टाटा मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट कॉन्ट्रैक्ट
टाटा मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट कॉन्ट्रैक्ट भारतीय वायुसेना के 60-80 टन मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट पर नजर रखे हुए है। कंपनी एमआरओ सुविधा के साथ पूरा प्रोजेक्ट भारत में ही करने की तैयारी में है।

प्रोजेक्ट कितना बड़ा है?
भारतीय वायुसेना ने 60 से 80 टन पेलोड कैपेसिटी वाले मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की जरूरत बताई है। अनुमान है कि पहले फेज में 40-60 विमान, फिर 80-100 तक कुल ऑर्डर जा सकता है। एक-एक एयरक्राफ्ट की कीमत 2000-2500 करोड़ रुपये के आसपास होने का अनुमान है। मतलब कुल डील का साइज ₹1.5 लाख करोड़ से ₹2.5 लाख करोड़ तक जा सकता है! ये भारत की अब तक की सबसे बड़ी “मेक इन इंडिया” डिफेंस एविएशन डील बन सकती है।
कौन-कौन दौड़ में है?
- टाटा + एयरबस (C-295 की सफलता के बाद सबसे मजबूत दावेदार)
- लॉकहीड मार्टिन (C-130J बनाता है, भारत में पहले से 12 उड़ा रहा है)
- एम्ब्रेयर (ब्राजील)
- एंटोनोव (यूक्रेन) – लेकिन मौजूदा हालात में कम चांस
सबाकियों के मुकाबले टाटा + एयरबस की जोड़ी सबसे आगे इसलिए है क्योंकि C-295 प्रोजेक्ट में टाटा ने वडोदरा में फाइनल असेंबली लाइन पहले ही खड़ी कर दी है और 2026 से डिलीवरी शुरू हो जाएगी। यानी इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किल्ड मैनपावर, सप्लाई चेन – सब तैयार है।
टाटा मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट:MRO का असली गेम चेंजर पॉइंट
टाटा ने साफ कह दिया है कि वो सिर्फ एयरक्राफ्ट नहीं बनाएगा, बल्कि नागपुर में एक वर्ल्ड क्लास MRO (Maintenance, Repair & Overhaul) फैसेलिटी भी बनाएगा। ये बहुत बड़ी बात है क्योंकि:
- अभी ज्यादातर भारतीय वायुसेना के बड़े विमान (C-17, C-130J) विदेश में ही ओवरहॉल होते हैं।
- हर ओवरहॉल में अरबों रुपये बाहर जाते हैं और महीनों का समय लगता है।
- अगर MRO भारत में बन गया तो 70-80% खर्च देश में ही रहेगा।
- हजारों हाई-स्किल जॉब्स क्रिएट होंगी।
- वायुसेना को 24×7 ऑपरेशनल रेडीनेस मिलेगी।
#टाटा के पास पहले से क्या है?
- टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स + एयरबस का C-295 प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक चल रहा है।
- सिखोरस्की हेलिकॉप्टर के लिए S-92 केब्लेड्स बना रहे हैं।
- बोइंग के साथ अपाचे फ्यूजलेज बना रहे हैं।
- नागपुर में पहले से MRO हब की प्लानिंग चल रही है।
- लॉकहीड मार्टिन के साथ भी जॉइंट वेंचर है।
यानी टाटा अब सिर्फ सप्लायर नहीं, बल्कि प्राइम इंटीग्रेटर बन चुका है।
अगर टाटा को कॉन्ट्रैक्ट मिला तो क्या होगा?
- भारत पहली बार 80 टन क्लास का ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट पूरी तरह देश में बनाएगा।
- टेक्नोलॉजी ट्रांसफर इतना बड़ा होगा कि आगे चलकर हम अपना खुद का MTA डिजाइन भी कर सकेंगे।
- नागपुर MRO हब बन जाएगा एशिया का सबसे बड़ा मिलिट्री एविएशन MRO।
- हजारों इंजीनियर्स, टेक्नीशियन को ट्रेनिंग मिलेगी।
- एक्सपोर्ट पोटेंशियल खुलेगा – इंडोनेशिया, मलैटिन अमेरिका, अफ्रीका के देश लाइन में लग जाएंगे।
निष्कर्ष
ये कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ एक डील नहीं है, ये भारत को ग्लोबल एविएशन पावरहाउस बनाने की सीढ़ी है। टाटा अगर ये प्रोजेक्ट जीत गया तो अगले 20-25 साल तक भारतीय डिफेंस एविएशन का चेहरा बदल जाएगा। C-295 के बाद MTA और MRO – ये कॉम्बो “आत्मनिर्भर भारत” को सचमुच हवा में उड़ान देगा!
