पंकज त्रिपाठी की नई फिल्म
Ohh My Dog Movie Review: बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी की नई फिल्म ‘Ohh My Dog’ 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म का निर्देशन अमित राय ने किया है। फिल्म में पंकज त्रिपाठी के साथ राजेश कुमार, पवन मल्होत्रा, माही राय और गीता अग्रवाल शर्मा जैसे कलाकार नजर आते हैं। लेकिन फिल्म की सबसे खास बात इसके इंसानी किरदार नहीं, बल्कि कहानी के केंद्र में मौजूद कुत्ते ऑस्कर और मोमो हैं।
फिल्म इंसान और जानवर के बीच भरोसे, वफादारी और भावनात्मक रिश्ते को सामने लाती है। कहानी में बच्चों की मासूमियत, परिवार की भावनाएं और अपराध की दुनिया के कुछ गंभीर पहलुओं को भी जोड़ा गया है। फिल्म का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं, बल्कि जानवरों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देना भी नजर आता है।
क्या है Ohh My Dog की कहानी?
फिल्म की कहानी दो अलग-अलग घटनाओं के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है। एक तरफ असम में रहने वाला बच्चा अपने प्यारे कुत्ते मोमो के अचानक गायब होने से परेशान है। दूसरी तरफ बिहार में ऑस्कर नाम का कुत्ता अपने लापता मालिक की तलाश में जुट जाता है।
यहीं से कहानी में एक दिलचस्प समानता सामने आती है। एक बच्चा अपने जानवर दोस्त को ढूंढ़ रहा है, जबकि दूसरी तरफ एक कुत्ता अपने इंसान को खोजने के लिए संघर्ष कर रहा है। दोनों तलाश धीरे-धीरे ऐसे मामलों से जुड़ती जाती हैं, जिनमें डॉग तस्करी, बाल मजदूरी, गरीब मजदूरों के शोषण और अवैध गतिविधियों जैसे गंभीर मुद्दों की झलक दिखाई देती है।
ऑस्कर और मोमो ने संभाली कहानी की कमान
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके कुत्ते वाले किरदार हैं। ऑस्कर कई दृश्यों में बिना किसी संवाद के ही दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है। उसकी वफादारी और अपने मालिक के प्रति लगाव कहानी को भावनात्मक बनाते हैं।
मोमो की तलाश वाला ट्रैक भी फिल्म को आगे बढ़ाता है। बच्चों और कुत्तों के बीच का रिश्ता फिल्म के सबसे सहज और दिल छू लेने वाले हिस्सों में शामिल है।
यही वजह है कि फिल्म का भावनात्मक असर कई जगह कलाकारों के संवादों से ज्यादा जानवरों के व्यवहार के जरिए दिखाई देता है।
पंकज त्रिपाठी का अभिनय कैसा है?
पंकज त्रिपाठी फिल्म में एक शिक्षक की भूमिका में नजर आते हैं। उनका किरदार कहानी के एक हिस्से को मजबूती देता है। अभिनेता ने हमेशा की तरह अपने किरदार को सहज अंदाज में निभाया है।
उनकी खासियत यह है कि वह संवादों और हावभाव के जरिए किरदार को जरूरत से ज्यादा नाटकीय बनाने की कोशिश नहीं करते। फिल्म में उनका अभिनय कहानी की भावनात्मक प्रकृति के साथ अच्छी तरह मेल खाता है।
राजेश कुमार और पवन मल्होत्रा का काम
राजेश कुमार पुलिस अधिकारी के किरदार में नजर आते हैं। उनका अभिनय कहानी के गंभीर हिस्सों के बीच संतुलन बनाए रखता है।
वहीं पवन मल्होत्रा का किरदार अपेक्षाकृत सीमित है, लेकिन उनकी स्क्रीन मौजूदगी प्रभाव छोड़ती है। दोनों कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों को सहज तरीके से निभाया है।
माही राय के लिए खास शुरुआत
फिल्म में माही राय भी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। उनका किरदार कहानी के बाल पक्ष को आगे बढ़ाता है। बच्चे और उसके पालतू कुत्ते के बीच का रिश्ता फिल्म की भावनात्मक नींव मजबूत करता है।
कुछ दृश्यों में उनका किरदार अपनी उम्र से ज्यादा समझदार नजर आता है, लेकिन इसके बावजूद कई भावुक क्षणों में उनका प्रदर्शन कहानी को असरदार बनाता है।
फिल्म में सिर्फ इमोशन नहीं, गंभीर मुद्दे भी
‘Ohh My Dog’ केवल कुत्तों और बच्चों की कहानी नहीं है। फिल्म के भीतर कई गंभीर सामाजिक समस्याओं को भी जगह दी गई है।
कहानी में गरीब मजदूरों की परेशानियां, बाल मजदूरी, जानवरों की तस्करी और इंसानों के शोषण जैसी परिस्थितियों की झलक दिखाई देती है। हालांकि फिल्म इन मुद्दों को किसी लंबे भाषण की तरह प्रस्तुत नहीं करती, बल्कि कहानी के घटनाक्रम के साथ जोड़कर सामने लाती है।
निर्देशन में क्या खास है?
