संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के बीच इजरायल ने संयुक्त राष्ट्र के खिलाफ एक नया डिजिटल अभियान शुरू किया है। इस अभियान का नाम “UN’s Lie Industry” रखा गया है। इजरायल सरकार का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न रिपोर्टों और बयानों में इजरायल के खिलाफ व्यवस्थित पक्षपात किया जा रहा है।
इस अभियान के तहत एक व्यंग्यात्मक वीडियो जारी किया गया है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र महासभा के सभागार को तोतों से भरा हुआ दिखाया गया है। वीडियो में अलग-अलग देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले तोते बार-बार “Blame Israel” यानी “इजरायल को दोष दो” कहते नजर आते हैं। वीडियो के अंत में संदेश दिया जाता है कि किसी बात को बार-बार दोहराने से वह सच नहीं बन जाती।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के बीच शुरू हुआ अभियान
यह अभियान ऐसे समय शुरू किया गया है जब न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र चल रहा है। अभियान को इजरायल के प्रवासी मामलों एवं यहूदी विरोधी भावना से निपटने वाले मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के राष्ट्रीय जन कूटनीति निदेशालय ने मिलकर शुरू किया है।
इजरायल का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके अनुसार संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टिंग और नीतियों में मौजूद पक्षपात को सामने रखना है। अभियान का डिजिटल प्रचार खास तौर पर अमेरिका और यूरोप की राजधानियों में किए जाने की जानकारी सामने आई है।
वीडियो में तोतों के जरिए दिया गया संदेश
अभियान का सबसे चर्चित हिस्सा इसका वीडियो है। इसमें संयुक्त राष्ट्र महासभा के हॉल में अलग-अलग देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले तोते दिखाए गए हैं।
एक-एक करके सभी तोते एक ही बात दोहराते हैं—“Blame Israel”। जैसे-जैसे वीडियो आगे बढ़ता है, यही आवाज कई बार सुनाई देती है और पूरा सभागार एक तरह की सामूहिक आवाज में बदलता दिखाई देता है।
वीडियो के अंत में संदेश दिया गया है कि “Repeating lies doesn’t make them true”, यानी किसी कथित झूठ को बार-बार दोहराने से वह सच नहीं बन जाता।
इजरायल ने संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों पर उठाए सवाल
इजरायल सरकार का आरोप है कि उसके खिलाफ कई दावे और सूचनाएं विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के बीच बार-बार दोहराई जाती हैं। उसके अनुसार, जब किसी दावे को अलग-अलग रिपोर्टों और मंचों पर दोहराया जाता है तो वह लोगों के बीच स्थापित तथ्य जैसा दिखाई देने लगता है।
इसी तर्क को अभियान के वीडियो और वेबसाइट के जरिए प्रस्तुत किया गया है। हालांकि, ये इजरायल सरकार द्वारा लगाए गए आरोप हैं; संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों और संबंधित दावों की स्वतंत्र तथ्य-जांच को अलग से देखना जरूरी है।
अभियान के साथ वेबसाइट भी लॉन्च
वीडियो के साथ एक वेबसाइट भी शुरू की गई है। इजरायल के अनुसार, इस वेबसाइट को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सहयोग से तैयार किया गया है।
इस वेबसाइट पर इजरायल ने संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों और दस्तावेजों से जुड़े कई मामलों को अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है। इसमें सूचना में कथित हेरफेर, गाजा में भुखमरी को लेकर दावे, UNRWA में हमास की कथित मौजूदगी और इजरायल के खिलाफ “नरसंहार” के नैरेटिव जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है।
गाजा को लेकर भी लगाए गए आरोप
अभियान में गाजा की मानवीय स्थिति को लेकर जारी रिपोर्टों और दावों को भी निशाना बनाया गया है। इजरायल का कहना है कि गाजा में भुखमरी और मानवीय संकट से संबंधित कुछ दावों को जिस तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया गया, उसमें तथ्यों को लेकर गंभीर सवाल हैं।
