पीएम मोदी ने लाल किले से 76 मिनट का भाषण
नई दिल्ली: देश ने शनिवार को आजादी की 80वीं वर्षगांठ पूरे उत्साह और देशभक्ति के माहौल में मनाई। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर आयोजित मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। इसके बाद उन्होंने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया। इस बार प्रधानमंत्री का संबोधन करीब 76 मिनट तक चला, जिसमें विकसित भारत, युवा शक्ति, महिला भागीदारी, सुरक्षा, खेल, तकनीक और आत्मनिर्भरता समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को दोहराया। उन्होंने कहा कि देश के सामने मौजूद अवसरों का लाभ उठाकर भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। उन्होंने नागरिकों से विकास की इस यात्रा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
लाल किले पर पहली बार खास अंदाज में गूंजा वंदे मातरम
इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को विशेष महत्व दिया गया। समारोह के दौरान सेना के बैंड ने इसकी धुन प्रस्तुत की और उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रीय गीत गाया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने तिरंगा फहराया और राष्ट्रगान हुआ। समारोह में देश की स्वतंत्रता यात्रा और राष्ट्रीय एकता की भावना को प्रमुखता दी गई।
ध्वजारोहण के बाद प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय सलामी दी गई। भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों से पुष्पवर्षा भी की गई। लाल किले की प्राचीर पर आयोजित यह कार्यक्रम देश की सैन्य क्षमता, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बना।
2047 के विकसित भारत पर प्रधानमंत्री का जोर
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में 2047 के भारत की तस्वीर सामने रखी। उन्होंने देशवासियों से विकास को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित न मानकर इसे जनभागीदारी का अभियान बनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि देश के पास समय भी है, अवसर भी है और सामूहिक संकल्प की शक्ति भी है। उनका संदेश युवाओं, किसानों, महिलाओं, उद्यमियों और सामान्य नागरिकों को विकास की प्रक्रिया में भागीदार बनाने पर केंद्रित रहा।
प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े महान व्यक्तित्वों और उनके सपनों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को उन आदर्शों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का नेटवर्क
प्रधानमंत्री ने युवाओं और विद्यार्थियों को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को अवसर उपलब्ध कराना है जो महंगी कोचिंग का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं। प्रधानमंत्री ने शिक्षा और कौशल को युवाओं की शक्ति बताते हुए नई पीढ़ी को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने पर जोर दिया।
जनगणना में युवाओं से भागीदारी की अपील
प्रधानमंत्री ने जनगणना प्रक्रिया में युवाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने लोगों से परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर सही और सटीक जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सही आंकड़े देश की नीतियां तैयार करने और भविष्य की योजनाओं को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। युवाओं से उन्होंने जनगणना की प्रक्रिया को केवल सरकारी काम न मानकर राष्ट्र निर्माण में योगदान के अवसर के रूप में लेने का आह्वान किया।
महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की अपील
प्रधानमंत्री ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।
उनका कहना था कि भारत के विकास में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है और निर्णय लेने वाली संस्थाओं में उनकी भागीदारी भी मजबूत होनी चाहिए। महिला शक्ति को देश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए उन्होंने राजनीतिक दलों से इस दिशा में सहयोग की अपील की।
नागरिक सुरक्षा का बड़ा नेटवर्क बनाने की घोषणा
देश की सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री ने नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने की बात कही। उन्होंने आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर देश में नागरिक रक्षा का बड़ा नेटवर्क विकसित करने की घोषणा की।
इस व्यवस्था में युवाओं की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सुरक्षा की चुनौतियां केवल सीमाओं तक सीमित नहीं हैं। महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, वित्तीय व्यवस्था और अन्य क्षेत्रों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
नक्सलवाद को लेकर कड़ा संदेश
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में नक्सलवाद और माओवाद के खिलाफ सरकार की नीति को भी स्पष्ट किया।
