भारत ने चिनाब नदी प्रणाली
सिंधु जल संधि निलंबन के बाद भारत का बड़ा कदम
भारत ने सिंधु जल संधि निलंबित होने के बाद चिनाब नदी प्रणाली से जुड़े दो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है। इन परियोजनाओं को भारत की जल रणनीति और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रोजेक्ट्स का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
भारत सरकार पश्चिमी नदियों के पानी का अधिकतम उपयोग करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में दो बड़े प्रोजेक्ट लॉन्च किए गए हैं, जिनकी कुल लागत करीब 2,600 करोड़ रुपए बताई जा रही है।
कौन-कौन से हैं ये बड़े प्रोजेक्ट?
इन दो परियोजनाओं में पहला बड़ा प्रोजेक्ट हिमाचल प्रदेश में बनने वाला चिनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट है। इसकी अनुमानित लागत 2,352 करोड़ रुपए है। दूसरा प्रोजेक्ट जम्मू-कश्मीर के सलाल बांध में 268 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला सेडिमेंट बाईपास टनल प्रोजेक्ट है।
सरकार का उद्देश्य इन प्रोजेक्ट्स के जरिए पश्चिमी नदियों के पानी का बेहतर उपयोग करना और जल प्रबंधन क्षमता को मजबूत बनाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत की सिंचाई, जल भंडारण और बिजली उत्पादन क्षमता में बड़ा सुधार हो सकता है।
लाहौल-स्पीति में बनेगी 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग
सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति क्षेत्र में बनाया जा रहा है। इस योजना के तहत 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जाएगी, जिसके जरिए चिनाब बेसिन से अतिरिक्त पानी को ब्यास नदी प्रणाली की ओर मोड़ा जाएगा।
यह सुरंग एक बड़े इंटर-बेसिन नदी जोड़ो प्रोजेक्ट का हिस्सा होगी। योजना के अनुसार चिनाब की सहायक नदी
चंद्रा से पानी को हाइड्रोलिक संरचनाओं और सुरंगों की मदद से ब्यास बेसिन तक पहुंचाया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना भविष्य में जल संकट से निपटने,
कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और हाइड्रोपावर उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
सलाल बांध परियोजना क्यों है खास?
दूसरा प्रोजेक्ट जम्मू-कश्मीर स्थित सलाल बांध से जुड़ा हुआ है। इस योजना के
तहत सेडिमेंट बाईपास टनल बनाई जाएगी ताकि बांध में जमा हो रही गाद को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सके।
गाद जमा होने से बांधों की जल भंडारण क्षमता और बिजली उत्पादन पर असर पड़ता है।
नई तकनीक के जरिए सलाल बांध की कार्यक्षमता को फिर से मजबूत किया जाएगा।
इससे लंबे समय तक बिजली उत्पादन और जल प्रबंधन को फायदा मिलेगा।
पाकिस्तान पर क्या पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के इन प्रोजेक्ट्स से पाकिस्तान की चिंता बढ़ सकती है। सिंधु जल संधि के
तहत पाकिस्तान लंबे समय से पश्चिमी नदियों के पानी पर निर्भर रहा है। ऐसे में भारत अगर अपने हिस्से के
पानी का ज्यादा इस्तेमाल करता है तो पाकिस्तान में जल संकट की आशंका बढ़ सकती है।
हालांकि भारत का कहना है कि ये परियोजनाएं पूरी
तरह अंतरराष्ट्रीय नियमों और अपने अधिकारों के तहत शुरू की गई हैं।
भारत का मकसद सिर्फ अपने हिस्से के जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है।
भारत के लिए क्यों अहम हैं ये प्रोजेक्ट?
इन दोनों प्रोजेक्ट्स से भारत को कई बड़े फायदे मिलने की उम्मीद है। इससे जल संरक्षण,
सिंचाई, बिजली उत्पादन और पर्यावरण प्रबंधन में सुधार होगा।
साथ ही सीमावर्ती राज्यों में इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में पानी सबसे बड़ा रणनीतिक संसाधन बन सकता है। ऐसे में
भारत की ये परियोजनाएं भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं
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