दिल्ली में
राजधानी दिल्ली में तिरंगा मार्च से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई। NSUI के कार्यकर्ताओं ने संसद मार्ग पुलिस थाने के बाहर देर रात तक प्रदर्शन किया। संगठन का आरोप है कि पहले हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान उसकी महिला सदस्यों के साथ पुलिसकर्मियों ने मारपीट की थी। इसी मामले में FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर धरने पर बैठे NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ और भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
इस घटनाक्रम के बीच दिल्ली के कनॉट प्लेस में प्रस्तावित तिरंगा मार्च को लेकर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। प्रदर्शनकारियों की मांग, पुलिस की कार्रवाई और राजधानी में लागू प्रतिबंधों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।
संसद मार्ग थाने के बाहर देर रात तक चला धरना
NSUI के कार्यकर्ता महिला सदस्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में FIR दर्ज कराने की मांग कर रहे थे। संगठन का कहना था कि इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
इसी को लेकर कार्यकर्ता संसद मार्ग पुलिस थाने के बाहर एकत्र हुए और धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान संगठन के नेताओं ने पुलिस प्रशासन से शिकायत दर्ज करने, मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग उठाई।
NSUI का आरोप है कि शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं को ही हिरासत में लिया गया। संगठन ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि महिला सदस्यों को न्याय दिलाने की मांग से पीछे नहीं हटेंगे।
विनोद जाखड़ और उदय भानु चिब हिरासत में
प्रदर्शन के दौरान NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ और भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब समेत कई कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई।
विनोद जाखड़ ने आरोप लगाया कि संगठन की महिला कार्यकर्ताओं के साथ पहले हुए प्रदर्शन में दुर्व्यवहार किया गया था। उन्होंने दावा किया कि कुछ महिला सदस्यों को एक अंधेरे कमरे में ले जाकर जूते और बूट से पीटा गया।
जाखड़ ने सवाल उठाया कि जब संगठन अपनी महिला सदस्यों के लिए कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है, तो उसकी शिकायत पर सुनवाई क्यों नहीं हो रही है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस की कार्रवाई से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जरूरी है। संबंधित घटनाओं की वास्तविक स्थिति जांच और आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।
महिला कार्यकर्ताओं ने क्या आरोप लगाए?
NSUI ने दावा किया कि पहले हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान उसकी महिला सदस्यों रितु बराला और अथिरा विजयन के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई थी। संगठन ने इस मामले में एक महिला पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की मांग की।
रितु बराला के संबंध में सामने आई चिकित्सकीय जानकारी में शरीर के कुछ हिस्सों पर चोट और खरोंच के निशान दर्ज होने की बात बताई गई है। हालांकि, चोटों का कारण और घटनाक्रम में किसकी क्या भूमिका रही, इसका निर्धारण जांच के आधार पर किया जाना चाहिए।
अथिरा विजयन की शिकायत के आधार पर जीरो FIR दर्ज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। जीरो FIR का मतलब है कि किसी संज्ञेय अपराध की शिकायत उस पुलिस थाने में भी दर्ज की जा सकती है, जिसके क्षेत्र में घटना नहीं हुई हो; बाद में उसे संबंधित थाने को भेजा जा सकता है।
इस मामले में संगठन ने मांग की है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी की जिम्मेदारी सामने आती है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
CJP के तिरंगा मार्च से पहले दिल्ली में सुरक्षा सख्त
NSUI का प्रदर्शन ऐसे समय हुआ, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च का आह्वान किया था।
पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने लोगों से शाम पांच बजे तिरंगा लेकर पहुंचने की अपील की थी। इस प्रस्तावित मार्च को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठे विवाद से जोड़ा गया है।
CJP ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए निष्पक्ष चुनावी व्यवस्था की मांग की है। पार्टी के दो नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका की गिरफ्तारी का विरोध भी इस राजनीतिक घटनाक्रम का हिस्सा बताया गया है।
प्रस्तावित मार्च को देखते हुए पुलिस ने कनॉट प्लेस और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाई तथा लोगों से प्रतिबंधित जमावड़े से दूर रहने की अपील की।
धारा 163 लागू, सेंट्रल पार्क दो दिन बंद
