मैक्रों ट्रंप गुस्सा
मैक्रों ट्रंप गुस्सा फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप की धमकियों पर कड़ा जवाब दिया – “हम बुली नहीं बनने देंगे, धमकियों से नहीं डरते!” ग्रीनलैंड और टैरिफ विवाद पर यूरोप-अमेरिका तनाव बढ़ा।

20 जनवरी 2026 को विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दावोस सत्र में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर खुलकर निशाना साधा। मैक्रों ने कहा, “हम धमकियों से नहीं डरते… हम बुलीज़ (धौंसबाजों) को नहीं बनने देंगे!” यह बयान ट्रंप की हालिया धमकियों के जवाब में आया, जहां उन्होंने ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने के लिए यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। मैक्रों ने इसे “कानून का शासन बनाम क्रूरता” का मुद्दा बताते हुए यूरोप की संप्रभुता की रक्षा का संकल्प लिया।
यह घटनाक्रम ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती दिनों में ही अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक बड़ा विवाद बन गया है। ट्रंप ने न केवल ग्रीनलैंड पर दावा ठोका, बल्कि विरोध करने वाले देशों को 10% से 25% तक टैरिफ की धमकी दी। फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड्स, फिनलैंड और डेनमार्क जैसे देश इस सूची में शामिल हैं।
ट्रंप की ग्रीनलैंड नीति
ट्रंप ने 19 जनवरी 2026 को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि 1 फरवरी से इन 8 देशों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगेगा, जो 1 जून तक 25% हो जाएगा – जब तक डेनमार्क ग्रीनलैंड को अमेरिका को “पूर्ण और स्थायी” रूप से बेच नहीं देता। ट्रंप का तर्क है कि ग्रीनलैंड अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है, क्योंकि रूस और चीन वहां प्रभाव बढ़ा रहे हैं।
- Trump ने मैक्रों के साथ प्राइवेट टेक्स्ट मैसेज भी लीक किए,
- जिसमें मैक्रों ने उन्हें “माई फ्रेंड” कहकर ग्रीनलैंड पर अपनी असहमति जताई थी
- और पेरिस में G7 बैठक व डिनर का प्रस्ताव दिया था।
- ट्रंप ने इसे शेयर कर मैक्रों को “पीछे हटते” दिखाने की कोशिश की।
- ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया कि यूरोपीय नेता सार्वजनिक रूप से विरोध करते हैं,
- लेकिन प्राइवेट में अलग व्यवहार करते हैं।
इसके अलावा, ट्रंप ने फ्रेंच वाइन और शैंपेन पर 200% टैरिफ की धमकी भी दी, क्योंकि मैक्रों ने ट्रंप के प्रस्तावित “Board of Peace” (गाजा के लिए) में शामिल होने से इनकार किया।
मैक्रों का तीखा जवाब: “रूल ऑफ लॉ ओवर ब्रूटैलिटी”
दावोस में बोलते हुए मैक्रों ने ट्रंप का नाम लिए बिना कहा:
- “हम एक ऐसे दुनिया की ओर बढ़ रहे हैं जहां नियम नहीं हैं,
- अंतरराष्ट्रीय कानून को कुचल दिया जाता है और केवल सबसे ताकतवर का कानून चलता है।”
- “हम सम्मान को बुलीज़ पर तरजीह देते हैं… कानून के शासन को क्रूरता पर।”
- “टैरिफ और धमकियां यूरोपीय संप्रभुता को कमजोर करने की कोशिश हैं, जो अस्वीकार्य है।”
मैक्रों ने यूरोप से एकजुट रहने और “नए साम्राज्यवाद या उपनिवेशवाद” को नकारने की अपील की। उन्होंने कहा कि यूरोप टैरिफ युद्ध में फंसना नहीं चाहता, लेकिन जरूरत पड़ने पर जवाब देगा। फ्रांस ने पहले ही 2026-2030 के लिए 31.3 बिलियन पाउंड अतिरिक्त रक्षा बजट की घोषणा की है, जो इस तनाव से जुड़ा माना जा रहा है।
मैक्रों ट्रंप गुस्सा: दोनों पक्षों की स्थिति तुलनात्मक विश्लेषण
| पक्ष | मुख्य बयान / धमकी | संभावित कार्रवाई | प्रभाव क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| अमेरिका (ट्रंप) | ग्रीनलैंड बेचो, वरना 10-25% टैरिफ; फ्रेंच वाइन पर 200% टैरिफ | टैरिफ लागू करना, प्राइवेट मैसेज लीक करना | यूरोपीय निर्यात, NATO संबंध |
| फ्रांस (मैक्रों) | “धमकियों से नहीं डरते, बुली नहीं बनने देंगे”; रूल ऑफ लॉ vs ब्रूटैलिटी | यूरोपीय एकता, जवाबी टैरिफ, रक्षा बजट बढ़ाना | यूरोपीय संप्रभुता, ट्रांसअटलांटिक गठबंधन |
यह टकराव NATO के भविष्य पर भी सवाल उठा रहा है, क्योंकि ट्रंप पहले भी NATO सहयोगियों पर “फ्री राइडर” होने का आरोप लगा चुके हैं।
वैश्विक प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
- आर्थिक प्रभाव: यूरोपीय निर्यात पर टैरिफ से वैश्विक व्यापार प्रभावित होगा। फ्रेंच वाइन, शैंपेन और अन्य उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
- राजनीतिक प्रभाव: यूरोप में अमेरिका-विरोधी भावना बढ़ सकती है। मैक्रों की अपील से EU अधिक एकजुट हो सकता है।
- सुरक्षा प्रभाव: ग्रीनलैंड आर्कटिक में रणनीतिक है। अगर अमेरिका बल प्रयोग करता है, तो रूस-चीन को फायदा हो सकता है।
- भारत पर असर: भारत-US संबंध मजबूत हैं, लेकिन यूरोप के साथ ट्रेड युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर “कोई पीछे हटना नहीं” कहा है, जबकि मैक्रों ने “नए उपनिवेशवाद” को खारिज किया। क्या यह सिर्फ मौखिक जंग रहेगी या टैरिफ युद्ध में बदल जाएगी?
निष्कर्ष
ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति और मैक्रों की “यूरोपीय संप्रभुता” की लड़ाई अब खुलकर सामने आ गई है। मैक्रों का गुस्सा फूटना दिखाता है कि यूरोप अब “धमकियों” को बर्दाश्त नहीं करेगा। दुनिया देख रही है कि क्या ट्रांसअटलांटिक गठबंधन टूटेगा या मजबूत होगा। फिलहाल, “हम धमकियों से नहीं डरते” – यह मैक्रों का संदेश पूरी दुनिया को सुनाई दे रहा है।
