Trump Iran Armada Trigger
Trump Iran Armada Trigger ट्रंप ने ईरान पर सख्त एक्शन लिया, US ने विशाल आर्मडा और वॉरशिप्स मिडिल ईस्ट भेजीं। तेहरान का जवाब- “फिंगर ऑन द ट्रिगर”, IRGC तैयार! तनाव चरम पर, युद्ध की आशंका।

मध्य पूर्व में एक बार फिर युद्ध की आहट सुनाई दे रही है। जनवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए भारी सैन्य तैनाती का आदेश दिया है। अमेरिका ने फारस की खाड़ी की ओर अपना सबसे शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, यूएसएस अब्राहम लिंकन सहित दर्जनों युद्धपोत, गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स, F-15 फाइटर जेट्स और अन्य हवाई-सैन्य संसाधन भेजे हैं। ट्रंप ने इसे “मैसिव आर्माडा” और “बड़ा फोर्स” करार देते हुए कहा है कि अमेरिका ईरान को “बहुत करीब से देख रहा है” और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।
Trump Iran Armada Trigger: ईरान में क्या हो रहा है?
दिसंबर 2025 के अंत से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन जोरों पर हैं। महंगाई, बेरोजगारी, इंटरनेट ब्लैकआउट और राजनीतिक दमन के खिलाफ शुरू हुए इन विरोधों में हजारों लोग शामिल हुए। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 2,600 से 20,000 तक लोग मारे जा चुके हैं, जबकि हजारों गिरफ्तार हुए हैं। ईरान सरकार इन आंकड़ों को नकारती है और प्रदर्शनों को “विदेशी साजिश” बताती है। ट्रंप ने बार-बार चेतावनी दी कि अगर “शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों” पर हिंसा जारी रही तो अमेरिका “उनकी मदद के लिए आएगा”। उन्होंने दावा किया कि उनकी धमकी से ईरान ने सैकड़ों फांसियों को रद्द किया।
- ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में कहा,
- “हमारे पास ईरान की तरफ एक बड़ा फ्लोटिला जा रहा है।
- उम्मीद है कि इसका इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा, लेकिन हम देख रहे हैं।”
- उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि अगर कोई अमेरिकी राष्ट्रपति पर हमला करने की कोशिश की तो “वे पृथ्वी से मिटा दिए जाएंगे”।
अमेरिका की सैन्य तैनाती: क्या संकेत?
अमेरिकी सेना की यह तैनाती जून 2025 में इजरायल-ईरान 12-दिवसीय युद्ध के बाद सबसे बड़ी है, जिसमें अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख न्यूक्लियर साइट्स पर हमला किया था। अब यूएसएस अब्राहम लिंकन एरेबियन सी में पहुंच चुका है। पेंटागन ने F-15E स्ट्राइक ईगल्स, एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर और अन्य एसेट्स को मिडिल ईस्ट भेजा है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह तैनाती पहले और दूसरे गल्फ वॉर से भी बड़ी है।
- ट्रंप का उद्देश्य स्पष्ट लगता है—ईरान को “स्ट्रैटेजिक सबमिशन” में लाना,
- न्यूक्लियर प्रोग्राम को पूरी तरह रोकना और प्रदर्शनों पर दमन बंद करवाना।
- हालांकि, कुछ सलाहकारों और सहयोगियों (इजरायल, सऊदी अरब) ने सावधानी बरतने की सलाह दी है,
- क्योंकि ईरान की मिसाइल क्षमता अभी भी मजबूत है।
तेहरान का जवाब: “ट्रिगर पर उंगली तैयार”
- ईरान ने अमेरिकी तैनाती को “युद्ध की तैयारी” बताते हुए कड़ा जवाब दिया है।
- रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांडर मोहम्मद पाकपुर ने कहा,
- “इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और प्रिय ईरान की उंगली ट्रिगर पर है,
- पहले से ज्यादा तैयार, सुप्रीम लीडर के आदेशों को लागू करने के लिए।”
- विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वॉल स्ट्रीट जर्नल में लिखा,
- “हमारे शक्तिशाली सशस्त्र बलों को किसी भी नए हमले पर ‘सब कुछ’
- से जवाब देने में कोई संकोच नहीं।
- ” उन्होंने चेतावनी दी कि कोई भी टकराव “क्षेत्र को घेर लेगा और वैश्विक प्रभाव डालेगा”।
ईरान ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया, सीमाओं पर गोला-बारूद ड्रिल्स शुरू कीं और अमेरिकी बेसेज को “वैध टारगेट” बताया। तेहरान का कहना है कि वह युद्ध नहीं चाहता, लेकिन “पूर्ण युद्ध के लिए तैयार” है।
क्या होगा आगे?
- यह तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है,
- क्योंकि फारस की खाड़ी से तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
- अगर अमेरिका हमला करता है, तो ईरान होर्मुज स्ट्रेट बंद कर सकता है,
- जिससे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
- इजरायल भी हाई अलर्ट पर है और किसी जवाबी हमले की तैयारी कर रहा है।
ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति यहां एक बार फिर परीक्षा में है। क्या यह सिर्फ धमकी है या असली एक्शन? ईरान की “ट्रिगर पर उंगली” वाली तैयारी से साफ है कि कोई भी गलती क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकती है। दुनिया सांस थामे देख रही है कि अगला कदम क्या होगा—बातचीत या बमबारी?
