गाजा मुद्दे पर सोनिया गांधी
गाजा को लेकर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के एक लेख के बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। अपने लेख में सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति और गाजा संकट पर भारत के रुख को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि भारत ऐतिहासिक रूप से फिलिस्तीन के अधिकारों का समर्थक रहा है, लेकिन मौजूदा समय में सरकार की चुप्पी और नीति में बदलाव से देश की वैश्विक छवि प्रभावित हो सकती है। उन्होंने गाजा में मानवीय संकट पर चिंता जताते हुए भारत से अधिक स्पष्ट और सक्रिय रुख अपनाने की अपील की।
सोनिया गांधी ने अपने लेख में संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए कहा कि गाजा में बड़ी संख्या में नागरिक प्रभावित हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस संकट के समाधान के लिए अधिक प्रभावी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अपने पारंपरिक नैतिक और कूटनीतिक मूल्यों के अनुरूप आवाज उठानी चाहिए।
बीजेपी का पलटवार, लगाया वोट बैंक की राजनीति का आरोप
सोनिया गांधी के बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विदेश नीति जैसे गंभीर विषय को भी वोट बैंक की राजनीति से जोड़ने की कोशिश कर रही है। उनका कहना था कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपने मतदान, मानवीय सहायता और आधिकारिक बयानों के माध्यम से गाजा और फिलिस्तीन पर अपना रुख कई बार स्पष्ट किया है।
बीजेपी नेताओं ने यह भी कहा कि भारत की विदेश नीति राष्ट्रीय हितों पर आधारित है और सरकार इजरायल तथा फिलिस्तीन दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की नीति पर काम कर रही है। उनके अनुसार कांग्रेस का आरोप राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है।
राहुल गांधी ने भी किया समर्थन
इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी सोनिया गांधी के विचारों का समर्थन किया। राहुल गांधी ने कहा कि भारत को नैतिक स्पष्टता के साथ अपनी स्वतंत्र विदेश नीति की परंपरा को बनाए रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार इजरायल के अधिक निकट दिखाई दे रही है और भारत को अपने ऐतिहासिक संतुलित दृष्टिकोण को कायम रखना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित पार्टी के अन्य नेताओं ने भी गाजा में मानवीय स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है।
भारत की आधिकारिक नीति क्या है?
भारत लंबे समय से दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) का समर्थन करता रहा है। भारत इजरायल और फिलिस्तीन दोनों के साथ अपने राजनयिक संबंध बनाए रखता है। हाल के वर्षों में भारत ने इजरायल के साथ रणनीतिक संबंध मजबूत किए हैं, वहीं फिलिस्तीन को मानवीय सहायता और विकास सहयोग भी जारी रखा है। संयुक्त राष्ट्र में भी भारत ने विभिन्न प्रस्तावों पर अपने राष्ट्रीय हित और परिस्थितियों के अनुसार मतदान किया है।
आगे क्या होगा?
सोनिया गांधी के लेख और उस पर बीजेपी की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर विदेश नीति, गाजा संकट और भारत की भूमिका को लेकर और चर्चा होने की संभावना है। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से इस विशेष लेख पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।
निष्कर्ष
गाजा मुद्दे पर सोनिया गांधी के लेख ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
एक ओर कांग्रेस भारत से अधिक सक्रिय और स्पष्ट कूटनीतिक भूमिका की मांग कर रही है,
वहीं बीजेपी का कहना है कि भारत की विदेश नीति संतुलित और
राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श का केंद्र बना हुआ है और
आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।
FAQ
Q1. सोनिया गांधी ने अपने लेख में क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने गाजा संकट पर भारत सरकार के रुख और कथित चुप्पी पर सवाल उठाते हुए
भारत से अधिक स्पष्ट कूटनीतिक भूमिका अपनाने की अपील की।
Q2. बीजेपी ने क्या प्रतिक्रिया दी?
उत्तर: बीजेपी ने कांग्रेस पर विदेश नीति को वोट बैंक की राजनीति से जोड़ने का
आरोप लगाया और कहा कि भारत ने गाजा मुद्दे पर अपना रुख पहले ही स्पष्ट किया है।
Q3. राहुल गांधी ने क्या कहा?
उत्तर: राहुल गांधी ने सोनिया गांधी के विचारों का समर्थन करते हुए भारत से स्वतंत्र और
नैतिक स्पष्टता वाली विदेश नीति अपनाने की बात कही।
Q4. भारत की आधिकारिक नीति क्या है?
उत्तर: भारत दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है और इजरायल तथा फिलिस्तीन दोनों के
साथ राजनयिक संबंध बनाए रखने की नीति पर चलता है।
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