रूस के 2026 संसदीय चुनाव में
रूस में 18 से 20 सितंबर 2026 के बीच संसदीय चुनाव के लिए मतदान हुआ। यह 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के हमले के बाद पहला स्टेट ड्यूमा चुनाव है। इस चुनाव की सबसे अहम बात यह रही कि रूस के नियंत्रण वाले यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों के हिस्सों में भी रूसी संसदीय चुनाव के लिए मतदान कराया गया। रूस ने सितंबर 2022 में इन चारों क्षेत्रों को अपने में शामिल करने का दावा किया था, लेकिन इस दावे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिली है।
शुरुआती नतीजों में यूनाइटेड रशिया को बढ़त
रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग से सामने आए शुरुआती आंकड़ों में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थन वाली यूनाइटेड रशिया पार्टी बढ़त पर दिखाई दी। शुरुआती मतगणना में पार्टी को करीब 58 प्रतिशत वोट मिलने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, ये शुरुआती आंकड़े हैं और अंतिम परिणाम अलग हो सकते हैं।
रूस में स्टेट ड्यूमा की कुल 450 सीटों के लिए चुनाव कराया गया। इनमें 225 सीटें पार्टी सूची के आधार पर और 225 सीटें एकल निर्वाचन क्षेत्रों के माध्यम से चुनी जाती हैं।
चार यूक्रेनी क्षेत्रों में पहली बार ड्यूमा चुनाव
2026 के चुनाव में रूस के नियंत्रण वाले डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया के हिस्सों को पहली बार स्टेट ड्यूमा चुनाव की प्रक्रिया में शामिल किया गया।
रूसी अधिकारियों के अनुसार, इन चार क्षेत्रों में 35 लाख से अधिक मतदाता हैं। इन क्षेत्रों में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मतदान रूस के अन्य हिस्सों की तुलना में पहले शुरू किया गया था। कुछ क्षेत्रों में युद्ध और सुरक्षा स्थिति को देखते हुए मतदान प्रक्रिया को कई दिनों तक चलाया गया।
इन इलाकों से स्टेट ड्यूमा के लिए अलग-अलग एकल निर्वाचन क्षेत्र भी बनाए गए हैं। उपलब्ध चुनाव संबंधी जानकारी के अनुसार डोनेट्स्क में तीन, लुहांस्क में दो तथा खेरसॉन और जापोरिज्जिया में एक-एक निर्वाचन क्षेत्र बनाया गया है।
यूक्रेन ने चुनाव को बताया अवैध
यूक्रेन ने रूस द्वारा अपने कब्जे वाले क्षेत्रों में चुनाव कराने का विरोध किया है। कीव का कहना है कि इन क्षेत्रों पर रूस का दावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य नहीं है और वहां रूसी चुनाव कराना यूक्रेन की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है।
यूरोपीय संघ की ओर से भी इन क्षेत्रों में रूसी चुनाव प्रक्रिया को लेकर आपत्ति दर्ज की गई है। दूसरी तरफ, रूस का कहना है कि जिन क्षेत्रों को वह अपने देश का हिस्सा मानता है, वहां रहने वाले लोगों को रूसी राजनीतिक व्यवस्था में भाग लेने का अधिकार है।
चुनाव के दौरान सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी रहने के कारण चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था एक महत्वपूर्ण मुद्दा रही। रूसी अधिकारियों ने मतदान के दौरान ड्रोन हमलों और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिशों के आरोप लगाए।
20 सितंबर को रूस के कई हिस्सों में यूक्रेनी ड्रोन हमलों की भी खबरें सामने आईं। रूसी अधिकारियों ने इन घटनाओं को चुनाव प्रक्रिया के लिए सुरक्षा चुनौती बताया।
विपक्ष की भागीदारी पर भी उठे सवाल
इस चुनाव में विपक्ष की भागीदारी को लेकर भी चर्चा रही। कई युद्ध-विरोधी और विपक्षी उम्मीदवार चुनावी प्रक्रिया से बाहर रहे। इसके कारण चुनाव की प्रतिस्पर्धात्मकता को लेकर आलोचनाएं सामने आईं।
रूस सरकार और चुनाव अधिकारियों ने चुनाव प्रक्रिया को संवैधानिक और वैध बताया है, जबकि आलोचकों और यूक्रेनी पक्ष ने चुनावी माहौल तथा कब्जे वाले क्षेत्रों में मतदान की वैधता पर सवाल उठाए हैं।
क्रीमिया में भी हुआ मतदान
डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया के अलावा क्रीमिया में भी रूसी संसदीय चुनाव के लिए मतदान हुआ। रूस ने 2014 में क्रीमिया को अपने में शामिल करने की घोषणा की थी। इस कदम को भी यूक्रेन और अधिकांश अंतरराष्ट्रीय समुदाय मान्यता नहीं देता है।
चुनाव का रूस की राजनीति पर क्या असर?
