युवराज मेहता NGT नोटिस
युवराज मेहता NGT नोटिस नोएडा में युवराज मेहता की मौत के बाद NGT ने सु मोटो केस लिया, मॉल प्रोजेक्ट वाली जगह को तालाब बनने पर UP सरकार और अथॉरिटी को नोटिस, पर्यावरण उल्लंघन पर सख्ती।

ग्रेटर नोएडा में एक युवा इंजीनियर की दर्दनाक मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। जहां मॉल बनने की जगह एक खतरनाक तालाब जैसा गड्ढा बन गया, वहीं लापरवाही ने 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की जान ले ली। यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक नाकामी, पर्यावरण उल्लंघन और भ्रष्टाचार की एक जीती-जागती मिसाल है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ा नोटिस जारी किया है, और सवाल उठाया है कि आखिर मॉल की जगह तालाब कैसे बन गया?
युवराज मेहता NGT नोटिस : घटना का पूरा विवरण
- जनवरी 2026 की एक घनी कोहरे वाली रात थी।
- युवराज मेहता गुरुग्राम से अपने घर नोएडा के सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसायटी लौट रहे थे।
- उनकी कार ग्रैंड विटारा घने कोहरे के कारण सड़क पर बने एक तेज मोड़ पर नियंत्रण खो बैठी।
- कार ने एक टूटी हुई बाउंड्री वॉल को तोड़ते हुए लगभग 30 फीट गहरे पानी भरे गड्ढे में जा गिरी।
- यह गड्ढा किसी निर्माणाधीन मॉल का बेसमेंट था,
- जो वर्षों से वर्षा जल और आसपास की सोसायटियों के सीवेज से भरता चला गया था।
युवराज ने फोन पर मदद मांगी, टॉर्च जलाकर संकेत दिए, लेकिन लगभग 2 घंटे तक तड़पते रहे। आसपास खड़े लोग, पुलिस, फायर ब्रिगेड और NDRF टीम मौजूद थी, लेकिन ठंडे पानी में उतरने से बचते रहे। आखिरकार उनकी कार निकाली गई, लेकिन तब तक युवराज की सांसें थम चुकी थीं। उनके पिता राजकुमार मेहता का दर्द भरा बयान दिल दहला देने वाला है— “मेरा बेटा 2 घंटे तक चिल्लाता रहा, लेकिन किसी ने उसे बचाने की कोशिश नहीं की।”
मॉल की जगह तालाब कैसे बना?
- यह जमीन मूल रूप से एक प्राइवेट मॉल प्रोजेक्ट के लिए आवंटित की गई थी।
- लेकिन वर्षों से निर्माण रुका रहा,
- और बारिश का पानी तथा आसपास की कॉलोनियों का गंदा पानी यहां जमा होता चला गया।
- यह जगह धीरे-धीरे एक गहरा तालाब बन गई।
- 2023 में ही उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने नोएडा
- अथॉरिटी को चिट्ठी लिखकर इस गड्ढे को खाली करने की चेतावनी दी थी,
- बजट भी उपलब्ध था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
यहां तक कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फरवरी 2025 में इस प्रोजेक्ट को 9,000 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला बताते हुए CBI जांच के आदेश दिए थे। लेकिन प्रशासन ने आंखें मूंद लीं। परिणामस्वरूप, जहां मॉल बनना था, वहां मौत का कुंआ तैयार हो गया।
NGT का गुस्सा और कड़ा नोटिस
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने मीडिया रिपोर्ट्स पर स्वतः
- संज्ञान लिया और कहा कि अधिकारियों की लापरवाही से यह मौत हुई है।
- NGT ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम,
- 1986 के उल्लंघन का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित अथॉरिटी को नोटिस जारी किया।
ट्रिब्यूनल ने सवाल उठाया कि:
- भूमि उपयोग में बदलाव कैसे हुआ?
- पर्यावरणीय क्षरण क्यों होने दिया गया?
- खतरनाक स्थिति को रोकने में प्रशासन क्यों नाकाम रहा?
NGT ने स्पष्ट कहा कि यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि पर्यावरण नियमों की अवहेलना और सार्वजनिक सुरक्षा की अनदेखी का परिणाम है।
प्रशासन की कार्रवाई और राजनीतिक हलचल
घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT गठित की, जिसने जांच शुरू कर दी। नोएडा अथॉरिटी के CEO लोकेश एम को हटाकर वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया। एक जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त किया गया, कई अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी हुए। बिल्डर कंपनी के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज हुआ और एक बिल्डर को गिरफ्तार भी किया गया।
- स्थानीय निवासियों ने कैंडल मार्च निकाला और न्याय की मांग की।
- लेकिन सवाल वही है— क्या ये कार्रवाइयां सिर्फ दिखावा हैं या वास्तविक बदलाव लाएंगी?
सबक और आगे की राह
युवराज मेहता की मौत हमें याद दिलाती है कि विकास के नाम पर लापरवाही कितनी खतरनाक हो सकती है। स्मार्ट सिटी का दावा करने वाले शहरों में बेसिक सुरक्षा उपायों की कमी, अवैध निर्माण की अनदेखी और पर्यावरण की उपेक्षा आम हो गई है।
- निर्माण स्थलों पर मजबूत बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड क्यों नहीं लगाए जाते?
- वर्षों से भरे गड्ढों को साफ क्यों नहीं किया जाता?
- विभागों के बीच समन्वय की कमी क्यों बनी रहती है?
यह समय है कि सरकारें सिर्फ नोटिस और निलंबन तक सीमित न रहें। सख्त कानून लागू करें, जिम्मेदार लोगों को सजा दें और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं। युवराज जैसा कोई और युवा इस तरह की मौत का शिकार न बने।
हमारी संवेदनाएं युवराज के परिवार के साथ हैं। उम्मीद है कि NGT का यह नोटिस और जनता का गुस्सा सिस्टम को सुधारने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।
