सऊदी पाक हथियार डील
सऊदी पाक हथियार डील सऊदी अरब की खतरनाक चाल का पर्दाफाश! संकट में फंसे देश को पाकिस्तान 1.5 अरब डॉलर के हथियार बेचेगा। बड़ा राज खुला, अंतरराष्ट्रीय साजिश उजागर। क्या ये डील मध्य पूर्व को और अस्थिर करेगी? पूरी खबर पढ़ें।

सऊदी अरब की एक खतरनाक रणनीति के तहत पाकिस्तान को लगभग 1.5 अरब डॉलर के हथियार बेचे जा रहे हैं, जिन्हें एक युद्धग्रस्त और मानवीय संकट में डूबे देश सूडान की सेना को दिया जाएगा। यह डील न सिर्फ सूडान के गृहयुद्ध को और खूनी बना सकती है, बल्कि पाकिस्तान को भी एक बड़े भू-राजनीतिक जाल में फंसा सकती है।
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सूडान का भयानक संकट
सूडान पिछले दो साल से भीषण गृहयुद्ध की चपेट में है, जहाँ सरकारी सेना और तेज़-तर्रार पैरामिलिट्री बल रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) आपस में लड़ रहे हैं। इस युद्ध में लाखों लोग बेघर हो चुके हैं, खाने-पीने की चीज़ें और दवाइयाँ नाममात्र की हैं, और दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक बन गया है।
इस युद्ध में दोनों पक्षों पर विदेशी हथियारों की आपूर्ति का आरोप लगता रहा है। सूडानी सेना का आरोप है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) RSF को हथियार और पैसा दे रहा है, जबकि RSF ने भी सेना को विदेशी समर्थन मिलने का आरोप लगाया है। ऐसे में पाकिस्तान से 1.5 अरब डॉलर के हथियारों की आपूर्ति का सौदा इस आग में घी डालने जैसा है।
सऊदी पाक हथियार डील: 1.5 अरब डॉलर की डील क्या है?
- रॉयटर्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक,
- पाकिस्तान और सूडान के बीच लगभग,
- 1.5 अरब डॉलर का बड़ा रक्षा सौदा अंतिम चरण में पहुँच गया है।
- इस सौदे के तहत सूडानी सेना को पाकिस्तानी लड़ाकू विमान,
- टैंक, तोपखाना और अन्य हथियार दिए जाएंगे।
खास तौर पर, ये हथियार सूडानी सेना को हवाई श्रेष्ठता वापस दिलाने में मदद कर सकते हैं, क्योंकि RSF ने पिछले कुछ महीनों में ड्रोन और अन्य हवाई हथियारों का इस्तेमाल बढ़ाकर सेना की स्थिति कमजोर कर दी है। पाकिस्तान के वायुसेना से जुड़े पूर्व शीर्ष अधिकारी और इस मामले से परिचित तीन सूत्रों ने इस संभावित डील की पुष्टि की है।
सऊदी अरब की खतरनाक चाल
- इस डील के पीछे सऊदी अरब की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चित है।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक,
- सऊदी अरब इस सौदे में मध्यस्थ या फंडिंग देने वाले के तौर पर शामिल हो सकता है।
- पूर्व पाकिस्तानी एयर मार्शल आमिर मसूद के मुताबिक,
- सऊदी अरब से फंडिंग आना संभव है,
- जिससे पाकिस्तान को तुरंत वित्तीय राहत मिल सकती है।
सऊदी अरब पाकिस्तान का पुराना वित्तीय सहयोगी है और इस्लामी दुनिया में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए ऐसे सौदे का इस्तेमाल करता रहा है। इस डील के जरिए सऊदी अरब सीधे हथियार भेजे बिना सूडान में अपने एजेंट (सूडानी सेना) को मजबूत कर सकता है, जिससे उसका राजनीतिक और सैन्य प्रभाव बढ़ेगा।
पाकिस्तान की मजबूरी
पाकिस्तान इस डील के लिए तैयार होने के पीछे अपनी गहरी आर्थिक मजबूरी है। देश आईएमएफ के प्रोग्राम में फंसा हुआ है, विदेशी मुद्रा भंडार घट रहे हैं और सरकार को तुरंत विदेशी करेंसी की जरूरत है।
इसी वजह से पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए और अब उसके जरिए तीसरे देशों को हथियार बेचने का रास्ता खोला है। इस तरह की डील से पाकिस्तान को तुरंत 1–2 अरब डॉलर का वित्तीय पैकेज मिल सकता है, जिसे शरीफ सरकार “बड़ी जीत” बता रही है।
भारत के लिए खतरा?
- इस डील से भारत के लिए भी एक नई चुनौती पैदा हो सकती है।
- सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच बढ़ता रक्षा तालमेल भारत के लिए एक नई सुरक्षा चिंता बन सकता है,
- खासकर जब दोनों देश मिलकर तीसरे देशों को उन्नत हथियार बेचने लगें।
- इसके अलावा, यह डील पाकिस्तान को आर्थिक तंगी से बाहर निकलने का मौका देगी,
- जिससे वह अपनी सैन्य और आतंकवादी गतिविधियों पर ज्यादा खर्च कर सकता है।
- इसलिए भारत को इस भू-राजनीतिक बदलाव पर नजर रखनी होगी और अपनी रक्षा तैयारियों को और मजबूत करना होगा।
निष्कर्ष
सऊदी अरब की यह खतरनाक चाल सिर्फ एक हथियार डील नहीं, बल्कि एक बड़ी भू-राजनीतिक चाल है, जिसमें पाकिस्तान को वित्तीय राहत देकर उसे अपने एजेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे सूडान के गृहयुद्ध में और खून बह सकता है और पाकिस्तान भी एक बड़े राजनीतिक जाल में फंस सकता है।