कनॉट प्लेस और आसपास के संबंधित क्षेत्रों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए। इस प्रावधान का इस्तेमाल संभावित अशांति या सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा होने की आशंका के दौरान किया जा सकता है।
नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने प्रशासनिक कारणों से कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को
16 और 17 अक्टूबर को आम लोगों के लिए बंद रखने की घोषणा की थी।
प्रशासन का उद्देश्य प्रस्तावित कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी अप्रिय घटना की
आशंका को कम करना है। लोगों को संबंधित क्षेत्र में लागू आदेशों का पालन करने की सलाह दी गई।
दिल्ली में ट्रैफिक पर भी पड़ सकता है असर
प्रस्तावित तिरंगा मार्च और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर कनॉट प्लेस तथा आसपास के
इलाकों में यातायात प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी।
संसद मार्ग, जनपथ, बाराखंभा रोड, मिंटो रोड और आसपास के
प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही में बदलाव हो सकता है।
पुलिस जरूरत के अनुसार यातायात को दूसरे रास्तों पर मोड़ सकती है।
दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों, कार्यालय जाने वाले लोगों और बाजार में खरीदारी करने वालों को
यात्रा से पहले ताजा ट्रैफिक एडवाइजरी देखने की सलाह दी गई है। सार्वजनिक
परिवहन का उपयोग करना और अतिरिक्त समय लेकर निकलना उपयोगी हो सकता है।
NSUI ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी
NSUI के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रवि पांडे ने हिरासत की कार्रवाई का विरोध किया और
महिला सदस्यों की शिकायत पर FIR दर्ज करने तथा निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
संगठन का कहना है कि जब तक शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं होती,
तब तक वह अपने साथियों को न्याय दिलाने की मांग जारी रखेगा। संगठन ने
पुलिस प्रशासन से मामले में पारदर्शिता बरतने और सभी संबंधित पक्षों की बात सुनने की अपील की है।
वहीं, पुलिस की कार्रवाई और महिला सदस्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार से जुड़े आरोपों की
पूरी तस्वीर सामने आने के लिए जांच के नतीजों और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा।
आगे क्या होगा?
इस घटनाक्रम में अब तीन प्रमुख बातें महत्वपूर्ण हैं। पहली, महिला कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर जांच और
कानूनी कार्रवाई की स्थिति। दूसरी, हिरासत में लिए गए नेताओं और कार्यकर्ताओं के संबंध में आगे की कार्रवाई।
तीसरी, तिरंगा मार्च को लेकर प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच आगे क्या स्थिति बनती है।
राजधानी में राजनीतिक विरोध और सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
वहीं, शिकायत करने वाले लोगों को कानूनी प्रक्रिया के तहत निष्पक्ष सुनवाई मिलना भी जरूरी है।
निष्कर्ष
दिल्ली में तिरंगा मार्च से पहले NSUI के देर रात हुए प्रदर्शन और कई नेताओं की
हिरासत ने राजनीतिक विवाद को बढ़ा दिया है। संगठन महिला कार्यकर्ताओं के
साथ कथित मारपीट के मामले में FIR और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
दूसरी ओर, कनॉट प्लेस में प्रस्तावित मार्च को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है।
अब सभी की नजर शिकायतों पर होने वाली कार्रवाई, जांच की प्रगति और प्रशासन के अगले कदमों पर है।
FAQ —
1. NSUI ने दिल्ली में प्रदर्शन क्यों किया?
NSUI ने अपनी महिला सदस्यों के साथ कथित मारपीट की शिकायत पर
FIR दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया।
2. क्या विनोद जाखड़ को हिरासत में लिया गया?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ समेत कई कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया।
3. उदय भानु चिब कौन हैं?
उदय भानु चिब भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्हें भी
इस घटनाक्रम में हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई।
4. महिला कार्यकर्ताओं ने क्या आरोप लगाए?
संगठन ने आरोप लगाया कि पहले हुए प्रदर्शन के दौरान महिला सदस्यों के साथ
पुलिसकर्मियों ने दुर्व्यवहार और मारपीट की। इन आरोपों की जांच जरूरी है।
5. तिरंगा मार्च कहां प्रस्तावित था?
‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित था।
6. दिल्ली में सुरक्षा क्यों बढ़ाई गई?
प्रस्तावित मार्च और विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए
कनॉट प्लेस तथा आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाई गई।
7. क्या महिला कार्यकर्ताओं की शिकायत पर FIR दर्ज हुई?
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अथिरा विजयन की शिकायत के आधार पर जीरो
FIR दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले की आगे की जांच और
कार्रवाई की स्थिति की पुष्टि नवीनतम आधिकारिक जानकारी से की जानी चाहिए।
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