ट्रंप नोबेल दावा
ट्रंप नोबेल दावा डोनाल्ड ट्रंप का धमाकेदार दावा – ‘नोबेल शांति पुरस्कार मेरा हक, मैंने भारत-पाक युद्ध रोका!’ दुनिया स्तब्ध। क्या ये दावा सच्चाई पर आधारित? ट्रंप की पुरानी डिप्लोमेसी पर नया विवाद। पूरी डिटेल्स जानें।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच बड़े युद्ध को रोक दिया, और इसलिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। इस दावे ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है, खासकर भारत और पाकिस्तान में, जहाँ ट्रंप के बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं।
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ट्रंप का बड़ा दावा
- Trump ट्रंप ने एक जनसभा में कहा कि,
- भारत और पाकिस्तान एक बड़े युद्ध के लिए तैयार थे,
- लेकिन उन्होंने दोनों परमाणु सशस्त्र देशों के बीच युद्ध रुकवा दिया।
- उन्होंने कहा, “मैंने आठ युद्ध रोके हैं,
- और सैद्धांतिक रूप से हर युद्ध रोकने के लिए मुझे नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए।”
Trump ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें बताया कि उनकी वजह से कम से कम एक करोड़ लोगों की जान बची। उन्होंने कहा, “इतिहास में मुझे नहीं लगता कि कोई और मुझसे ज्यादा नोबेल पुरस्कार का हकदार है।”
ट्रंप नोबेल दावा : 2025 का भारत-पाक तनाव
- ट्रंप का यह दावा 2025 के भारत-पाकिस्तान तनाव से जुड़ा है,
- जब जम्मू-कश्मीर में एक बड़े आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच तीखा सैन्य तनाव पैदा हुआ था।
- भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान
- और पीओके में आतंकी ठिकानों पर हमले किए,
- जिसके बाद पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई की।
इस तनाव के दौरान दोनों देशों के लड़ाकू विमान भी आपस में टकराए और कई विमान गिरे, जिससे युद्ध की आशंका बढ़ गई थी। अंततः 10 मई को दोनों देशों के बीच युद्धविराम हुआ, जिसे ट्रंप ने अपनी कूटनीतिक सफलता बताया है।
पाकिस्तान की नोबेल सिफारिश
- ट्रंप के इस दावे को पाकिस्तान सरकार ने भी तगड़ा समर्थन दिया है।
- पाकिस्तान ने औपचारिक तौर पर ट्रंप के नाम की
- 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए सिफारिश कर दी है।
पाकिस्तान का दावा है कि ट्रंप के “निर्णायक कूटनीतिक हस्तक्षेप और महत्वपूर्ण नेतृत्व” ने भारत-पाकिस्तान तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और दोनों परमाणु देशों के बीच व्यापक युद्ध को टाला। पाकिस्तान ने ट्रंप को “वास्तविक शांतिदूत” बताया और उनके जम्मू-कश्मीर विवाद में मध्यस्थता के प्रस्ताव की भी सराहना की है।
भारत का साफ खंडन
- भारत ने ट्रंप के दावे और नोबेल पुरस्कार के लिए उनकी सिफारिश को सिरे से खारिज कर दिया है।
- भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने स्पष्ट किया कि,
- 10 मई को हुए युद्धविराम का फैसला भारत और पाकिस्तान के सैन्य चैनलों के बीच सीधी बातचीत के जरिए लिया गया था,
- जिसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्रंप के साथ फोन पर हुई बातचीत में यही बात दोहराई कि भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम द्विपक्षीय सैन्य संवाद का परिणाम था। भारत ने जोर देकर कहा कि वह कभी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता और न ही भविष्य में करेगा।
नोबेल पुरस्कार की राजनीति
- नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन कई तरह के लोग और संस्थाएँ कर सकते हैं,
- जिसमें देशों की सरकारें भी शामिल हैं।
- हालाँकि, नोबेल समिति नामांकन की पुष्टि नहीं करती और ये रिकॉर्ड 50 साल तक गोपनीय रखे जाते हैं,
- इसलिए पाकिस्तान के नामांकन की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकती।
ट्रंप ने पहले भी कई बार नोबेल पुरस्कार की इच्छा जाहिर की है और दावा किया है कि उन्होंने कई युद्ध रोके हैं, लेकिन उन्हें यह पुरस्कार नहीं मिला। उनका कहना है कि यह पुरस्कार “केवल उदारवादियों को दिया जाता है”, जिससे उनकी नाराजगी झलकती है।
निष्कर्ष
ट्रंप का यह दावा कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रोका और इसलिए नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए, एक बड़ा राजनीतिक ड्रामा बन गया है। पाकिस्तान की तरफ से नोबेल के लिए सिफारिश इस ड्रामे को और बढ़ा रही है, लेकिन भारत का साफ खंडन यह दिखाता है कि द्विपक्षीय मामलों में तीसरे पक्ष की भूमिका को नहीं माना जाता।
