शरद पवार इस्तीफा
शरद पवार इस्तीफा महाराष्ट्र चुनाव में NCP को मिली करारी हार के बाद शरद पवार से इस्तीफे की मांग उठ रही है। पार्टी में बगावत के संकेत, क्या पवार कुर्सी छोड़ेंगे? ताजा सियासी अपडेट।

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भूचाल सा आ गया है। नवंबर 2024 के विधानसभा चुनाव में महाविकास आघाडी (MVA) को मिली करारी हार के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी NCP(SP) के भीतर घमासान मच गया है। पार्टी को महज 10 सीटें मिलीं, जबकि अजित पवार के धड़े ने 41 सीटें जीतकर सत्ता के करीब पहुंच गए। अब खबरें गरम हैं कि शरद पवार पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे सकते हैं। जनवरी 2026 में पार्टी की आंतरिक बैठकों में यह मुद्दा जोरों पर है। कई नेता मान रहे हैं कि 85 वर्षीय पवार साहब नई पीढ़ी को कमान सौंपना चाहते हैं, जबकि कुछ कार्यकर्ता उन्हें रोक रहे हैं। सवाल उठ रहा है – क्या यह पवार era का अंत है, या सिर्फ एक रणनीतिक कदम?
2024 चुनाव की हार: कारण और प्रभाव
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में महायुति (BJP-शिवसेना शिंदे-NCP अजित) ने 230 से ज्यादा सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया। देवेंद्र फडणवीस फिर मुख्यमंत्री बने, एकनाथ शिंदे और अजित पवार डिप्टी CM। दूसरी तरफ MVA पूरी तरह बिखर गई – कांग्रेस 16, शिवसेना (उद्धव) 20 और NCP(SP) सिर्फ 10 सीटें। शरद पवार का गढ़ माने जाने वाले पश्चिमी महाराष्ट्र में भी उनकी पार्टी को झटका लगा। बारामती में अजित पवार ने सुनेत्रा पवार (शरद पवार की बहू) को हराया, जो परिवारिक स्तर पर बड़ा धक्का था।
- हार के कारण कई हैं। पहला, अजित पवार का BJP से गठबंधन –
- इससे NCP का बड़ा वोट बैंक महायुति में शिफ्ट हो गया।
- दूसरा, EVM विवाद और मतदाता उदासीनता।
- तीसरा, MVA में समन्वय की कमी – उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के साथ तालमेल नहीं बैठा।
- शरद पवार ने खुद हार स्वीकार की और कहा कि
- “लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि है”,
- लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं में निराशा गहरी है।
- 2025 भर पार्टी पुनर्गठन की कोशिशें हुईं, लेकिन सफलता नहीं मिली।
- अब 2026 में लोकसभा चुनाव की तैयारी के बीच इस्तीफे की चर्चा ने हलचल बढ़ा दी है।
शरद पवार का योगदान: महाराष्ट्र राजनीति का मराठा माणिक
- शरद पवार को महाराष्ट्र की राजनीति का ‘चाणक्य’ कहा जाता है।
- 1967 से सक्रिय, उन्होंने कांग्रेस से शुरुआत की,
- चार बार मुख्यमंत्री बने, केंद्र में कृषि और रक्षा मंत्री रहे।
- 1999 में सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर कांग्रेस छोड़कर NCP बनाई।
- पार्टी को मराठा, ओबीसी और मुस्लिम वोट बैंक का मजबूत आधार दिया।
- सहकारिता आंदोलन से लेकर सिंचाई परियोजनाओं तक – पवार का योगदान अविस्मरणीय है।
2019 में BJP के साथ गठबंधन की कोशिश, फिर MVA बनाना – उनकी रणनीति हमेशा चर्चा में रही। 2023 में अजित पवार का बगावत और पार्टी विभाजन सबसे बड़ा झटका था। चुनाव आयोग ने अजित गुट को असली NCP माना, शरद गुट को NCP(SP) नाम दिया। फिर भी पवार ने हिम्मत नहीं हारी। लेकिन उम्र और स्वास्थ्य (वे पार्किंसन से जूझ रहे हैं) अब साथ नहीं दे रहे।
शरद पवार इस्तीफा क्यों और कब?
जनवरी 2026 में पुणे और मुंबई में हुई पार्टी की अनौपचारिक बैठकों में पवार ने कथित तौर पर इस्तीफे की पेशकश की। सूत्र बताते हैं कि वे कह रहे हैं – “मैंने अपना योगदान दे दिया, अब नई पीढ़ी को मौका मिलना चाहिए।” सुप्रिया सुले (उनकी बेटी, लोकसभा सांसद) और जयंत पाटिल जैसे नेता अगली कतार में हैं। सुले युवा चेहरा हैं, लेकिन विधानसभा में पार्टी की कमजोरी उन्हें चुनौती दे रही।
- विपक्षी खेमे में भी हलचल है। उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी को मजबूत कर रहे हैं,
- जबकि कांग्रेस नाना पटोले के नेतृत्व में पुनर्जीवन की कोशिश में है।
- अगर पवार इस्तीफा देते हैं, तो MVA और कमजोर हो सकता है।
- दूसरी तरफ, अजित पवार सत्ता में मजबूत हो रहे हैं –
- वे डिप्टी CM हैं और वित्त विभाग संभाल रहे हैं।
- कई विश्लेषक मानते हैं कि पवार इस्तीफा देकर
- “मार्गदर्शक” भूमिका में जाएंगे, ताकि पार्टी एकजुट रहे।
लेकिन कार्यकर्ता तैयार नहीं। दिसंबर 2024 में भी इस्तीफे की अफवाह उड़ी थी, लेकिन पवार ने साफ कहा था – “मैं लड़ूंगा।” अब 2026 में लोकसभा चुनाव नजदीक हैं (2029 विधानसभा से पहले कोई बड़ा इलेक्शन नहीं), तो पार्टी को मजबूत नेता चाहिए।
आगे क्या? सियासी समीकरण
अगर पवार इस्तीफा देते हैं, तो NCP(SP) में बड़ा बदलाव आएगा। सुले अध्यक्ष बन सकती हैं, जो महिला नेतृत्व का नया चेहरा होगा। लेकिन अजित गुट की छाया बनी रहेगी। महायुति मजबूत है, लेकिन आंतरिक कलह (शिंदे vs फडणवीस) भी है। पवार का जाना विपक्ष के लिए नुकसान होगा, क्योंकि उनकी रणनीति MVA की रीढ़ थी।
कई लोग इसे “पीढ़ीगत बदलाव” कह रहे हैं। पवार जैसे दिग्गज अब विरले हो गए हैं। बाल ठाकरे, प्रफुल्ल पटेल, गोपीनाथ मुंडे के बाद पवार आखिरी बड़े मराठा नेता हैं।
निष्कर्ष: लड़ाई जारी या सम्मानजनक विदाई?
शरद पवार इस्तीफा दें या नहीं, महाराष्ट्र की राजनीति में उनकी छाप हमेशा रहेगी। करारी हार के बाद भी वे मैदान में हैं – यह उनकी जुझारूपन की मिसाल है। लेकिन वक्त का तकाजा है कि नई पीढ़ी आगे आए। सियासी हलचल तेज है, और आने वाले महीने तय करेंगे कि पवार का अगला कदम क्या होगा। महाराष्ट्र की जनता देख रही है – क्या पवार era खत्म होगा, या नई शुरुआत?
