2026 आगामी 28 अगस्त से लागू
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026 को लागू करने की तारीख तय कर दी है। गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक यह कानून 28 अगस्त 2026, यानी रक्षाबंधन के दिन से पूरे महाराष्ट्र में प्रभावी होगा। सरकार ने इस कानून का उद्देश्य बल, दबाव, धोखे, प्रलोभन या अन्य अवैध तरीकों से कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना बताया है।
28 अगस्त से पूरे राज्य में लागू होगा कानून
महाराष्ट्र सरकार के गृह विभाग ने 17 अगस्त को कानून लागू करने संबंधी अधिसूचना जारी की। इसके तहत अधिनियम की संबंधित धारा के अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए 28 अगस्त 2026 को कानून के प्रभावी होने की तारीख निर्धारित किया गया है। यह तारीख रक्षाबंधन के दिन पड़ रही है।
इस कानून को लेकर महाराष्ट्र में लंबे समय से चर्चा चल रही थी। सरकार का कहना है कि इसका मकसद किसी व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता को खत्म करना नहीं, बल्कि जबरदस्ती, धोखाधड़ी, दबाव, लालच या अनुचित प्रभाव के जरिए होने वाले धर्मांतरण को रोकना है।
जबरन धर्म परिवर्तन पर कड़ी कार्रवाई
नए कानून में अवैध तरीके से धर्म परिवर्तन कराने वालों के लिए सख्त दंड का प्रावधान किया गया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार बल, धोखे, दबाव या प्रलोभन के जरिए किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन कराने के मामले में 7 वर्ष तक की सजा हो सकती है। ऐसे अपराध को गैर-जमानती श्रेणी में रखने का भी प्रावधान बताया गया है।
कानून में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर कार्रवाई और सजा का प्रावधान रखा गया है।
अपनी इच्छा से धर्म बदलने पर भी देनी होगी सूचना
इस कानून की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों से जुड़ी है।
यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत 60 दिन पहले संबंधित प्राधिकारी को आवेदन या सूचना देनी होगी। इसके बाद निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार मामले की जांच और आगे की कार्रवाई होगी।
इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना बताया गया है कि धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से हो रहा है या किसी प्रकार के दबाव, धोखे अथवा प्रलोभन के कारण।
शादी के जरिए धर्म परिवर्तन पर भी विशेष प्रावधान
कानून में ऐसे विवाहों को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं जिनमें कथित तौर पर धर्म परिवर्तन को मुख्य उद्देश्य बनाया गया हो।
यदि किसी विवाह के पीछे धर्म परिवर्तन कराने के लिए धोखे, छल या अन्य अवैध तरीके का इस्तेमाल साबित होता है, तो कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में विवाह की वैधता और उससे जुड़े कानूनी प्रभावों को लेकर भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।
बच्चे के धर्म को लेकर क्या है प्रावधान?
इस कानून के सबसे चर्चित प्रावधानों में से एक विवाह से जन्म लेने वाले बच्चे की धार्मिक पहचान से जुड़ा है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार यदि विवाह केवल धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से किया गया पाया जाता है, तो ऐसे मामले में बच्चे की धार्मिक पहचान निर्धारित करने के लिए मां के विवाह से पहले के मूल धर्म को आधार माना जाएगा।
यह प्रावधान कानून को लेकर चर्चा के प्रमुख विषयों में शामिल है।
महिलाओं और नाबालिगों से जुड़े मामलों में सख्ती
कानून में महिलाओं, नाबालिगों तथा कुछ संवेदनशील श्रेणियों से जुड़े कथित
अवैध धर्मांतरण के मामलों में भी कठोर दंड का प्रावधान बताया गया है।
उपलब्ध विवरण के अनुसार नाबालिग, महिला तथा अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से जुड़े
व्यक्ति के अवैध धर्म परिवर्तन के मामलों में 7 वर्ष तक की सजा और आर्थिक दंड का प्रावधान है। सामूहिक
धर्मांतरण के मामलों में भी सख्त कार्रवाई की व्यवस्था बताई गई है।
दोबारा अपराध करने पर और बढ़ेगी सजा
यदि कोई व्यक्ति कानून के तहत अपराध करने के बाद दोबारा इसी तरह के अपराध में संलिप्त पाया जाता है,
तो उसके लिए अधिक कठोर दंड का प्रावधान है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ऐसे मामलों में 10 वर्ष तक की सजा और 5
लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।
कानून को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
अधिनियम को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
कुछ नेताओं ने इसे जबरन और धोखे से होने वाले धर्मांतरण के खिलाफ जरूरी कदम बताया है।
शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कानून का समर्थन करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य महिलाओं को
बहला-फुसलाकर या दबाव के जरिए धर्म परिवर्तन कराने जैसी घटनाओं पर रोक लगाना है।
उन्होंने इसे महिलाओं की सुरक्षा से जोड़ते हुए सरकार के फैसले का स्वागत किया।
कानून क्यों लाया गया?
सरकार की दलील है कि धर्म परिवर्तन यदि किसी व्यक्ति की स्वतंत्र
इच्छा से हो तो धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के तहत उसका सम्मान किया जाना चाहिए।
लेकिन बल, धोखे, दबाव, प्रलोभन या अनुचित प्रभाव के जरिए कराया गया
धर्म परिवर्तन सामाजिक और कानूनी समस्या पैदा कर सकता है।
इसी तरह के मामलों को रोकने के उद्देश्य से महाराष्ट्र में नया कानून लाया गया है।
अब 28 अगस्त से इसके प्रावधान राज्यभर में लागू होंगे।
कानून लागू होने के बाद क्या बदलेगा?
28 अगस्त के बाद धर्म परिवर्तन से संबंधित मामलों में नए कानून के प्रावधान लागू होंगे। पुलिस और
संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के सामने ऐसे मामलों की जांच के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया होगी।
स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को भी निर्धारित समय-सीमा के
भीतर सूचना देने की प्रक्रिया का पालन करना होगा। वहीं बल, धोखे, लालच या अन्य
अवैध माध्यमों से धर्म परिवर्तन कराने के आरोपों में कानून के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।
28 अगस्त को रक्षाबंधन पर लागू होगा कानून
महाराष्ट्र सरकार द्वारा कानून लागू करने के लिए चुनी गई तारीख 28 अगस्त है, जो
इस वर्ष रक्षाबंधन के दिन पड़ रही है। सरकारी अधिसूचना जारी होने के बाद
अब इसके लागू होने को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।
अब महाराष्ट्र में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों पर इसी नए कानून के तहत कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
आने वाले समय में इस कानून के वास्तविक प्रभाव और इसके प्रावधानों के इस्तेमाल को लेकर भी नजर बनी रहेगी।
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