राय होती चली गई।
अब प्रशासन की नई पहल से लोगों में उम्मीद जगी है कि यह ऐतिहासिक
धरोहर एक बार फिर अपने पुराने स्वरूप में लौट सकेगी।
हिरण्यवती नदी को पुनर्जीवित करने का यह अभियान केवल सफाई कार्य नहीं
बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन विकास की दिशा में
बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि प्रशासन और जनता का यह प्रयास लगातार जारी रहा,
तो आने वाले समय में हिरण्यवती नदी फिर से अविरल बहती नजर आ सकती है।
