तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने
पूर्वी भूमध्यसागर में बढ़ा तनाव
मध्य पूर्व और पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र में लगातार बढ़ते तनाव के बीच तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने इजरायल, साइप्रस और ग्रीस को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। एर्दोगन ने कहा कि तुर्किये अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए किसी भी चुनौती का मजबूती से जवाब देगा। उनके इस बयान ने क्षेत्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
एर्दोगन ने इजरायल पर लगाए गंभीर आरोप
अपने संबोधन में एर्दोगन ने आरोप लगाया कि इजरायल की नीतियां केवल गाजा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा बनती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इजरायल की सैन्य गतिविधियां सीरिया और लेबनान तक फैल चुकी हैं और इससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ रहा है।
साइप्रस और ग्रीस का भी लिया नाम
तुर्किये लंबे समय से पूर्वी भूमध्यसागर में समुद्री सीमाओं, ऊर्जा संसाधनों और साइप्रस विवाद को लेकर ग्रीस और साइप्रस के साथ मतभेद रखता आया है। एर्दोगन ने कहा कि कुछ ताकतें क्षेत्र में नए तनाव पैदा करने की कोशिश कर रही हैं और तुर्किये ऐसी किसी भी पहल को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने विशेष रूप से तुर्की साइप्रियोट समुदाय के अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया।
क्यों अहम है पूर्वी भूमध्यसागर?
पूर्वी भूमध्यसागर ऊर्जा संसाधनों, गैस भंडार और समुद्री व्यापार मार्गों के कारण रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में इजरायल, ग्रीस और साइप्रस के बीच रक्षा और ऊर्जा सहयोग बढ़ा है, जिसे तुर्किये संदेह की नजर से देखता रहा है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में समय-समय पर तनाव बढ़ता रहा है।
इजरायल-तुर्किये संबंधों में बढ़ी तल्खी
गाजा युद्ध और क्षेत्रीय घटनाक्रमों के बाद इजरायल और तुर्किये के रिश्तों में पहले से अधिक तनाव देखने को मिला है। एर्दोगन कई बार सार्वजनिक मंचों से इजरायल की आलोचना कर चुके हैं। हालिया बयान को भी दोनों देशों के बीच बढ़ती कूटनीतिक दूरी के रूप में देखा जा रहा है।
क्या बढ़ सकता है क्षेत्रीय संकट?
विशेषज्ञों का मानना है कि तुर्किये, ग्रीस, साइप्रस और इजरायल के बीच बढ़ता तनाव पूरे पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। हालांकि विश्लेषकों का
यह भी कहना है कि सभी पक्ष सीधे सैन्य टकराव से बचना चाहेंगे क्योंकि
इसका असर ऊर्जा परियोजनाओं, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
दुनिया की नजर इस विवाद पर
पूर्वी भूमध्यसागर में बढ़ती गतिविधियों पर यूरोप, अमेरिका और नाटो देशों की भी नजर बनी हुई है। समुद्री सीमाओं,
ऊर्जा संसाधनों और सुरक्षा हितों को लेकर यह क्षेत्र लंबे समय से वैश्विक शक्तियों के लिए महत्वपूर्ण रहा है।
ऐसे में एर्दोगन का बयान आने वाले दिनों में कूटनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।
तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन का ताजा बयान पूर्वी
भूमध्यसागर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का संकेत माना जा रहा है।
इजरायल, ग्रीस और साइप्रस को लेकर दी गई चेतावनी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान
अपनी ओर खींचा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित देश
इस पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं और क्षेत्रीय स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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