दूसरी ओर, गाजा की मानवीय स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्टें अलग-अलग निष्कर्ष और आंकड़े प्रस्तुत करती रही हैं। इसलिए इस मुद्दे पर अलग-अलग स्रोतों के दावों को उनके मूल दस्तावेजों और प्रमाणों के आधार पर समझना महत्वपूर्ण है।
*इजरायल के मंत्री ने UN को बताया ‘इको चैंबर’
इजरायल के प्रवासी मामलों के मंत्री अमीखाई चिकली ने संयुक्त राष्ट्र महासभा पर इजरायल के
खिलाफ आरोपों को बार-बार दोहराने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि एक ही तरह के आरोप रिपोर्ट,
भाषण और अलग-अलग मंचों के माध्यम से दोहराए जाते हैं।
इजरायल के राष्ट्रीय जन कूटनीति निदेशालय की
प्रमुख त्जिपी होटोवेली ने भी संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों पर गंभीर आरोप लगाए और
कहा कि उनका देश इन दावों के जवाब में अपने तथ्य और शोध सामने रख रहा है।
ये बयान इजरायल सरकार के आधिकारिक रुख को दर्शाते हैं।
डिजिटल प्रचार पर विशेष जोर
इस अभियान की खास बात यह है कि इसे केवल पारंपरिक कूटनीतिक मंच तक
सीमित नहीं रखा गया है। इजरायल ने वीडियो, वेबसाइट और डिजिटल प्रचार के
माध्यम से अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक अपना संदेश पहुंचाने की रणनीति अपनाई है।
अभियान का विशेष फोकस अमेरिका और यूरोप की राजधानियों में डिजिटल पहुंच बढ़ाने पर बताया गया है।
इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय जनमत में इजरायल के पक्ष को अधिक प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना है।
UN और इजरायल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर
गाजा युद्ध और 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद से इजरायल और संयुक्त राष्ट्र के बीच कई मुद्दों पर
तीखे मतभेद सामने आते रहे हैं। मानवीय सहायता, गाजा की स्थिति, इजरायली सैन्य कार्रवाई और
अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े विषयों पर अलग-अलग पक्षों की अलग-अलग व्याख्याएं हैं।
नया डिजिटल अभियान इन्हीं व्यापक मतभेदों के बीच शुरू किया गया है। इजरायल
इसे अपने खिलाफ कथित पक्षपात का जवाब बता रहा है, जबकि अभियान में किए गए दावों की
स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में अलग-अलग साक्ष्यों के आधार पर करनी होगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह अभियान?
यह अभियान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल किसी एक बयान या रिपोर्ट का जवाब नहीं है। इजरायल ने
इसके जरिए संयुक्त राष्ट्र की सूचनाओं और रिपोर्टों पर व्यापक सवाल उठाने की कोशिश की है।
तोतों वाला वीडियो इस पूरे अभियान का प्रतीकात्मक हिस्सा है।
इसके जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि
एक ही आरोप को लगातार दोहराए जाने से वह अपने आप सत्यापित तथ्य नहीं बन जाता।
आगे क्या होगा?
संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौजूदा सत्र में इजरायल और गाजा से जुड़े मुद्दे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय विषयों में बने हुए हैं।
ऐसे में इस डिजिटल अभियान के बाद इजरायल और संयुक्त राष्ट्र के बीच सूचना और
कूटनीतिक स्तर पर बहस और तेज होने की संभावना है।
अभियान के जरिए इजरायल ने अपने पक्ष के दस्तावेज, शोध और दावे
अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने रखने की कोशिश की है। आने वाले दिनों में इन दावों पर
विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और देशों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।
निष्कर्ष
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के बीच इजरायल का नया “UN’s Lie Industry”
अभियान अंतरराष्ट्रीय सूचना युद्ध और कूटनीतिक संदेशबाजी का नया
उदाहरण बनकर सामने आया है। तोतों वाले वीडियो के जरिए इजरायल ने
संयुक्त राष्ट्र पर उसके खिलाफ दावों को बार-बार दोहराने का आरोप लगाया है।
हालांकि, अभियान में लगाए गए आरोप इजरायल सरकार के दावे हैं।
किसी भी विवादित दावे की वास्तविकता समझने के लिए संबंधित संयुक्त राष्ट्र दस्तावेजों,
स्वतंत्र जांच और उपलब्ध प्रमाणों को भी देखना जरूरी होगा।
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