विमान दुर्घटना नेता
विमान दुर्घटना नेता विमान दुर्घटनाओं में खोईं दिग्गज हस्तियां – संजय गांधी, माधवराव सिंधिया, विजय रूपाणी से लेकर अजित पवार तक। इन 11 हादसों ने राजनीति को हिलाकर रख दिया। पूरी कहानी।

विमान दुर्घटना नेता: भारतीय राजनीति में विमान हादसे हमेशा से दिल दहला देने वाले रहे हैं। ये हादसे न केवल व्यक्तिगत त्रासदियां हैं, बल्कि पूरे देश की राजनीति पर गहरा असर डालते हैं। हाल ही में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान हुए प्लेन क्रैश ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। लेकिन यह कोई पहला मामला नहीं है। संजय गांधी से लेकर विजय रूपाणी तक, कई दिग्गज नेताओं ने आसमान में अपनी जान गंवाई है। इन हादसों ने हवाई यात्राओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं और राजनीतिक इतिहास में काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गए हैं।
- यहां हम उन 11 प्रमुख हादसों की बात करेंगे,
- जो अजित पवार से पहले हुए और जिनमें देश की बड़ी हस्तियां छिन गईं।
- ये घटनाएं समय-समय पर देश को झकझोरती रही हैं।
बलवंतराय मेहता (1965)
गुजरात के पहले मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता भारत-पाक युद्ध के दौरान कच्छ के रण का दौरा करने जा रहे थे। उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और वे सहित सभी सवार मारे गए। यह स्वतंत्र भारत में किसी बड़े राजनेता की पहली प्रमुख हवाई त्रासदी मानी जाती है, जिसने देश को गहरा सदमा पहुंचाया।
संजय गांधी (23 जून 1980)
- पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी को हवाई करतबों का शौक था।
- दिल्ली के सफदरजंग एयरपोर्ट के पास
- पिट्स एस-2ए विमान में एरोबेटिक मूवमेंट करते समय कंट्रोल खो बैठे।
- विमान क्रैश हो गया और 34 वर्षीय संजय की मौत हो गई।
- इस हादसे ने गांधी परिवार को गहरा आघात पहुंचाया और राजनीतिक समीकरण बदल दिए।
माधवराव सिंधिया (30 सितंबर 2001)
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और ग्वालियर राजघराने के माधवराव सिंधिया इटावा के पास एक छोटे विमान में यात्रा कर रहे थे। विमान क्रैश हो गया और उनकी मौत हो गई। सिंधिया की असामयिक मौत ने मध्य प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा शून्य पैदा किया।
जी.एम.सी. बालयोगी (3 मार्च 2002)
लोकसभा स्पीकर और तेलुगु देशम पार्टी के नेता बालयोगी आंध्र प्रदेश में हेलीकॉप्टर से यात्रा कर रहे थे। हेलीकॉप्टर कृष्णा जिले के पास एक तालाब में गिर गया। हादसे में उनकी और अन्य सवारों की मौत हो गई। यह लोकसभा के स्पीकर की पहली ऐसी मौत थी।
वाई.एस. राजशेखर रेड्डी (2 सितंबर 2009)
- आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस.आर. चंद्रगिरि से कडप्पा जा रहे थे।
- उनका हेलीकॉप्टर नल्लामाला जंगलों में क्रैश हो गया।
- इस हादसे ने आंध्र की राजनीति को हिला दिया और उनके बेटे जगन मोहन रेड्डी की राजनीतिक यात्रा को नई दिशा दी।
दोरजी खांडू (30 अप्रैल 2011)
- अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू तवांग से ईटानगर जा रहे थे।
- हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया और उनकी मौत हो गई।
- पहाड़ी इलाकों में हवाई यात्राओं की चुनौतियों को यह हादसा फिर उजागर कर गया।
जनरल बिपिन रावत (8 दिसंबर 2021)
भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत अपनी पत्नी और अन्य अधिकारियों के साथ तमिलनाडु के कुन्नूर के पास एमआई-17 हेलीकॉप्टर में थे। हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया और 13 लोगों की मौत हो गई। यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा झटका था।
विजय रूपाणी (12 जून 2025)
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी एयर इंडिया फ्लाइट AI-171 में अहमदाबाद से लंदन जा रहे थे। टेकऑफ के कुछ मिनट बाद विमान क्रैश हो गया, जिसमें 241 यात्रियों की मौत हुई। रूपाणी की मौत ने बीजेपी और गुजरात राजनीति को सदमा पहुंचाया।
सी. संगमा (2004)
- मेघालय के ग्रामीण विकास मंत्री सी. संगमा गुवाहाटी से शिलॉंग जा रहे थे।
- हेलीकॉप्टर बारापानी झील के पास क्रैश हो गया।
- यह पूर्वोत्तर की राजनीति में बड़ा नुकसान था।
होमी जहांगीर भाभा (24 जनवरी 1966)
- भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक होमी भाभा एयर इंडिया फ्लाइट 101 में स्विट्जरलैंड जा रहे थे।
- विमान मॉन्ट ब्लांक में क्रैश हो गया।
- यह वैज्ञानिक समुदाय के लिए अपूरणीय क्षति थी।
अन्य उल्लेखनीय (जैसे के.एस. सौंदर्या या अन्य)
कुछ हादसों में राजनीतिक उम्मीदवार या जुड़े लोग भी शामिल रहे, जैसे 2004 में अभिनेत्री और बीजेपी उम्मीदवार के.एस. सौंदर्या का हेलीकॉप्टर हादसा।
विमान दुर्घटना नेता: निष्कर्ष
ये हादसे बताते हैं कि आसमान कितना खतरनाक हो सकता है, खासकर जब उच्च पदस्थ लोग यात्रा करते हैं। खराब मौसम, तकनीकी खराबी, पायलट त्रुटि या अन्य कारण इन त्रासदियों के पीछे रहे हैं। अजित पवार का हादसा इस श्रृंखला में नवीनतम है, जो हमें हवाई सुरक्षा पर फिर से विचार करने को मजबूर करता है।
इन दिग्गज हस्तियों की मौत ने न केवल उनके परिवारों को, बल्कि पूरे राष्ट्र को दुखी किया है। उनकी यादें राजनीति में हमेशा जीवित रहेंगी, लेकिन ये घटनाएं हमें सतर्क भी करती हैं।
