ईरान अमेरिका समझौता
ईरान-अमेरिका समझौते को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित परमाणु समझौते को लेकर रविवार को अचानक राजनीतिक हलचल तेज हो गई। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है और जल्द कोई बड़ी खबर सामने आ सकती है। हालांकि दिनभर की चर्चाओं और अटकलों के बाद देर रात तक यह स्पष्ट हो गया कि फिलहाल कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बयान जारी करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, लेकिन किसी भी समझौते में जल्दबाज़ी नहीं की जाएगी। ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके।
ट्रंप की पार्टी के सांसदों में क्यों बढ़ा मतभेद?
ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के अंदर ही अलग-अलग राय देखने को मिल रही है।
कुछ सांसदों का मानना है कि ईरान पर दबाव बनाए रखना जरूरी है और
किसी भी नरमी से मध्य पूर्व में अमेरिका की स्थिति कमजोर हो सकती है।
वहीं पार्टी के कुछ नेता यह मानते हैं कि यदि बातचीत के जरिए
परमाणु संकट को रोका जा सकता है तो कूटनीतिक समाधान बेहतर विकल्प होगा।
रिपब्लिकन सांसदों का एक बड़ा वर्ग इस बात से चिंतित है कि
अगर अमेरिका ने ईरान को कुछ आर्थिक राहत दी तो
वह अपनी सैन्य ताकत और क्षेत्रीय प्रभाव को और मजबूत कर सकता है। दूसरी ओर कुछ नेताओं का कहना है कि
लंबे समय से जारी तनाव का समाधान केवल बातचीत से ही संभव है।

ईरान ने भी दिए नरमी के संकेत
$ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने कहा कि पिछले
एक सप्ताह में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में कुछ सकारात्मक प्रगति हुई है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी कई अहम मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।
ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है,
जबकि अमेरिका और पश्चिमी देश आशंका जता रहे हैं कि ईरान
परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
यही कारण है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास अभी भी बना हुआ है।
इसराइल ने रखी अपनी सख्त शर्तें
इस बीच Benjamin Netanyahu ने भी संभावित समझौते पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी अंतिम समझौते में ईरान के परमाणु खतरे को पूरी तरह खत्म करना जरूरी है। नेतन्याहू ने साफ शब्दों में कहा कि इसराइल कभी भी ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा।
इसराइल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विरोध करता रहा है। इसराइली सरकार का मानना है कि यदि ईरान परमाणु शक्ति बनता है तो पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा और स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।
क्या आगे समझौते की संभावना बनी हुई है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान दोनों फिलहाल सीधे टकराव से बचना चाहते हैं। हालांकि परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी भी बड़ी दूरी बनी हुई है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने वार्ताकारों को निर्देश दिया है कि किसी भी समझौते में जल्दबाजी न करें। इससे साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका फिलहाल कड़ा रुख बनाए रखना चाहता है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की बातचीत पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।
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