Russia Center 2026
रूस का रणनीतिक सैन्य अभ्यास ‘सेंटर-2026’ आधुनिक युद्ध तकनीक के प्रदर्शन के साथ पूरा हो गया। चेल्याबिंस्क क्षेत्र के चेबारकुल्स्की प्रशिक्षण मैदान में हुए अंतिम चरण को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने देखा। रूस के अनुसार, पूरे अभ्यास में करीब 47,000 सैनिक शामिल हुए और 11 प्रशिक्षण क्षेत्रों के साथ कैस्पियन सागर में भी सैन्य गतिविधियां हुईं।
इस सैन्य अभ्यास में ड्रोन, मानव रहित जमीनी वाहन और रोबोटिक सिस्टम पर खास जोर दिखाई दिया। रूसी रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव के मुताबिक, अंतिम चरण में करीब 700 सैन्य उपकरण, 600 से अधिक ड्रोन और 60 से ज्यादा रोबोटिक सिस्टम इस्तेमाल किए गए।
ड्रोन स्वॉर्म से लेकर रोबोटिक सिस्टम तक का प्रदर्शन
‘सेंटर-2026’ की सबसे चर्चित विशेषताओं में ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल रहा। अभ्यास के दौरान ड्रोन के समूहों के जरिए लक्ष्य पर हमले और निगरानी जैसी गतिविधियों का प्रदर्शन किया गया।
रिपोर्टों के अनुसार, रूस ने गेरान-4 और गेरान-5 जैसे ड्रोन सिस्टम का भी प्रदर्शन किया। इसके अलावा ड्रोन से निपटने वाली प्रणालियों और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीक को भी अभ्यास का हिस्सा बनाया गया।
आधुनिक युद्ध में ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए ऐसे सिस्टम अब केवल निगरानी तक सीमित नहीं हैं। इनका इस्तेमाल लक्ष्य की पहचान, हमला और एंटी-ड्रोन ऑपरेशन में भी किया जा रहा है।
बिना चालक वाले टैंक और रोबोटिक वाहन
अभ्यास के दौरान रूस ने मानव रहित जमीनी प्रणालियों का भी प्रदर्शन किया। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कुछ रोबोटिक प्लेटफॉर्म को सैन्य अभियानों में सहयोग देने और हमले के दौरान सैनिकों की प्रत्यक्ष जोखिम वाली भूमिका को कम करने के उद्देश्य से प्रदर्शित किया गया।
ऐसे सिस्टम आधुनिक युद्ध में तेजी से महत्वपूर्ण हो रहे हैं। रूस के अभ्यास में रोबोटिक वाहनों के साथ-साथ टैंकों और अन्य बख्तरबंद प्रणालियों को भी शामिल किया गया।
टैंकों के साथ एंटी-ड्रोन तकनीक
अभ्यास में टैंकों को ड्रोन हमलों से बचाने के लिए सक्रिय सुरक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन भी किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, टी-90एम टैंकों के साथ एंटी-ड्रोन सुरक्षा तकनीक का इस्तेमाल दिखाया गया।
इसका उद्देश्य युद्धक्षेत्र में बख्तरबंद वाहनों को छोटे और कम लागत वाले ड्रोन हमलों से बचाने की क्षमता का प्रदर्शन करना था।
चीन, पाकिस्तान और कई देशों की भागीदारी
‘सेंटर-2026’ केवल रूस तक सीमित सैन्य अभ्यास नहीं था। इसमें चीन, पाकिस्तान, बेलारूस, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और मंगोलिया सहित कई देशों की सैन्य भागीदारी रही। इसके अलावा बड़ी संख्या में विदेशी सैन्य प्रतिनिधियों ने अभ्यास को पर्यवेक्षक के रूप में देखा।
रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, करीब 60 देशों के प्रतिनिधि इस व्यापक सैन्य गतिविधि से जुड़े रहे। इनमें कई देशों के प्रतिनिधि पर्यवेक्षक के तौर पर शामिल हुए।
पुतिन ने देखा सैन्य अभ्यास का अंतिम चरण
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 2 अक्टूबर को चेबारकुल्स्की प्रशिक्षण मैदान पहुंचकर अभ्यास के अंतिम चरण का निरीक्षण किया। उनके सामने विभिन्न सैन्य उपकरणों और नई तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।
पुतिन ने अभ्यास के दौरान हालिया युद्ध अनुभवों से मिले सैन्य सबक को सहयोगी देशों के साथ साझा करने और आपसी विश्वास बढ़ाने की बात कही।
यूक्रेन युद्ध से मिले अनुभवों का इस्तेमाल
सैन्य विश्लेषणों में ‘सेंटर-2026’ के दौरान ड्रोन और रोबोटिक तकनीक पर जोर को रूस-यूक्रेन युद्ध से मिले अनुभवों से जोड़कर देखा गया है। आधुनिक संघर्ष में ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और मानव रहित जमीनी सिस्टम की भूमिका लगातार बढ़ी है।
