बांग्लादेश हिंदू नेता मौत
बांग्लादेश हिंदू नेता मौत बांग्लादेश में हिंदू नेता की जेल में संदिग्ध मौत से अल्पसंख्यकों में दहशत। हिंदुओं पर अत्याचार बढ़े, नरक जैसी स्थिति। सरकार की चुप्पी पर सवाल। पूरी घटना की टाइमलाइन और प्रभाव जानें।

#बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के लिए जीना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है, और अब एक और दर्दनाक घटना ने इस बात को फिर से साबित कर दिया है कि वहाँ हिंदुओं के लिए नरक जैसी स्थिति बन चुकी है । बांग्लादेश के प्रसिद्ध हिंदू गायक और आवामी लीग के नेता प्रोलय चाकी की पुलिस और जेल हिरासत में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिसके बाद उनके परिवार और मानवाधिकार संगठनों ने यूनुस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं ।
बांग्लादेश हिंदू नेता मौत: प्रोलय चाकी कौन थे?
- प्रोलय चाकी बांग्लादेश के पाबना जिले के एक मशहूर हिंदू
- संगीतकार और आवामी लीग के जिला स्तर के सांस्कृतिक मामलों के सचिव थे ।
- वह न केवल एक प्रतिष्ठित गायक थे,
- बल्कि राजनीतिक तौर पर भी आवामी लीग के सक्रिय नेता माने जाते थे ।
- उनकी गिरफ्तारी और बाद में जेल में मौत ने न केवल उनके परिवार को झकझोरा है,
- बल्कि पूरे बांग्लादेश के हिंदू समुदाय में भय और आक्रोश फैला दिया है ।
गिरफ्तारी और जेल में मौत
प्रोलय चाकी को 16 दिसंबर 2025 को पाबना के दिलालपुर स्थित उनके घर से अचानक गिरफ्तार कर लिया गया था । उन पर जुलाई 2024 में हुए छात्र आंदोलन के दौरान हिंसक विरोध प्रदर्शन और विस्फोट के मामले में आरोप लगाए गए थे, जिसमें आवामी लीग के कई अन्य नेता भी शामिल थे ।
चाकी लंबे समय से डायबिटीज और दिल की बीमारी से जूझ रहे थे, लेकिन जेल में उन्हें उचित चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिलीं । जब उनकी हालत बिगड़ी, तो उन्हें पहले पाबना जनरल अस्पताल और बाद में राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहाँ 11 जनवरी 2026 की रात करीब 9 बजे उनकी मौत हो गई ।
परिवार के गंभीर आरोप
प्रोलय चाकी के परिवार ने जेल प्रशासन और यूनुस की अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं । उनके बेटे सोनी चाकी का कहना है कि उनके पिता को बिना किसी ठोस सबूत के गिरफ्तार किया गया और जेल में उनकी हालत बिगड़ने के बावजूद उन्हें समय पर उचित इलाज नहीं दिया गया ।
- परिवार का आरोप है कि जेल अधिकारियों ने उन्हें
- उनकी बिगड़ती तबीयत के बारे में सूचित नहीं किया,
- और जब वे अस्पताल पहुँचे,
- तो उन्हें लगा कि उनके पिता को जरूरी चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिलीं ।
- परिवार का मानना है कि अगर समय पर सही इलाज मिलता,
- तो प्रोलय चाकी की जान बचाई जा सकती थी ।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ता अत्याचार
- प्रोलय चाकी की मौत बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार की एक और कड़ी है ।
- पिछले कुछ हफ्तों में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों,
- खासकर हिंदुओं के खिलाफ बर्बरता की कई घटनाएं सामने आई हैं ।
- 18 दिसंबर को मैमनसिंह में दीपू चंद्र दास की लिंचिंग के बाद से देश भर में कई हिंदुओं की हत्या कर दी गई है ।
इसके अलावा, जशोर में हिंदू कारोबारी और पत्रकार राणा प्रताप बैरागी की गोली मारकर हत्या कर दी गई, नरसिंगदी में एक हिंदू दुकानदार को बेरहमी से मार डाला गया और नौगांव में एक हिंदू युवक की धारदार हथियार से हत्या की गई । इन सभी घटनाओं ने बांग्लादेश के हिंदू समुदाय में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है ।
यूनुस सरकार पर उठे सवाल
- मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने इन घटनाओं पर अक्सर इन्हें
- “प्रोपेगंडा” या “गलत खबरें” बताकर टाल दिया है,
- जिससे अल्पसंख्यकों के बीच नाराजगी और बढ़ गई है ।
- मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि चाकी की मौत
- बांग्लादेश की जेलों में हिरासत के दौरान हो रही मौतों की एक चिंताजनक तस्वीर दिखाती है ।
- इस घटना ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा,
- जेलों में कैदियों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं और
- न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं ।
- परिवार ने अब न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग करते
- हुए यूनुस सरकार पर लापरवाही और राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया है ।
भारत में भी बढ़ रहा आक्रोश
प्रोलय चाकी की मौत और बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ते हमलों ने भारत में भी बड़ा आक्रोश पैदा कर दिया है । विपक्षी दलों, मानवाधिकार संगठनों और जनता की ओर से भारत सरकार पर दबाव बन रहा है कि वह बांग्लादेश सरकार के सामने हिंदुओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाए और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा रोकने के लिए ठोस कदम उठाए ।
इस घटना ने फिर से यह साबित कर दिया है कि बांग्लादेश में हिंदुओं के लिए जीना एक नरक जैसा हो चुका है, जहाँ उनकी जान, संपत्ति और धार्मिक स्वतंत्रता को लगातार खतरा है ।
