BBC Trump free speech ट्रंप ने BBC पर पैनोरमा डॉक्यूमेंट्री में 6 जनवरी 2021 स्पीच की एडिटिंग को लेकर अरबों डॉलर का मुकदमा किया है। लेख में तर्क दिया गया है कि BBC को इस मामले का बचाव करते हुए ट्रंप को फ्री स्पीच का सबक सिखाना चाहिए। जानिए पूरा विवाद और मीडिया फ्रीडम की बहस

6 जनवरी 2021 को ट्रंप ने अपने समर्थकों को संबोधित किया। भाषण की शुरुआत में उन्होंने कहा: “हम कैपिटल की ओर मार्च करेंगे और मैं आपके साथ हूं।” करीब 54 मिनट बाद: “हम हेल की तरह लड़ेंगे। अगर आप ऐसा नहीं लड़ेंगे तो देश नहीं बचेगा।” पैनोरमा डॉक्यूमेंट्री में इन हिस्सों को जोड़ दिया गया, जिससे लगा कि ट्रंप सीधे कह रहे हैं: “हम कैपिटल जाएंगे, मैं आपके साथ हूं और हम लड़ेंगे जैसे हेल।” यह डॉक्यूमेंट्री 2024 अमेरिकी चुनाव से ठीक एक हफ्ता पहले, अक्टूबर 2024 में प्रसारित हुई।
विवाद तब भड़का जब नवंबर 2025 में BBC का एक आंतरिक मेमो लीक हुआ,
जिसमें एडिटिंग पर सवाल उठाए गए। BBC ने माना कि यह “जजमेंट की गलती” थी,
जिससे गलत इंप्रेशन गया। उन्होंने ट्रंप से माफी मांगी, डॉक्यूमेंट्री दोबारा न दिखाने का वादा किया।
यहां तक कि BBC के डायरेक्टर जनरल टिम डेवी और न्यूज हेड डेबोरा टर्नेस ने इस्तीफा दे दिया।
BBC चेयरमैन समीर शाह ने भी पर्सनली माफी मांगी। लेकिन ट्रंप संतुष्ट नहीं हुए।
उन्होंने कहा कि BBC ने “मेरे मुंह में शब्द डाले” और चुनाव प्रभावित करने की कोशिश की।
अब मुकदमा में वे डिफेमेशन और फ्लोरिडा के अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस कानून का उल्लंघन बता रहे हैं।
BBC Trump free speech
द इंडिपेंडेंट अखबार में एक हालिया लेख छपा:
“The BBC has no choice but to teach
Trump a lesson about free speech”
।लेखक का कहना है कि ट्रंप फ्री स्पीच के
बड़े चैंपियन बने फिरते हैं – वे कहते हैं
अमेरिका आखिरी देश है जहां अभिव्यक्ति की आजादी है।
लेकिन जब मीडिया उनकी आलोचना करता है,
तो मुकदमे? यह दोहरा मापदंड है।
BBC को इस मामले में पीछे नहीं हटना चाहिए।
अमेरिकी फर्स्ट अमेंडमेंट पब्लिक फिगर्स जैसे ट्रंप के खिलाफ
मानहानि के मामलों में मीडिया को मजबूत सुरक्षा देता है।
ट्रंप को साबित करना पड़ेगा कि BBC ने “
actual malice” (जानबूझकर झूठ) के साथ काम किया।
BBC कह रही है कि गलती हुई, लेकिन malice नहीं।
दोस्तों, सोचिए। डॉक्यूमेंट्री यूके में प्रसारित हुई,
अमेरिका में नहीं। ट्रंप का दावा है
कि फ्लोरिडा के लोग VPN या BritBox से देख सकते थे।
लेकिन एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि ज्यूरिस्डिक्शन का मुद्दा कमजोर है।
ट्रंप चुनाव जीत चुके हैं – उनकी इमेज को नुकसान? मुश्किल से।
BBC की इंटरनल रिव्यू में भी कहा गया
कि एडिटिंग गाइडलाइंस बदलने की जरूरत नहीं,
बस लेसन्स रीइनफोर्स करने की।
19 दिसंबर 2025 तक BBC ने कहा है कि वे केस डिफेंड करेंगी।
यह मामला सिर्फ ट्रंप और BBC का नहीं।
यह मीडिया फ्रीडम का है।
अगर बड़े नेता मुकदमों से पत्रकारों को डराएंगे, तो सच्चाई कौन बोलेगा?
न्यूयॉर्क टाइम्स vs सुलिवन केस से पता चलता है
कि पब्लिक फिगर्स के लिए malice साबित करना बेहद मुश्किल है।
ट्रंप ने ABC, NYT जैसी कंपनियों से सेटलमेंट करवाए,
लेकिन BBC ब्रिटिश पब्लिक ब्रॉडकास्टर है – वे लड़ सकती है।
इंडिपेंडेंट ठीक कहता है: BBC को
ट्रंप को फ्री स्पीच का असली सबक सिखाना चाहिए।
फ्री स्पीच सिर्फ ट्रंप के लिए नहीं, मीडिया के लिए भी है।
गलतियां हो सकती हैं, सुधार हो सकता है,
लेकिन डरकर चुप होना नहीं।
भारत में भी हम देखते हैं – मीडिया पर दबाव, मुकदमे।
लेकिन अगर BBC जैसी संस्थाएं लड़ेंगी,
तो लोकतंत्र मजबूत होगा।
ट्रंप का मुकदमा शायद ज्यूरिस्डिक्शन या सबस्टेंस पर टिक न पाए।
लेकिन लड़ाई महत्वपूर्ण है।
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