कुछ विश्लेषकों के अनुसार, इस अभ्यास में रूस अपने युद्ध अनुभवों से विकसित तकनीक और रणनीतियों को सहयोगी देशों के सैन्य प्रशिक्षण के साथ जोड़ रहा है। हालांकि, किसी सैन्य अभ्यास के प्रदर्शन से
वास्तविक युद्ध क्षमता के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
47 हजार से ज्यादा सैनिक हुए शामिल
रूसी अधिकारियों के अनुसार, पूरे ‘सेंटर-2026’ अभ्यास में 47,000 से अधिक सैन्यकर्मी शामिल हुए।
अभ्यास 11 प्रशिक्षण क्षेत्रों और कैस्पियन सागर के क्षेत्र में आयोजित किया गया।
चेबारकुल्स्की प्रशिक्षण मैदान के अंतिम चरण में लगभग 6,000 सैनिकों की
भागीदारी बताई गई। इस चरण में 700 के आसपास सैन्य उपकरणों के
साथ 600 से अधिक ड्रोन और 60 से अधिक रोबोटिक सिस्टम शामिल थे।
आधुनिक युद्ध की बदलती तस्वीर
इस अभ्यास से यह स्पष्ट होता है कि सैन्य प्रशिक्षण में मानव रहित तकनीक का महत्व बढ़ रहा है।
ड्रोन, रोबोटिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और एंटी-ड्रोन सिस्टम
अब पारंपरिक टैंक, तोप और विमान के साथ संयुक्त रूप से इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
हालांकि, किसी अभ्यास में प्रदर्शित तकनीक की वास्तविक प्रभावशीलता और
युद्ध की परिस्थितियों में उसका प्रदर्शन अलग हो सकता है। इसलिए
अभ्यास के दृश्यों को रूस की वास्तविक युद्ध क्षमता का पूर्ण प्रमाण नहीं माना जा सकता।
रूस के ‘सेंटर-2026’ अभ्यास की मुख्य बातें
- अभ्यास का नाम सेंटर-2026 था।
- अंतिम चरण चेल्याबिंस्क क्षेत्र के चेबारकुल्स्की प्रशिक्षण मैदान में हुआ।
- पूरे अभ्यास में करीब 47,000 सैनिक शामिल हुए।
- 11 प्रशिक्षण क्षेत्रों और कैस्पियन सागर में गतिविधियां हुईं।
- अंतिम चरण में 600 से ज्यादा ड्रोन इस्तेमाल किए गए।
- 60 से ज्यादा रोबोटिक सिस्टम शामिल रहे।
- चीन, पाकिस्तान, बेलारूस, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और मंगोलिया की भागीदारी रही।
- राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अंतिम चरण का निरीक्षण किया।
- गेरान सीरीज के जेट-संचालित ड्रोन का भी प्रदर्शन किया गया।
निष्कर्ष
रूस का सेंटर-2026 सैन्य अभ्यास ऐसे समय में पूरा हुआ है जब ड्रोन और मानव रहित तकनीक आधुनिक
युद्ध का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। अभ्यास में बड़ी संख्या में ड्रोन, रोबोटिक सिस्टम और एंटी-ड्रोन तकनीक का
इस्तेमाल इस बदलती सैन्य जरूरत को दर्शाता है। चीन और पाकिस्तान समेत
कई देशों की भागीदारी ने इसे बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास का रूप दिया। हालांकि,
अभ्यास में प्रदर्शित क्षमताओं और वास्तविक युद्धक्षेत्र की क्षमता के बीच अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है
FAQ
1. सेंटर-2026 सैन्य अभ्यास क्या है?
सेंटर-2026 रूस का एक रणनीतिक सैन्य अभ्यास है, जिसमें रूसी सेना के साथ
कई अन्य देशों के सैन्य दल और प्रतिनिधि शामिल हुए।
2. सेंटर-2026 में कितने सैनिक शामिल हुए?
रूसी अधिकारियों के अनुसार पूरे अभ्यास में 47,000 से अधिक सैनिक शामिल हुए।
3. अभ्यास में कितने ड्रोन इस्तेमाल किए गए?
चेबारकुल्स्की प्रशिक्षण मैदान के अंतिम चरण में 600 से अधिक ड्रोन इस्तेमाल किए गए थे।
4. सेंटर-2026 में कौन-कौन से देश शामिल हुए?
रूस के अलावा चीन, पाकिस्तान, बेलारूस, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और मंगोलिया सहित कई देशों ने सैन्य भागीदारी की।
5. क्या पुतिन ने सैन्य अभ्यास देखा?
हां। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 2 अक्टूबर 2026 को चेबारकुल्स्की प्रशिक्षण मैदान में अभ्यास के अंतिम चरण का निरीक्षण किया।
6. सेंटर-2026 में किस तकनीक पर जोर दिया गया?
अभ्यास में ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, मानव रहित जमीनी वाहन और रोबोटिक सिस्टम पर विशेष ध्यान दिया गया।
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