जम्मू कश्मीर सेना हादसा
जम्मू कश्मीर सेना हादसा जम्मू-कश्मीर में सेना की गाड़ी 200 फुट नीचे खाई में गिरने से 10 जवान शहीद, खराब मौसम और रास्ते की चुनौती बनी वजह, सेना ने शोक जताया।

22 जनवरी 2026 का दिन भारतीय सेना और पूरे देश के लिए एक बेहद दुखद दिन बन गया। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में एक भयानक सड़क हादसे ने 10 बहादुर जवानों की जान ले ली। यह हादसा इतना दिल दहला देने वाला था कि पूरी राष्ट्र की आंखें नम हो गईं। एक बुलेटप्रूफ आर्मी वाहन, जिसमें 17 जवान सवार थे, खन्नी टॉप के पास सड़क से फिसलकर लगभग 200 फीट गहरी खाई में जा गिरा। इस दुर्घटना में 10 जवान शहीद हो गए, जबकि 7 से 11 जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
जम्मू कश्मीर सेना हादसे का विवरण
- यह हादसा भद्रवाह-चंबा अंतरराज्यीय सड़क पर खन्नी टॉप के पास हुआ,
- जो समुद्र तल से लगभग 9,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
- यह इलाका बेहद दुर्गम और खतरनाक है,
- जहां सड़कें संकरी, मोड़ तीखे और बर्फीली परिस्थितियां आम हैं।
- सेना का यह बुलेटप्रूफ वाहन (कैस्पिर मॉडल) एक ऊंचाई वाली पोस्ट की ओर जा रहा था।
- अधिकारियों के अनुसार,
- चालक ने अचानक वाहन पर नियंत्रण खो दिया और वाहन सड़क से उतरकर खाई में जा गिरा।
हादसे के तुरंत बाद सेना और पुलिस की संयुक्त टीम ने बचाव अभियान शुरू किया। घायल जवानों को मौके से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। तीन गंभीर रूप से घायल जवानों को हेलीकॉप्टर से उधमपुर मिलिट्री हॉस्पिटल एयरलिफ्ट किया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।
शहीद जवानों का बलिदान
- ये 10 जवान देश की सुरक्षा के लिए दिन-रात डटे रहते थे।
- वे राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट के थे और ऊंचाई वाले क्षेत्र में रूटीन ड्यूटी और सर्विलांस के लिए जा रहे थे।
- इन जवानों ने न केवल दुश्मन से लड़ने की तैयारी की थी,
- बल्कि इनकी जान इस दुर्घटना में चली गई।
- इनके परिवारों का दर्द कल्पना से परे है।
- मां-बाप, पत्नी, बच्चे – सबके सपने चकनाचूर हो गए।
देश के नेताओं का शोक
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने तुरंत इस हादसे पर गहरा दुख जताया। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा:
“डोडा में एक दुर्भाग्यपूर्ण सड़क हादसे में हमारे 10 बहादुर भारतीय सेना के जवानों की जान जाने से बहुत दुख हुआ। हम अपने बहादुर सैनिकों की उत्कृष्ट सेवा और सर्वोच्च बलिदान को हमेशा याद रखेंगे।”
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी शोक संवेदना व्यक्त की। पूरे देश में इस घटना पर शोक की लहर दौड़ गई।
पहाड़ी इलाकों में बढ़ते खतरे
जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में सड़क हादसे कोई नई बात नहीं हैं। पिछले साल भी रामबन जिले में एक वाहन 700 फीट गहरी खाई में गिरने से तीन जवान शहीद हुए थे। गुलमर्ग सेक्टर में भी हाल ही में दो पोस्टर्स की मौत हुई थी। ये दुर्घटनाएं बताती हैं कि इन क्षेत्रों में सड़कों की स्थिति, मौसम और वाहनों की सुरक्षा पर और अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
सेना के जवान पहले से ही आतंकवाद और दुश्मन देशों के खतरों से जूझ रहे हैं, ऊपर से ये प्राकृतिक चुनौतियां उनके जीवन को और जोखिम में डाल देती हैं।
अंत में
यह हादसा हमें एक बार फिर याद दिलाता है कि हमारे जवान कितनी मुश्किल परिस्थितियों में देश की रक्षा करते हैं। उनकी कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी। हम सबको उनके परिवारों के साथ खड़ा होना होगा। शहीदों को सलाम! उनके बलिदान को हम कभी नहीं भूलेंगे।