अमित राय ने फिल्म को केवल डॉग लवर्स तक सीमित रखने की कोशिश नहीं की है।
कहानी जानवरों के बहाने इंसानों के व्यवहार और समाज की कुछ वास्तविक समस्याओं पर भी सवाल उठाती है।
फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा वह है, जहां कहानी ऑस्कर और
उसके मालिक के रिश्ते पर केंद्रित रहती है। इन हिस्सों में भावनाएं ज्यादा स्वाभाविक लगती हैं।
हालांकि फिल्म की एक कमजोरी इसकी लंबाई है।
कुछ हिस्सों में कहानी की गति धीमी महसूस होती है
और मुख्य ट्रैक से ध्यान हटता हुआ नजर आता है। अलग-अलग
घटनाओं को जोड़ने की कोशिश के कारण फिल्म कुछ जगह थोड़ी खिंची हुई लग सकती है।
बिहार और असम की लोकेशन ने बढ़ाया असर
फिल्म की कहानी असम और बिहार से जुड़ी हुई है। इन जगहों की लोकेशन कहानी को
ज्यादा वास्तविक वातावरण देने में मदद करती हैं।
छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों को जिस तरह दिखाया गया है, उससे कहानी बनावटी कम और
जमीन से जुड़ी हुई ज्यादा महसूस होती है। बैकग्राउंड म्यूजिक भी कई भावुक दृश्यों के प्रभाव को बढ़ाता है।
क्या फिल्म की कहानी लंबी हो गई?
फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी लंबाई को माना जा सकता है। कुछ दृश्यों और घटनाओं को
थोड़ा छोटा किया जाता तो कहानी ज्यादा तेजी से आगे बढ़ सकती थी।
फिल्म में एक साथ कई सामाजिक मुद्दे शामिल हैं। इससे कहानी का दायरा बढ़ता है,
लेकिन कुछ विषयों को पर्याप्त विस्तार नहीं मिल पाता। इसी कारण
मुख्य भावनात्मक कहानी कई बार दूसरे ट्रैक के कारण धीमी पड़ती दिखाई देती है।
परिवार के साथ देख सकते हैं या नहीं?
फिल्म की कहानी में बच्चों, जानवरों, भावनाओं और सामाजिक संदेश का मिश्रण है।
यही वजह है कि इसे परिवार के साथ देखने वाली फिल्म के तौर पर देखा जा सकता है।
खासकर ऐसे दर्शक जिन्हें कुत्तों और इंसानों के बीच की बॉन्डिंग पसंद है,
उनके लिए फिल्म ज्यादा भावुक और मनोरंजक हो सकती है। शुरुआती समीक्षाओं में भी फिल्म की
पारिवारिक अपील और कुत्तों के किरदारों को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
Ohh My Dog Movie Rating
फिल्म के अभिनय, कहानी, निर्देशन, भावनात्मक जुड़ाव और सामाजिक संदेश को देखते हुए
इसे 3.5/5 स्टार की रेटिंग दी जा सकती है। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत ऑस्कर और मोमो के किरदार,
भावनात्मक कहानी और इंसान-जानवर के रिश्ते का संदेश है।
वहीं कहानी की लंबाई और कुछ जगहों पर धीमी रफ्तार इसकी कमजोर कड़ियां हैं।
अन्य प्रकाशित समीक्षाओं में भी फिल्म को लगभग इसी तरह मिश्रित लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
Verdict: देखें या छोड़ दें?
अगर आपको पारिवारिक फिल्में, कुत्तों की वफादारी, भावनात्मक कहानियां और
सामाजिक संदेश पसंद हैं, तो ‘Ohh My Dog’ आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है।
फिल्म की कहानी में कुछ गंभीर मुद्दे हैं, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य दर्शकों को
इंसान और जानवर के बीच मौजूद भावनात्मक रिश्ते से जोड़ना है। ऑस्कर इस फिल्म की
सबसे बड़ी जान है और कई दृश्यों में वह इंसानी कलाकारों पर भारी पड़ता नजर आता है।
हालांकि फिल्म थोड़ी लंबी महसूस हो सकती है और कुछ जगहों पर कहानी की रफ्तार कम होती है,
फिर भी परिवार के साथ देखने के लिए यह एक संवेदनशील और अलग तरह की फिल्म साबित हो सकती है।
अंतिम फैसला
Ohh My Dog एक भावनात्मक, पारिवारिक और सामाजिक संदेश वाली फिल्म है,
जिसकी सबसे बड़ी ताकत ऑस्कर और मोमो जैसे चार पैरों वाले किरदार हैं।
पंकज त्रिपाठी समेत कलाकारों का अभिनय कहानी को मजबूती देता है।
कुछ हिस्सों में फिल्म की रफ्तार धीमी पड़ती है, लेकिन इंसान और
जानवर के रिश्ते को लेकर इसका संदेश इसे देखने लायक बनाता है।
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