बांग्लादेश में हिंसा
बांग्लादेश में हिंसा बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। 24 घंटे के भीतर एक और हिंदू व्यापारी की बेरहमी से हत्या की खबर ने देशभर में चिंता बढ़ा दी है।

#बांग्लादेश के नरसिंदी जिले के चारसिंदुर बाजार में सोमवार रात को एक हिंदू किराना दुकान मालिक सरत चक्रवर्ती मणि (40) की तेज धार वाली हथियारों से निर्मम हत्या कर दी गई। यह घटना उसी दिन जाशोर जिले में राणा प्रताप नामक 45 वर्षीय हिंदू कारखाना मालिक और अखबार संपादक की गोली मारकर हत्या के मात्र 24 घंटे बाद हुई, जहां हमलावरों ने उनके सिर में तीन गोलियां मारकर गला भी काट दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मणि अपनी दुकान चला रहे थे जब अज्ञात हमलावरों ने उन पर हमला किया, उन्हें गंभीर घायल कर दिया और अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई।
बांग्लादेश में हिंसा : हालिया हिंसा का दौर
पिछले 18 दिनों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ छह हत्याएं हो चुकी हैं, जो अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों की चिंताजनक श्रृंखला दर्शाती हैं। दिसंबर 2025 में मयमensingh में दीपू चंद्र दास को ईशनिंदा के झूठे आरोप में पीट-पीटकर मार डाला गया, फिर पेड़ से लटका कर जिंदा जला दिया गया। शरियतपुर में 50 वर्षीय खोकोन दास को चाकू मारकर आग के हवाले कर दिया गया, हालांकि वे किसी तरह बच गए। इन घटनाओं में लूटपाट, घरों पर आगजनी और मंदिरों पर हमले शामिल हैं, जिससे हिंदू परिवार भय के साये में जी रहे हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हिंसा कोई नई बात नहीं है; 1947 के विभाजन से लेकर 1971 के युद्ध तक लाखों हिंदुओं का नरसंहार हुआ। 2021 में क़ोमीला में कुरान की कथित अपवित्रता के आरोप पर सैकड़ों मंदिरों और घरों पर हमले हुए। शेख हसीना सरकार गिरने के बाद अगस्त 2024 से हिंसा में उछाल आया, जिसमें 205 से अधिक मंदिर ध्वस्त हो चुके हैं। हिंदू आबादी 13.5% से घटकर 8% से नीचे पहुंच चुकी है, जो जबरन पलायन और हिंसा का परिणाम है।
हिंसा के कारण
- ये हमले मुख्य रूप से कट्टर इस्लामी समूहों जैसे जमात-ए-इस्लामी द्वारा प्रेरित हैं,
- जो शेख हसीना समर्थकों को निशाना बना रहे हैं क्योंकि हिंदू समुदाय को उनकी पार्टी से जोड़ा जाता है।
- ईशनिंदा के झूठे आरोप, जजिया टैक्स की मांग और आर्थिक लूट प्रमुख कारण हैं।
- अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद कानून-व्यवस्था कमजोर होने से भीड़ हिंसा बढ़ गई है,
- जिसमें पुलिस की निष्क्रियता स्पष्ट है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
भारत ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा की है और बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में विरोध प्रदर्शन हुए, जहां मुहम्मद यूनुस का पुतला दाह किया गया। संयुक्त राष्ट्र और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अंतरिम सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपील की है। यूनुस सरकार ने हमलों की निंदा तो की, लेकिन कई मामलों में कार्रवाई अपर्याप्त रही।
भविष्य की आशंकाएं
- हिंदू समुदाय अब भयभीत है; कई परिवार भारत पलायन कर रहे हैं।
- यदि हिंसा नहीं रुकी तो भारत-बांग्लादेश संबंध और बिगड़ सकते हैं।
- सरकार को कट्टरपंथियों पर सख्ती,
- पुलिस सुधार और अल्पसंख्यक सुरक्षा कानून लागू करने की जरूरत है।
- हिंदू संगठनों ने देशव्यापी प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
- यह स्थिति न केवल मानवीय संकट है,
- बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा भी।
