Nepal Flash Flood
नेपाल में नेपाल-तिब्बत सीमा से शुरू हुई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। पहाड़ी इलाकों में आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। जैसे-जैसे राहत और बचाव दल मलबे को हटा रहे हैं, वैसे-वैसे तबाही की भयावह तस्वीर सामने आ रही है। कई स्थानों से शव बरामद किए जा रहे हैं और मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
ताजा सरकारी जानकारी के अनुसार नेपाल में बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में 734 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। वहीं 2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। मलबे और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका के कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की चिंता बनी हुई है।
मलबे से लगातार मिल रहे शव, बढ़ती जा रही चिंता
बाढ़ का पानी कई इलाकों में अपने साथ भारी मात्रा में मिट्टी, चट्टान और मलबा लेकर आया। कई बस्तियां और सड़कें इसकी चपेट में आ गईं। अब पानी का स्तर कुछ जगहों पर कम होने के बाद राहतकर्मी मलबे में तलाश अभियान चला रहे हैं।
तलाशी के दौरान शव मिलने का सिलसिला जारी है। यही वजह है कि प्रशासन को आशंका है कि आने वाले दिनों में मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है। कई प्रभावित इलाकों तक पहुंचना अभी भी मुश्किल बना हुआ है, क्योंकि सड़क और पुल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
नेपाल में सेना समेत बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी बचाव अभियान में जुटे हैं। अब तक 5,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन हजारों लोगों का पता नहीं चल पाने के कारण अभियान को और तेज किया गया है।
2500 से ज्यादा लोग अभी भी लापता
इस आपदा की सबसे बड़ी चिंता लापता लोगों को लेकर है। नेपाल में ही 2,500 से अधिक लोगों के लापता होने की सूचना है। इसके अलावा तिब्बत के प्रभावित क्षेत्रों में भी सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार कुल मिलाकर नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में 3,100 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में 261 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जिनमें 49 भारतीय और 104 नेपाली नागरिक शामिल हैं।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की टनल में फंसे मजदूर
नेपाल की इस प्राकृतिक आपदा ने हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। कई परियोजनाओं की सुरंगों में पानी और मलबा भर जाने से बड़ी संख्या में मजदूरों के फंसे होने की खबर है।
ताजा जानकारी के अनुसार नेपाल के 11 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की टनल में करीब 573 लोग फंसे हुए हैं। इनमें त्रिशूली-1 परियोजना में लगभग 322, अपर त्रिशूली-3बी में 122, अपर त्रिशूली-3ए में 43 और रासुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में 44 लोगों के फंसे होने की जानकारी दी गई है।
इन सुरंगों में नेपाल के साथ-साथ भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। सुरंगों में मलबा और पानी भरे होने के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
नेपाल में फिर बाढ़ का खतरा
पहले आई बाढ़ के बाद खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में एक झील का किनारा टूटने से पानी का बहाव नियंत्रित तरीके से निकल रहा है। फिलहाल वहां पानी के बहाव में तेजी नहीं बताई गई है।
हालांकि भोटेकोशी नदी के आसपास भारी मात्रा में मलबा जमा होने से एक नई झील बनने की खबर है। अधिकारियों को आशंका है कि यदि यह प्राकृतिक जलाशय अचानक टूटता है तो आसपास के इलाकों में दोबारा बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
भारत ने बढ़ाई मदद, चौथा विमान भी नेपाल भेजा
नेपाल में फंसे लोगों की मदद के लिए भारत ने राहत एवं बचाव अभियान तेज किया है।
भारत की ओर से राहत सामग्री भेजी जा रही है और विशेषज्ञ टीमें भी नेपाल पहुंच रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार भारत ने सहायता के तौर पर अपना चौथा विमान नेपाल भेजा है।
सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों और बचाव दलों की
मदद भी की जा रही है। भारत के लिए यह अभियान इसलिए भी महत्वपूर्ण है
क्योंकि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक और तीर्थयात्री मौजूद थे।
320 भारतीय नागरिकों के लापता होने की सूचना
नेपाल और तिब्बत में आई बाढ़ के बाद भारतीय नागरिकों को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
उपलब्ध अपडेट के अनुसार करीब 320 भारतीयों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
दूसरी ओर कई भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। हाल ही में नेपाल में
फंसे भारतीय तीर्थयात्रियों के समूह भी सुरक्षित भारत लौटे हैं। महाराष्ट्र के नागपुर से नेपाल गए
102 तीर्थयात्रियों के काठमांडू से सुरक्षित लौटने की खबर भी सामने आई है।
बिहार और यूपी पर भी नजर
नेपाल में आई इस भीषण जल त्रासदी के बाद भारत के सीमावर्ती राज्यों में भी प्रशासन सतर्क है।
खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश में नदियों के जलस्तर और नेपाल से आने वाले पानी पर नजर रखी जा रही है।
उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा है कि नेपाल की जल त्रासदी से फिलहाल
उत्तर प्रदेश में खतरे की स्थिति नहीं है, लेकिन सरकार पूरी तरह सतर्क है।
वहीं बिहार में भी प्रशासन नदियों के जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी कर रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक नेपाल में भारी बारिश, पहाड़ी इलाकों में अचानक जलभराव और भूस्खलन
जैसी घटनाओं का असर नीचे की ओर बहने वाली नदियों पर पड़ सकता है।
इसलिए भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता जरूरी है।
90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित
इस प्राकृतिक आपदा का असर केवल मृतकों और लापता लोगों की संख्या तक सीमित नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार 90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। कई लोगों के घर तबाह हो गए हैं और
बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है।
सड़क, पुल, बिजली और दूसरी जरूरी सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचा है। प्रभावित क्षेत्रों में भोजन,
पीने के पानी, दवाइयों और अस्थायी आश्रय की जरूरत बढ़ रही है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी चिंता है। लंबे समय तक पानी और
मलबे के बीच रहने से संक्रमण तथा दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
अमेरिका ने भी सहायता का ऐलान किया
नेपाल की इस भीषण आपदा के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मदद का सिलसिला शुरू हो गया है।
अमेरिका ने नेपाल के लिए 3.6 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता देने की घोषणा की है।
इस सहायता में प्रभावित परिवारों के लिए आपातकालीन
खाद्य सहायता भी शामिल है। अमेरिकी मदद से करीब
10 हजार परिवारों को तीन महीने तक जरूरी खाद्य सहायता उपलब्ध कराने की योजना बताई गई है।
राहत अभियान के बीच सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश
फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे में दबे या दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचना है।
हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे मजदूरों को निकालना भी बचाव एजेंसियों के लिए बड़ी परीक्षा है।
बाढ़ ने जिन इलाकों में सड़क और पुलों को बहा दिया है, वहां राहत सामग्री पहुंचाना भी
मुश्किल हो रहा है। सेना और बचाव दल हेलीकॉप्टर तथा अन्य
उपलब्ध संसाधनों के जरिए प्रभावित लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
नेपाल की इस त्रासदी ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़,
भूस्खलन और जलवायु संबंधी आपदाओं के खतरे को सामने ला दिया है।
फिलहाल पूरा ध्यान राहत, बचाव और लापता लोगों की तलाश पर है।
आने वाले दिनों में मलबे से और शव मिलने की आशंका के बीच प्रशासन ने अभियान को तेज कर दिया है।
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