दिल्ली बुलडोजर मस्जिद सच
दिल्ली बुलडोजर मस्जिद सच दिल्ली मस्जिद बुलडोजर एक्शन का चौंकाने वाला सच! एक फोटो से खुलासा- अवैध निर्माण पर कार्रवाई, न कि धार्मिक आधार पर। AAP vs BJP विवाद के बीच फैक्ट चेक। क्या यह नियमों का पालन है? पूरी सच्चाई जानें।

दिल्ली के तुर्कमान गेट के पास फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास हुए बुलडोजर एक्शन के पीछे न तो कोई राजनीतिक साजिश है और न ही मस्जिद को गिराया गया है, बल्कि यह एक अदालती आदेश पर अतिक्रमण हटाने की कानूनी कार्रवाई थी जिसमें भीड़ के उकसावे और अफवाहों के चलते हिंसक माहौल बन गया.
क्या हुआ था तुर्कमान गेट पर?
दिल्ली के पुरानी दिल्ली इलाके में तुर्कमान गेट के पास स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास सालों से अवैध निर्माण और अतिक्रमण था, जिसमें दुकानें, छोटे घर और अन्य संरचनाएं शामिल थीं. दिल्ली हाईकोर्ट ने नवंबर 2025 में अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे, जिसके बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने रामलीला मैदान के पास इस अतिक्रमण को हटाने की तैयारी की.
6 जनवरी 2026 की रात को MCD ने तुर्कमान गेट के पास बुलडोजर एक्शन चलाया और मस्जिद से सटी सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया. इस कार्रवाई में कई बुलडोजर लगाए गए और अतिक्रमण के तौर पर चिह्नित सभी संरचनाओं को गिरा दिया गया.
क्यों बुलडोजर चला?
- यह एक्शन दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के
- तहत अतिक्रमण हटाने के लिए चलाया गया था,
- न कि मस्जिद को निशाना बनाने के लिए.
- अदालत ने साफ किया था कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण अवैध है और उसे हटाया जाना चाहिए.
- मस्जिद कमेटी ने इस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी,
- लेकिन अदालत ने इस पर रोक नहीं लगाई,
- जिसके बाद MCD ने कार्रवाई की. अधिकारियों का कहना है
- कि इस एक्शन का मकसद सिर्फ अवैध निर्माण हटाना था,
- न कि मस्जिद को नुकसान पहुंचाना.
दिल्ली बुलडोजर मस्जिद सच : फोटो में छिपी सच्चाई क्या है?
- जो फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए,
- उनमें बुलडोजर के सामने भीड़,
- पुलिस के साथ झड़प और धुआं दिखता है,
- जिससे लगता है कि मस्जिद को गिराया जा रहा है.
- लेकिन असलियत यह है कि बुलडोजर मस्जिद के आसपास के अतिक्रमण पर चला था,
- न कि मस्जिद के ऊपर.
कई तस्वीरों में दिख रहा है कि भीड़ ने MCD कर्मचारियों और पुलिस पर पत्थरबाजी की, जिसके बाद पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े. इस झड़प में 5 पुलिसकर्मी घायल हुए और कुछ स्थानीय लोग भी चोटिल हुए.
अफवाहों ने कैसे बढ़ाया तनाव?
- कार्रवाई से पहले और दौरान इलाके में यह अफवाह फैली कि
- “मस्जिद को गिराया जा रहा है”, जिससे लोग भड़क गए.
- इस अफवाह के चलते भीड़ ने बुलडोजर और पुलिस के खिलाफ हिंसक विरोध किया.
अधिकारियों ने साफ किया कि मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया और वह पूरी तरह सुरक्षित है. लेकिन अतिक्रमण हटाने के बाद मस्जिद के आसपास का वातावरण बदल गया, जिससे नमाजियों को वजू के लिए पानी और अन्य सुविधाओं की कमी महसूस हुई.
राजनीतिक और सामाजिक असर
- इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने इसे “बुलडोजर राजनीति”
- का उदाहरण बताया और दिल्ली सरकार पर निशाना साधा.
- साथ ही, स्थानीय नेताओं और समाजसेवी संगठनों ने इस एक्शन के
- तरीके पर सवाल उठाए कि इतनी बड़ी कार्रवाई रात में क्यों की
- गई और लोगों को पर्याप्त सूचना क्यों नहीं दी गई.
दूसरी ओर, प्रशासन का तर्क है कि अतिक्रमण हटाना शहर की योजना और सुरक्षा के लिए जरूरी है और इसे कानून के तहत ही किया गया है. अब पुलिस इस घटना में भीड़ को उकसाने वाले तत्वों की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अपराधियों की पहचान की जा रही है.
निष्कर्ष: सच क्या है?
तुर्कमान गेट का बुलडोजर एक्शन कोई “मस्जिद गिराने की कार्रवाई” नहीं थी, बल्कि अदालती आदेश पर अतिक्रमण हटाने की कानूनी कार्रवाई थी. फोटो और वीडियो में जो दिखता है, वह अतिक्रमण के ध्वस्त होने और भीड़ के उकसावे का नतीजा है, न कि मस्जिद के खिलाफ कोई निशाना.
इस घटना से साफ होता है कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर अगर संवेदनशील इलाकों में बिना ठीक संवाद के बड़ी कार्रवाई की जाए, तो वह आसानी से तनाव और हिंसा में बदल सकती है. असली सच यह है कि यहां न तो मस्जिद गिरी है और न ही यह कोई राजनीतिक षड्यंत्र था, बल्कि यह शहर की योजना और कानून के बीच टकराव का एक जीवंत उदाहरण है.
