दिगंबर मर्डर केस
दिगंबर मर्डर केस दिगंबर मर्डर केस में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पार्टी के बाद दोस्त ही उसके हत्यारे निकले और शव को 65 किलोमीटर दूर दफना दिया गया। पुलिस जांच में साजिश, दोस्ती में धोखा और सुनियोजित हत्या की परतें खुलती जा रही हैं।

दोस्ती का नाम सुनते ही मन में विश्वास, हंसी-मजाक और साथ निभाने की भावना उभरती है। लेकिन कभी-कभी यही दोस्ती इतनी खतरनाक हो जाती है कि वह मौत का कारण बन जाती है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में फरवरी 2026 में ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया, जिसे मीडिया में “पार्टी से कब्र तक” की सुर्खियों से नवाजा गया। 28 वर्षीय दिगंबर धीमान नामक युवक की हत्या उसके ही करीबी दोस्तों ने कर डाली। वजह महज ढाई लाख रुपये का लेन-देन और नशे में हुई छोटी-सी बहस। इस क्रूर हत्याकांड ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया और दोस्ती की सच्चाई पर सवाल खड़े कर दिए।
दिगंबर मर्डर केस: घटना की शुरुआत
- 9 फरवरी 2026 की शाम दिगंबर धीमान अपने घर से निकले।
- वह शास्त्री नगर, बसंत विहार क्षेत्र के निवासी थे।
- उस दिन देहरादून कोर्ट में उनकी एक पेशी थी,
- जिसके बाद वे अपने दोस्त हेमंत के घर रेसकोर्स (सी-ब्लॉक) पहुंचे।
- यहां चार दोस्त – हेमंत, और उसके साथी – मिलकर शराब की पार्टी करने लगे।
- शुरुआत में सब कुछ सामान्य था – हंसी-मजाक, गाने और नशा।
- लेकिन जैसे-जैसे नशा चढ़ता गया, बात पुराने लेन-देन पर आ गई।
जांच में पता चला कि दिगंबर ने आरोपियों से करीब 2.5 लाख रुपये उधार लिए थे, जो वह लंबे समय से वापस नहीं कर रहा था। जब दोस्तों ने पैसे मांगे, तो दिगंबर ने टालमटोल किया। यह बात इतनी बढ़ गई कि नशे की आग में सब बेकाबू हो गए। बहस हाथापाई में बदल गई और फिर क्रूरता की हद तक पहुंच गई। आरोपियों ने लोहे की रॉड, हथौड़ा, पेचकस और बेसबॉल बैट से दिगंबर पर बेरहमी से हमला कर दिया। सिर और शरीर पर कई गंभीर चोटें आईं। खून बहने से दिगंबर की मौके पर ही मौत हो गई।
शव को ठिकाने लगाने की क्रूर योजना
हत्या के बाद आरोपियों में खौफ छा गया। वे जानते थे कि अगर शव घर या आसपास मिला तो पुलिस सीधे उनके पास पहुंच जाएगी। इसलिए उन्होंने शव को छिपाने की ठान ली। सबसे पहले उन्होंने कमरे में खून के धब्बों को साफ करने की कोशिश की, लेकिन पूरी तरह नाकाम रहे। फिर उन्होंने एक टैक्सी बुक की। शव को टैक्सी में लादकर वे देहरादून से करीब 65 किलोमीटर दूर हरिद्वार की ओर निकल पड़े। वहां जंगल या रेतीले इलाके में शव को दफना दिया। कुछ रिपोर्टों में इसे चिड़ियापुर के जंगलों या हरिद्वार के रेत वाले क्षेत्र में दफनाने का जिक्र है। यह पूरी प्रक्रिया रात भर चली और सुबह तक वे वापस लौट आए, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
परिवार की बेचैनी और पुलिस की जांच
- दिगंबर के पिता संतराम धीमान को जब बेटा रात भर नहीं लौटा,
- तो 11 फरवरी को उन्होंने बसंत विहार थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
- पुलिस ने शुरुआत में सामान्य गुमशुदगी के तौर पर जांच शुरू की।
- लेकिन जैसे-जैसे सुराग मिले, मामला गंभीर होता गया।
- रेसकोर्स वाले कमरे में खून के धब्बे मिले,
- जो फोरेंसिक जांच में दिगंबर के खून से मैच कर गए।
- टैक्सी ड्राइवर से पूछताछ हुई, जो 17 फरवरी को हिरासत में लिया गया।
- उसकी निशानदेही पर पुलिस हरिद्वार के जंगल पहुंची और शव बरामद कर लिया।
एसएसपी के नेतृत्व में चल रही जांच में तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उन्होंने जुर्म कबूल कर लिया। उन्होंने बताया कि पैसों की वापसी न होने से गुस्सा आया और नशे में नियंत्रण खो बैठे। हत्या के बाद शव दफनाने का फैसला फंसने के डर से लिया।
समाज पर सवाल: दोस्ती या दरिंदगी?
- यह केस सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि रिश्तों की सच्चाई का आईना है।
- आज के दौर में पैसे के लालच, नशे और छोटी-छोटी रंजिशें दोस्तों को दुश्मन बना देती हैं।
- दिगंबर की शादी की तैयारियां चल रही थीं, घर में खुशियां थीं,
- लेकिन एक शाम ने सब कुछ छीन लिया।
- परिवार सदमे में है, जबकि आरोपी जेल में हैं।
देहरादून में पिछले कुछ समय में कई हत्याकांड हुए, लेकिन यह मामला खास इसलिए चर्चित हुआ क्योंकि यहां कातिल यार ही निकले। पुलिस ने इसे जल्द सुलझाकर राहत दी, लेकिन सवाल बाकी हैं – क्या दोस्ती अब सिर्फ एक शब्द रह गई है? क्या पैसे के लिए इंसान इतना नीचे गिर सकता है?
यह घटना हमें याद दिलाती है कि नशा और लालच कितने खतरनाक हो सकते हैं। दोस्ती में विश्वास रखें, लेकिन सावधान भी रहें। क्योंकि कभी-कभी “यार” ही सबसे बड़ा “दरिंदा” बन जाता है।
