गणतंत्र दिवस मुख्य अतिथि
गणतंत्र दिवस मुख्य अतिथि 77वें गणतंत्र दिवस 2026 पर विदेश मंत्रालय ने दो बड़े नामों को मुख्य अतिथि घोषित किया। कौन हैं ये दिग्गज? पूरी डिटेल, बैकग्राउंड और राजनयिक महत्व जानें। अपडेटेड लाइव कवरेज, भारत के सबसे बड़े राष्ट्रीय समारोह की तैयारी शुरू!

77वें गणतंत्र दिवस 2026 पर भारत ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है और पहली बार किसी एक देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के बजाय यूरोपीय संघ (EU) के दो शीर्ष नेताओं को संयुक्त रूप से मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया है। इस बार के मुख्य अतिथि हैं – यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा।
गणतंत्र दिवस मुख्य अतिथि कौन हैं?
26 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाले 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय संघ के दो सबसे बड़े नेता शामिल होंगे। पहले अतिथि हैं उर्सुला वॉन डेर लेयेन, जो यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष हैं और यूरोपीय संघ की कार्यकारी शाखा की प्रमुख हैं। दूसरे अतिथि हैं एंटोनियो कोस्टा, जो यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष हैं और EU के 27 सदस्य देशों के नेताओं की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं।
- यह पहली बार है जब भारत ने गणतंत्र दिवस पर
- किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन के दो शीर्ष नेताओं को
- एक साथ मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया है।
- इस फैसले से भारत-यूरोपीय संघ संबंधों को एक नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन कौन हैं?
उर्सुला वॉन डेर लेयेन जर्मनी की राजनेता हैं और यूरोपीय आयोग की पहली महिला अध्यक्ष हैं। वह 2019 से यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष के तौर पर कार्यरत हैं और EU की आर्थिक, व्यापार, जलवायु और विदेश नीति के मुख्य निर्माताओं में से एक मानी जाती हैं।
उनके नेतृत्व में यूरोपीय संघ ने कोविड-19 के बाद के पुनरुत्थान, ऊर्जा संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे बड़े संकटों का सामना किया है। भारत के साथ उनके नेतृत्व में व्यापार समझौते, डिजिटल सहयोग और जलवायु पहलों पर बातचीत तेज हुई है। उनकी भारत यात्रा गणतंत्र दिवस के अलावा भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के लिए भी होगी।
एंटोनियो कोस्टा कौन हैं?
- एंटोनियो कोस्टा पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री हैं और
- अब यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।
- यूरोपीय परिषद EU के सदस्य देशों के नेताओं की उच्चतम बॉडी है,
- जो यूरोप की सामरिक दिशा तय करती है।
- कोस्टा एक अनुभवी राजनेता हैं और पुर्तगाल में लगातार तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं।
- उनके नेतृत्व में पुर्तगाल ने डिजिटल इंडिया जैसी
- पहलों के साथ भारत के साथ गहरा सहयोग बनाया है।
- उनकी भारत यात्रा भारत-यूरोपीय संघ संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ले जाने का संकेत देती है।
यह चुनाव क्यों ऐतिहासिक है?
भारत ने अब तक गणतंत्र दिवस पर आमतौर पर किसी एक देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राजा को मुख्य अतिथि बनाया है, जैसे अमेरिका के बराक ओबामा, फ्रांस के फ्रांसवा ओलांद या रूस के व्लादिमीर पुतिन। इस बार यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेताओं को एक साथ बुलाना भारत की विदेश नीति में एक नया प्रयोग है।
इस फैसले से भारत यह संदेश दे रहा है कि वह अब द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ बहुपक्षीय संगठनों के साथ भी गहरा सहयोग चाहता है। यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते, डिजिटल और ग्रीन टेक्नोलॉजी में साझेदारी बढ़ाने के लिए यह कदम बहुत महत्वपूर्ण है।abplive+2
भारत-यूरोपीय संघ संबंधों को बढ़ावा
- इस बार गणतंत्र दिवस के बाद 27 जनवरी को नई दिल्ली में
- 16वां भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन भी आयोजित होने वाला है।
- इस सम्मेलन में भारत और EU के बीच व्यापार और निवेश समझौते (FTA),
- डिजिटल सहयोग, जलवायु परिवर्तन और रक्षा सहयोग पर गहन चर्चा होगी।
भारत के लिए यूरोपीय संघ एक बड़ा व्यापार भागीदार है और दोनों तरफ से व्यापार समझौते को जल्द पूरा करने की उम्मीद है। इस बार मुख्य अतिथि के रूप में EU के शीर्ष नेताओं को बुलाने से इन बातचीतों को तेजी आएगी और दोनों पक्षों के बीच विश्वास बढ़ेगा।
गणतंत्र दिवस परेड में क्या खास होगा?
- 77वें गणतंत्र दिवस परेड में उर्सुला वॉन डेर लेयेन और
- एंटोनियो कोस्टा के साथ भारत के राष्ट्रपति,
- प्रधानमंत्री और अन्य शीर्ष नेता मौजूद रहेंगे।
- परेड में भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना और अर्धसैनिक बलों के अलावा विभिन्न राज्यों के झांकियां,
- युवा और बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल होंगे।
इस बार परेड में भारत-यूरोपीय संघ सहयोग के विषयों जैसे डिजिटल इंडिया, ग्रीन एनर्जी और नवाचार पर भी झांकियां दिखाई जा सकती हैं। यह परेड न केवल भारत की सैन्य ताकत बल्कि उसकी वैश्विक भागीदारी की ताकत को भी दिखाएगी।
निष्कर्ष
77वें गणतंत्र दिवस 2026 पर उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा को मुख्य अतिथि बनाना भारत की विदेश नीति में एक नया अध्याय है। यह फैसला भारत की बहुध्रुवीय दुनिया में अपनी भूमिका को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस परेड के जरिए भारत न केवल अपनी संप्रभुता और सांस्कृतिक विविधता को दिखाएगा, बल्कि यूरोपीय संघ के साथ भविष्य के सहयोग का भी संकेत देगा।punjabkesari+2