उन्होंने कहा कि हिंसक नक्सलवाद ने लंबे समय तक देश के
अनेक हिस्सों को प्रभावित किया और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई।
उन्होंने दावा किया कि देश नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
साथ ही उन्होंने ऐसी विचारधाराओं के खिलाफ सतर्क रहने की बात कही जो
उनके अनुसार देश को हिंसा की ओर ले जाने का प्रयास करती हैं।
खेलों में भारत की बढ़ती ताकत का जिक्र
प्रधानमंत्री ने खेलों में भारत की बढ़ती उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों की मौजूदगी लगातार मजबूत हो रही है।
उन्होंने 2036 ओलंपिक के लिए भारत की दावेदारी और 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी का भी उल्लेख किया।
साथ ही उन्होंने कम उम्र में प्रतिभाओं की पहचान करने के लिए गांवों और
स्कूलों तक प्रतिभा खोज अभियान चलाने की बात कही।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कई ऐसे खेल हैं जिनमें भारत अभी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है।
ऐसे खेलों में नई प्रतिभाओं को तैयार करने पर ध्यान देने की जरूरत है।
युवाओं को आगे बढ़ाने पर सरकार का फोकस
पूरे संबोधन में युवा शक्ति एक प्रमुख विषय रही। प्रधानमंत्री ने युवाओं को देश के भविष्य का
आधार बताते हुए शिक्षा, प्रशिक्षण, खेल और तकनीकी क्षमता बढ़ाने की जरूरत बताई।
मुफ्त कोचिंग, डिजिटल माध्यम, खेल प्रतिभा की खोज और नागरिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में
युवाओं की भागीदारी बढ़ाने का संदेश दिया गया। इससे स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में
युवा आबादी को देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
समारोह के बाद बच्चों से मिले प्रधानमंत्री
लाल किले से संबोधन पूरा होने के बाद प्रधानमंत्री बच्चों से भी मिले।
इस दौरान बच्चों में खास उत्साह दिखाई दिया।
मुलाकात के दौरान एक बच्ची के सिर से टोपी गिर गई तो
प्रधानमंत्री ने उसे उठाकर दोबारा बच्ची के सिर पर रख दिया।
समारोह के बाद का यह दृश्य भी लोगों के बीच चर्चा में रहा।
क्या है 80वें स्वतंत्रता दिवस का बड़ा संदेश?
इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस समारोह में देश के अतीत के गौरव के साथ भविष्य की
विकास यात्रा पर विशेष जोर दिखाई दिया। प्रधानमंत्री के भाषण में 2047 का लक्ष्य, युवा शक्ति,
महिला भागीदारी, शिक्षा, खेल, सुरक्षा और तकनीक जैसे विषय प्रमुख रहे।
सरकार के सामने अब इन घोषणाओं और लक्ष्यों को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने की चुनौती होगी।
खासकर युवाओं के लिए मुफ्त कोचिंग, महिला प्रतिनिधित्व, नागरिक सुरक्षा नेटवर्क और खेल प्रतिभाओं की पहचान
जैसी घोषणाओं का वास्तविक असर इनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
80वें स्वतंत्रता दिवस का संदेश यही रहा कि भारत अपनी आजादी के आठ दशक पूरे करने के बाद
अगले पड़ाव की ओर बढ़ रहा है। 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य
अब राष्ट्रीय विकास के बड़े एजेंडे के रूप में सामने रखा जा रहा है।
FAQ
1. भारत ने 2026 में कौन सा स्वतंत्रता दिवस मनाया?
भारत ने 15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया।
2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर कहां से भाषण दिया?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया।
3. पीएम मोदी का 15 अगस्त 2026 का भाषण कितनी देर चला?
प्रधानमंत्री का संबोधन करीब 76 मिनट तक चला।
4. पीएम मोदी ने 2047 को लेकर क्या संदेश दिया?
उन्होंने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को दोहराया और
नागरिकों से इस लक्ष्य की प्राप्ति में योगदान देने की अपील की।
5. युवाओं के लिए पीएम मोदी ने क्या घोषणा की?
उन्होंने युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का नेटवर्क विकसित करने की बात कही।
6. महिलाओं को लेकर पीएम मोदी ने क्या कहा?
उन्होंने राजनीतिक दलों से महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।
7. जनगणना को लेकर पीएम मोदी ने क्या अपील की?
उन्होंने युवाओं और नागरिकों से जनगणना के दौरान सही और सटीक जानकारी उपलब्ध कराने में सहयोग करने का आह्वान किया।
8. खेलों को लेकर प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
उन्होंने भारत की खेल क्षमता बढ़ाने, प्रतिभाओं की कम उम्र में पहचान करने और
भविष्य की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों को तैयार करने पर जोर दिया।
9. स्वतंत्रता दिवस समारोह में वंदे मातरम को लेकर क्या खास रहा?
2026 के लाल किला समारोह में ‘वंदे मातरम’ को विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया और
राष्ट्रीय गीत की धुन समारोह का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
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