VB-G RAM G बिल : भारतीय राजनीति में एक बार फिर ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को लेकर घमासान मचा हुआ है। संसद ने हाल ही में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) बिल को पारित कर दिया है, जो महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेगा। इस बिल को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विपक्ष के भारी हंगामे के बीच पास किया गया। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस बिल को ‘ग्राम विरोधी’ और ‘राज्य विरोधी’ करार देते हुए मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने एक ही दिन में मनरेगा के 20 साल के इतिहास को ध्वस्त कर दिया।
मनरेगा क्या थी और क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
मनरेगा, जो 2005 में यूपीए सरकार द्वारा शुरू की गई थी, दुनिया की सबसे सफल गरीबी उन्मूलन और सशक्तिकरण योजनाओं में से एक मानी जाती है। यह योजना ग्रामीण परिवारों को सालाना 100 दिनों का रोजगार गारंटी देती थी, जो मांग आधारित और अधिकार आधारित थी। मजदूर खुद काम की मांग कर सकते थे, और योजना पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा फंडेड थी।

इसके फायदे असंख्य थे:
- ग्रामीण मजदूरों को सशक्त बनाया, उनकी बार्गेनिंग पावर बढ़ाई।
- शोषण और मजबूरी में पलायन कम हुआ।
- मजदूरी दरें बढ़ीं, काम की स्थितियां बेहतर हुईं।
- ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास हुआ, जैसे तालाब, सड़कें आदि।
- कोविड महामारी के दौरान करोड़ों लोगों को भूख और कर्ज से बचाया।
- महिलाओं को सबसे ज्यादा फायदा – हर साल 50% से ज्यादा व्यक्ति-दिवस महिलाओं के थे।
- दलित, आदिवासी, भूमिहीन मजदूर और पिछड़े वर्गों को मजबूती दी।
राहुल गांधी ने ठीक ही कहा कि मनरेगा ग्रामीण भारत की ‘आखिरी रक्षा पंक्ति’ थी।
VB-G RAM G बिल में क्या बदलाव हैं और क्यों है विवाद?
नया VB-G RAM G बिल 2025 मनरेगा को पूरी तरह रिप्लेस कर देगा। इसमें कुछ बदलाव तो सकारात्मक लगते हैं, जैसे रोजगार की गारंटी 100 से बढ़ाकर 125 दिन करना। लेकिन राहुल गांधी और विपक्ष के अनुसार, यह बदलाव मनरेगा की आत्मा को मारने वाले हैं:
- मांग आधारित गारंटी खत्म: अब योजना दिल्ली से नियंत्रित ‘राशन वाली स्कीम’ बन जाएगी। काम की मांग पर अधिकार नहीं रहेगा।
- केंद्रीकरण: गांवों और राज्यों की स्वायत्तता खत्म, सब कुछ दिल्ली से तय होगा।
- फंडिंग बोझ राज्यों पर: केंद्र का हिस्सा कम, राज्यों को ज्यादा खर्च करना पड़ेगा।
- काम सीमित करना: काम को कैप किया जाएगा, और इनकार करने के नए तरीके जोड़े जाएंगे।
- महात्मा गांधी का नाम हटाना: विपक्ष इसे बापू के विचारों का अपमान बता रहा है।
- बिल को बिना उचित चर्चा के पारित किया गया – स्टैंडिंग कमिटी में भेजने की मांग खारिज।
राहुल गांधी ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा: “मोदी सरकार ने कल रात एक दिन में मनरेगा के 20 साल ध्वस्त कर दिए। यह ग्राम विरोधी और राज्य विरोधी है। इससे महिलाएं, दलित, आदिवासी और गरीब ओबीसी सबसे पहले बाहर हो जाएंगे।”
राहुल गांधी का आरोप: मोदी का लक्ष्य ग्रामीण भारत को कमजोर करना
#राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मोदी जी का लक्ष्य है – श्रम को कमजोर करना, ग्रामीण भारत की ताकत (खासकर दलित, ओबीसी, आदिवासी) तोड़ना, सत्ता केंद्रित करना और नारे बेचकर सुधार का ढोंग करना। कांग्रेस इस बिल के खिलाफ मजदूरों, पंचायतों और राज्यों के साथ खड़ी है। उन्होंने राष्ट्रव्यापी मोर्चा बनाकर इस कानून को वापस कराने का ऐलान किया है।
विपक्ष के अन्य नेता जैसे प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी कहा कि यह गरीबों के लिए हानिकारक है, क्योंकि केंद्र फंडिंग कम कर रहा है।
निष्कर्ष: ग्रामीण भारत का भविष्य दांव पर
- VB-G RAM G बिल को सरकार ‘विकसित भारत’ का हिस्सा बता रही है, लेकिन विपक्ष इसे
- ग्रामीण गरीबों की आजीविका पर हमला मान रहा है। मनरेगा ने करोड़ों जीवन बदले,
- अब नया बिल क्या करेगा? यह सवाल पूरे देश के सामने है। अगर आप ग्रामीण विकास,
- रोजगार गारंटी या राजनीतिक बहस में रुचि रखते हैं, तो यह मुद्दा आपके लिए महत्वपूर्ण है।
