दिल्ली में DTC बस चालकों की हड़ताल
दिल्ली में डीटीसी बस चालकों की हड़ताल लगातार जारी रहने से राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई है। 18 सितंबर को आंदोलन चौथे दिन में पहुंच गया। कई डिपो से बसें सड़कों पर नहीं निकलने के कारण यात्रियों को बस स्टॉप पर लंबा इंतजार करना पड़ रहा है और बड़ी संख्या में लोग मेट्रो, ऑटो तथा ई-रिक्शा जैसे वैकल्पिक साधनों पर निर्भर हैं।
हड़ताल के बीच दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने चालकों से आंदोलन समाप्त कर काम पर लौटने की अपील की है। उनका कहना है कि कर्मचारियों की अधिकांश मांगों पर सरकार की ओर से सहमति बन चुकी है, जबकि वेतन बढ़ोतरी का विषय श्रम विभाग से चर्चा के बाद आगे बढ़ाया जाएगा। दूसरी ओर, प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि जब तक ठोस समाधान सामने नहीं आता, आंदोलन जारी रहेगा।
चौथे दिन भी नहीं थमा बस चालकों का आंदोलन
डीटीसी चालकों की हड़ताल की शुरुआत वेतन, चिकित्सा सुविधा, ओवरटाइम भुगतान और अन्य सेवा शर्तों से जुड़ी मांगों को लेकर हुई थी। तीसरे दिन भी रानी खेड़ा, राजघाट, नेहरू प्लेस, बुराड़ी, वजीरपुर, घुमनहेड़ा और सरिता विहार समेत कई डिपो में चालक काम से दूर रहे।
18 सितंबर की रिपोर्टों में प्रदर्शनकारी संगठन की ओर से हजारों बसों के प्रभावित होने का दावा किया गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार 3,000 से अधिक बसों के सड़क से बाहर रहने की बात कही गई, जबकि संगठन ने प्रभावित बसों की संख्या इससे ज्यादा बताई है।
परिवहन मंत्री ने क्या कहा?
परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने कहा कि सरकार ने चालकों और निजी रियायतधारकों के साथ बैठक की है। उनके अनुसार कई मांगों पर सहमति बन चुकी है और केवल वेतन वृद्धि से जुड़ा विषय अभी आगे की प्रक्रिया में है।
मंत्री ने चालकों से हड़ताल खत्म करने और ड्यूटी पर लौटने की अपील की। सरकार का तर्क है कि सार्वजनिक परिवहन जैसी आवश्यक सेवा लंबे समय तक प्रभावित नहीं रहनी चाहिए।
चालकों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों की ओर से कई मांगें रखी गई हैं। इनमें दैनिक भुगतान बढ़ाना, चिकित्सा सुविधा, बीमा, बोनस, सरकारी छुट्टियों का भुगतान, अवकाश और समान काम के लिए समान पारिश्रमिक जैसी मांगें शामिल हैं।
चालकों और परिचालकों के मुताबिक वर्तमान दैनिक भुगतान 862 रुपये है। यूनियन की ओर से इसे बढ़ाकर 2,000 रुपये प्रतिदिन करने की मांग की गई है।
मेडिकल इंश्योरेंस पर बनी सहमति
सरकार की ओर से बताया गया है कि कर्मचारियों के लिए मेडिकल इंश्योरेंस पर सहमति बन गई है। परिवार के सदस्यों को बीमा कवरेज में शामिल करने के विषय पर विचार किया जा रहा है।
परिवहन मंत्री ने कर्मचारियों के लिए चार दिन की छुट्टी और वेतन वृद्धि से जुड़ा प्रस्ताव श्रम विभाग को भेजे जाने की भी जानकारी दी है।
यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी
डीटीसी बसों की संख्या कम होने से रोजाना बस से कार्यालय, कॉलेज,
स्कूल और अस्पताल जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कई बस स्टॉप पर यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। बस नहीं मिलने पर लोगों को मेट्रो,
ऑटो और ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे कई यात्रियों का दैनिक यात्रा खर्च भी बढ़ गया है।
एयरपोर्ट जाने वालों के लिए भी असर
हड़ताल का असर दिल्ली एयरपोर्ट तक पहुंचने वाले यात्रियों पर भी पड़ा है।
एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाने और वैकल्पिक परिवहन
व्यवस्था का इस्तेमाल करने की सलाह दी है, क्योंकि डीटीसी बस सेवाएं प्रभावित हैं।
दिल्ली मेट्रो पर बढ़ा दबाव
डीटीसी बसों की संख्या कम होने से यात्रियों का एक बड़ा हिस्सा मेट्रो की ओर जा रहा है। हड़ताल के
दौरान यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए मेट्रो सेवाओं में अतिरिक्त ट्रिप चलाने की व्यवस्था भी की गई थी।
इससे राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव दिखाई दे रहा है।
किन इलाकों के डिपो प्रभावित?
हड़ताल में दिल्ली के कई प्रमुख डिपो के चालक शामिल हैं। इनमें रानी खेड़ा, राजघाट,
नेहरू प्लेस, बुराड़ी, वजीरपुर, घुमनहेड़ा और सरिता विहार जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
हालांकि सभी बस सेवाओं के पूरी तरह बंद होने की स्थिति नहीं है और
उपलब्धता डिपो तथा रूट के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
सरकार और कर्मचारियों के बीच क्या है गतिरोध?
पूरे विवाद का मुख्य बिंदु फिलहाल वेतन वृद्धि दिखाई दे रहा है। सरकार का कहना है कि
कई मांगों को स्वीकार किया जा चुका है और वेतन के मुद्दे को श्रम विभाग के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
दूसरी ओर, कर्मचारियों का कहना है कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है और
उन्हें अपनी मांगों पर ठोस निर्णय चाहिए। इसी वजह से हड़ताल खत्म नहीं हुई है।
यात्रियों के लिए क्या विकल्प हैं?
जब तक बस सेवाएं पूरी तरह सामान्य नहीं होतीं, दिल्ली में यात्रियों के पास मेट्रो, ऑटो,
ई-रिक्शा और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों का विकल्प है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी चालकों की हड़ताल के कारण संभावित यातायात व्यवधान को देखते हुए
लोगों को यात्रा के लिए अतिरिक्त समय रखने की सलाह दी है।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर सरकार और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर है।
यदि वेतन और अन्य लंबित मुद्दों पर सहमति बनती है तो बस सेवाएं सामान्य होने का रास्ता खुल सकता है।
फिलहाल कर्मचारियों ने ठोस समाधान मिलने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
निष्कर्ष
दिल्ली में डीटीसी बस चालकों की हड़ताल चौथे दिन भी जारी रहने से सार्वजनिक
परिवहन व्यवस्था प्रभावित है। परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने कर्मचारियों से काम पर लौटने की
अपील करते हुए कहा है कि अधिकांश मांगों पर सहमति बन चुकी है और
वेतन वृद्धि का विषय श्रम विभाग के स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।
वहीं, कर्मचारी संगठन वेतन बढ़ोतरी सहित अपनी मांगों पर स्पष्ट निर्णय की मांग कर रहा है।
ऐसे में दिल्ली के लाखों यात्रियों के लिए अब सबसे अहम सवाल यही है कि बस सेवा कब पूरी तरह सामान्य होगी।
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