यह चुनाव रूस के लिए केवल संसद चुनने की प्रक्रिया नहीं माना जा रहा है, बल्कि युद्धकालीन राजनीतिक माहौल में जनता के समर्थन को प्रदर्शित करने का माध्यम भी है। राष्ट्रपति पुतिन ने मतदान से पहले चुनाव को राष्ट्रीय एकता और सैनिकों के समर्थन से जोड़ते हुए बयान दिए थे।
शुरुआती रुझानों में यूनाइटेड रशिया की बढ़त से रूसी संसद में क्रेमलिन समर्थक
राजनीतिक ताकतों के प्रभाव के बने रहने के संकेत मिले हैं।
हालांकि अंतिम परिणाम आने के बाद ही सीटों का वास्तविक आंकड़ा स्पष्ट होगा।
मतदान प्रतिशत कितना रहा?
रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग के अनुसार मतदान समाप्त होने तक
कुल मतदान प्रतिशत लगभग 56.66 प्रतिशत रहा। चुनाव में 11 करोड़ से अधिक मतदाता पंजीकृत थे।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच क्यों महत्वपूर्ण है यह चुनाव?
रूस में यह चुनाव ऐसे समय हुआ है जब यूक्रेन के साथ युद्ध जारी है और
दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां बनी हुई हैं।
रूस के लिए चुनाव को राष्ट्रीय समर्थन प्रदर्शित करने के अवसर के तौर पर देखा जा रहा है,
जबकि यूक्रेन और उसके सहयोगी विशेष रूप से कब्जे वाले क्षेत्रों में मतदान को मान्यता नहीं देते।
इसलिए 2026 का रूसी संसदीय चुनाव घरेलू राजनीति के
साथ-साथ रूस-यूक्रेन विवाद के अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।
निष्कर्ष
रूस के 2026 संसदीय चुनाव में पहली बार यूक्रेन के उन चार
क्षेत्रों के रूस-नियंत्रित हिस्सों को भी शामिल किया गया,
जिन्हें मॉस्को ने 2022 में रूस का हिस्सा घोषित किया था। शुरुआती मतगणना में यूनाइटेड रशिया को
स्पष्ट बढ़त मिली है। वहीं, यूक्रेन और यूरोपीय पक्ष ने इन क्षेत्रों में चुनाव कराने की वैधता पर
आपत्ति जताई है। अंतिम परिणाम और आधिकारिक सीटों की तस्वीर
सामने आने के बाद रूस की नई संसद का स्वरूप पूरी तरह स्पष्ट होगा।
FAQs
1. रूस में 2026 का संसदीय चुनाव कब हुआ?
रूस में स्टेट ड्यूमा के लिए मुख्य मतदान 18 से 20 सितंबर 2026 के बीच हुआ।
2. रूस के संसदीय चुनाव में कितनी सीटों पर मतदान हुआ?
स्टेट ड्यूमा की कुल 450 सीटों के लिए चुनाव हुआ। इनमें 225 सीटें पार्टी सूची और
225 सीटें एकल निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर चुनी जाती हैं।
3. यूक्रेन के किन क्षेत्रों में रूसी चुनाव कराया गया?
डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया के रूस-नियंत्रित हिस्सों में रूसी संसदीय चुनाव के लिए मतदान कराया गया।
4. शुरुआती रुझानों में कौन सी पार्टी आगे रही?
शुरुआती मतगणना में रूस की सत्तारूढ़ यूनाइटेड रशिया पार्टी आगे रही।
शुरुआती आंकड़ों में उसे लगभग 58 प्रतिशत वोट मिले थे।
5. क्या यूक्रेन ने इन चुनावों को मान्यता दी है?
नहीं। यूक्रेन ने अपने कब्जे वाले क्षेत्रों में रूस द्वारा कराए गए चुनाव को अवैध बताया है।
यूरोपीय पक्ष ने भी इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है।
6. रूस ने इन क्षेत्रों में चुनाव क्यों कराया?
रूस इन क्षेत्रों को अपने देश का हिस्सा मानता है और वहां रहने वाले लोगों को अपनी राजनीतिक प्रक्रिया में
शामिल करने का दावा करता है। यूक्रेन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस दावे को स्वीकार नहीं किया गया है।
7. रूस में मतदान प्रतिशत कितना रहा?
रूस के केंद्रीय चुनाव आयोग के अनुसार मतदान समाप्त होने तक मतदान प्रतिशत करीब 56.66 प्रतिशत रहा
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