नागपुर भाजपा बगावत
नागपुर भाजपा बगावत नागपुर में भाजपा नेताओं ने बगावत का बिगुल फूंका। गडकरी के गढ़ में पार्टी के अंदर असंतोष बढ़ता जा रहा है। जानिए किस वजह से उभरा यह संकट।

Nagpur में भाजपा में बगावत के सुर तेज हो गए हैं, जहां नितिन गडकरी के गढ़ में पुराने कार्यकर्ता टिकट वितरण से नाराज होकर इस्तीफा दे रहे हैं। नागपुर महानगरपालिका चुनाव से पहले यह असंतोष पार्टी के लिए खतरे की घंटी है।
नागपुर भाजपा बगावत की वजह: टिकट वितरण में अन्याय
- 15 जनवरी 2026 को होने वाले नागपुर नगर निगम (NMC) चुनाव में 151 सीटें हैं,
- जिनमें से भाजपा 143 पर लड़ रही है।
- पुराने वफादार कार्यकर्ताओं को टिकट न देकर दलबदलुओं,
- बाहरी लोगों और दूसरे वार्डों के उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने से गुस्सा भड़का।
- वार्ड 17 के विनायक देहांकर (पूर्व महापौर अर्चना देहांकर के पति) ने कहा कि पार्टी ने आश्वासन दिया था,
- लेकिन कांग्रेस से आए बागियों को टिकट दे दिया।
- उन्होंने भाजपा से इस्तीफा देकर निर्दलीय लड़ने का फैसला किया।
प्रमुख बागी और इस्तीफे
वार्ड 16 (डी) में वार्ड अध्यक्ष गजानन निशितकर को टिकट न मिलने पर उन्होंने और 80 कार्यकर्ताओं ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया। निशितकर ने बताया कि 30 साल की निष्ठा के बावजूद दूसरे वार्ड की महिला को चुना गया। प्रभाग 15 में कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के घर का घेराव किया, जहां वे AB फॉर्म वितरण के खिलाफ प्रदर्शन करने पहुंचे। चंद्रशेखर बावनकुले के वाहन को भी घेरा गया। देवदत्त देहांकर जैसे नेता भी इस्तीफा दे चुके हैं।
गडकरी-फडणवीस के गढ़ में चुनौती
- नागपुर देवेंद्र फडणवीस और नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र है,
- जहां भाजपा का RSS आधार मजबूत है।
- 2017 में 108 सीटें जीतने वाली पार्टी अब पुराने चेहरों को हटाकर नए चेहरों पर दांव लगा रही है,
- ताकि एंटी-इनकंबेंसी से बचे।
- पूर्व महापौर दयाशंकर तिवारी, नंदा जिचकर, वर्शा ठाकरे जैसे भारी भरकम नाम कटे।
- कार्यकर्ता बोथ कमेटियां बंद करने और कैंपेन न करने की धमकी दे रहे हैं।
पार्टी की रणनीति और आगामी खतरा
भाजपा ने टिकट लिस्ट गोपनीय रखी और नामांकन अंतिम दिन (2 जनवरी) तक टाले, ताकि बगावत रोकी जाए। शिवसेना को 8 सीटें, अजित पवार NCP को 90+ दीं। कांग्रेस सभी 151, शरद पवार NCP 79 सीटों पर। बागावत फैलने से वोट स्प्लिट हो सकता है।
भविष्य की संभावनाएं
गडकरी के घर प्रदर्शन से साफ है कि स्थानीय असंतोष हाईकमान तक पहुंचा। पार्टी को कार्यकर्ताओं को मनाना होगा, वरना गढ़ गिर सकता है। यह महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिका चुनावों में भाजपा के लिए सबक है।
