डेनमार्क की 19 वर्षीय प्रिंसेस
19 वर्षीय प्रिंसेस इसाबेला ने शुरू की सैन्य सेवा
डेनमार्क की 19 वर्षीय प्रिंसेस इसाबेला ने देश की सेना में शामिल होकर नई मिसाल पेश की है। राजा फ्रेडरिक दशम (King Frederik X) और रानी मैरी की बेटी इसाबेला ने हाल ही में गार्ड हुसार रेजिमेंट (Guard Hussar Regiment) में अपनी 11 महीने की अनिवार्य सैन्य सेवा शुरू की है। खास बात यह है कि उन्होंने सेना में मिलने वाला वेतन और अन्य भत्ते लेने से साफ इनकार कर दिया है।
वेतन और भत्ते लेने से क्यों किया इनकार?
डेनमार्क में सैन्य सेवा करने वाले युवाओं को सरकार की ओर से मासिक वेतन, भोजन भत्ता, आवास और यात्रा जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। लेकिन डेनिश शाही परिवार ने पुष्टि की है कि प्रिंसेस इसाबेला अपनी सैन्य सेवा के दौरान कोई वेतन या भत्ता स्वीकार नहीं करेंगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वह इस दौरान अपने परिवार के संसाधनों पर निर्भर रहेंगी।
महिलाओं के लिए नए सैन्य कार्यक्रम की पहली बैच में शामिल
प्रिंसेस इसाबेला उन पहली महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने डेनमार्क के नए विस्तारित सैन्य सेवा कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण शुरू किया है। हाल के वर्षों में डेनमार्क ने महिलाओं के लिए भी अनिवार्य सैन्य सेवा का दायरा बढ़ाया है और सेवा अवधि को 4 महीने से बढ़ाकर 11 महीने कर दिया है। यह बदलाव यूरोप की बदलती सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए किया गया है।
यूरोप में सुरक्षा चुनौतियों के बीच बड़ा कदम
रूस-यूक्रेन युद्ध और यूरोप की बदलती सुरक्षा परिस्थितियों के बाद डेनमार्क अपनी सैन्य क्षमता को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में अधिक संख्या में प्रशिक्षित सैनिक तैयार करना है। इसी रणनीति के तहत सैन्य सेवा में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ाई जा रही है।
भाई के नक्शेकदम पर चलीं इसाबेला
प्रिंसेस इसाबेला से पहले उनके बड़े भाई और डेनमार्क के युवराज क्राउन प्रिंस क्रिश्चियन भी सैन्य सेवा कर चुके हैं। उन्होंने भी अपनी सेवा के दौरान सरकारी वेतन लेने से इनकार किया था। अब इसाबेला ने भी वही परंपरा अपनाते हुए सार्वजनिक सेवा को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है।
सोशल मीडिया पर हो रही सराहना
प्रिंसेस इसाबेला के इस फैसले की सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा हो रही है। कई लोगों ने इसे सार्वजनिक सेवा और जिम्मेदारी का प्रतीक बताया है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि शाही परिवार का यह कदम युवाओं को देश सेवा के लिए प्रेरित करेगा।
निष्कर्ष
डेनमार्क की प्रिंसेस इसाबेला का सेना में शामिल होना और वेतन-भत्ते लेने से इनकार करना
दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल के बीच
यह कदम न केवल शाही परिवार की सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है,
बल्कि युवाओं के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण माना जा रहा है।
FAQ (Frequently Asked Questions)
Q1. प्रिंसेस इसाबेला कौन हैं?
उत्तर: प्रिंसेस इसाबेला डेनमार्क के राजा फ्रेडरिक X और रानी मैरी की 19 वर्षीय बेटी हैं।
Q2. उन्होंने किस सैन्य इकाई में प्रशिक्षण शुरू किया है?
उत्तर: उन्होंने डेनमार्क की गार्ड हुसार रेजिमेंट में 11 महीने की सैन्य सेवा शुरू की है।
Q3. क्या प्रिंसेस इसाबेला को सेना से वेतन मिलेगा?
उत्तर: नहीं। उन्होंने स्वेच्छा से सैन्य सेवा के दौरान मिलने वाला वेतन और भत्ते लेने से इनकार कर दिया है।
Q4. डेनमार्क ने सैन्य सेवा में क्या बदलाव किया है?
उत्तर: डेनमार्क ने महिलाओं को भी विस्तारित अनिवार्य सैन्य सेवा कार्यक्रम में शामिल किया है और
सेवा अवधि 4 महीने से बढ़ाकर 11 महीने कर दी है।
Q5. क्या शाही परिवार के अन्य सदस्य भी सेना में रहे हैं?
उत्तर: हां। प्रिंसेस इसाबेला के बड़े भाई क्राउन प्रिंस क्रिश्चियन भी सैन्य सेवा कर चुके हैं
और उन्होंने भी वेतन लेने से इनकार किया था।
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