Sheikh Hasina
नई दिल्ली/ढाका। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की दिल्ली से हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक तनाव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हसीना के सार्वजनिक बयान पर बांग्लादेश की मौजूदा सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई है। ढाका ने आरोप लगाया कि भारत की जमीन से दिए गए उनके बयान के जरिए देश के इतिहास और 2024 के घटनाक्रम को अलग तरीके से पेश करने की कोशिश की जा रही है।
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके बयान वहां के लोगों की भावनाओं को चोट पहुंचाने वाले हैं। ढाका ने यह भी कहा कि उसने इस कार्यक्रम को लेकर पहले ही भारत के सामने अपनी चिंताएं जाहिर की थीं। इसके बावजूद कार्यक्रम होने दिया गया, जिससे दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य करने की कोशिशों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
दिल्ली से हसीना का बड़ा बयान, दिसंबर में लौटने का दावा
शेख हसीना ने दिल्ली से सार्वजनिक संबोधन में बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कहा कि वह दिसंबर में अपने देश वापस जाने का इरादा रखती हैं। उन्होंने अपने खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और कहा कि वह जेल या मौत के खतरे से डरने वाली नहीं हैं।
हसीना के इस रुख ने बांग्लादेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। वह 2024 में बड़े छात्र आंदोलन और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद देश छोड़कर भारत आई थीं। तब से वह भारत में रह रही हैं और बांग्लादेश की नई सत्ता के साथ उनके संबंध बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
बांग्लादेश सरकार ने जताई कड़ी नाराजगी
हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने बेहद सख्त प्रतिक्रिया दी। सरकार ने उनके बयानों को देश के खिलाफ ‘जहरीली बयानबाजी’ बताया और आरोप लगाया कि हसीना तथा उनके सहयोगी 2024 के घटनाक्रम को लेकर स्थापित तथ्यों को अलग तरीके से पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।
ढाका का कहना है कि हसीना के बयानों से उन लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं जिन्हें 2024 के आंदोलन के दौरान जान गंवानी पड़ी थी। बांग्लादेश ने संयुक्त राष्ट्र की ओर से 2024 की हिंसा और नागरिकों की मौतों से संबंधित निष्कर्षों का भी हवाला दिया।
‘इतिहास की धारा बदलने की कोशिश’ का आरोप
बांग्लादेश सरकार ने हसीना के बयान को इतिहास की दिशा बदलने की कोशिश बताया है। ढाका का आरोप है कि 2024 में हुए घटनाक्रम को लेकर देश में जो राजनीतिक और सामाजिक बदलाव आया, उसे अब अलग तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ‘इतिहास बदलने’ या ‘तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने’ जैसे आरोप बांग्लादेश सरकार के आधिकारिक रुख का हिस्सा हैं। इन्हें हसीना के खिलाफ स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं लिखा जा सकता।
बांग्लादेश की संप्रभुता का भी उठाया मुद्दा
ढाका ने हसीना को भारत से मीडिया के सामने बोलने का अवसर मिलने पर संप्रभुता से जुड़ा सवाल भी उठाया है। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि जिस समय देश 2024 के आंदोलन की दूसरी बरसी से जुड़े कार्यक्रमों में जुटा था, उसी दौरान भारत से हसीना का सार्वजनिक बयान आना वहां के लोगों की भावनाओं को प्रभावित करने वाला है।
बांग्लादेश ने यह भी कहा है कि दोनों देशों के बीच संबंध आपसी सम्मान, संप्रभु समानता और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने के सिद्धांत पर आगे बढ़ने चाहिए।
भारत से फिर उठी प्रत्यर्पण की मांग
शेख हसीना को लेकर बांग्लादेश की सरकार भारत से पहले भी प्रत्यर्पण की मांग करती रही है। ताजा बयान में भी ढाका ने इस मुद्दे को दोहराया है।
बांग्लादेश ने 2013 में दोनों देशों के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते का हवाला देते हुए कहा कि हसीना को वापस भेजने की उसकी मांग पर भारत की ओर से अब तक स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
यह मामला दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद कूटनीतिक तनाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
भारत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस से खुद को अलग बताया
इस पूरे घटनाक्रम में भारत का रुख भी महत्वपूर्ण है। भारत ने पहले ही स्पष्ट किया था कि हसीना के कार्यक्रम के आयोजन में सरकार की कोई भूमिका नहीं थी और वहां व्यक्त किए जाने वाले विचारों का सरकार समर्थन नहीं करती।
यानी दिल्ली का रुख यह रहा है कि हसीना की ओर से दिया गया बयान उनकी अपनी राजनीतिक अभिव्यक्ति है और इसे भारत सरकार की आधिकारिक नीति के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर पड़ सकता है असर
हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद दोनों देशों के संबंधों को लेकर चिंता बढ़ी है। भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा सुरक्षा, व्यापार, नदी जल बंटवारा, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
ऐसे में किसी भी राजनीतिक बयान का असर सिर्फ दोनों देशों की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहता। कूटनीतिक स्तर पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
ताजा घटनाक्रम को लेकर बांग्लादेश ने भारत से अपनी नीति स्पष्ट करने की मांग भी की है।
हसीना पर कानूनी कार्रवाई का मामला भी अहम
शेख हसीना के भारत में रहने का मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि बांग्लादेश में उनके खिलाफ गंभीर कानूनी कार्रवाई हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें बांग्लादेश के एक अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। हसीना और उनके समर्थक इन कानूनी मामलों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते रहे हैं।
इसलिए उनका भारत में रहना और सार्वजनिक बयान देना दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है।
2024 के आंदोलन की विरासत पर भी टकराव
शेख हसीना और बांग्लादेश की मौजूदा सरकार के बीच
सबसे बड़ा मतभेद 2024 के आंदोलन की व्याख्या को लेकर भी है।
हसीना ने अपने बयान में आंदोलन और अपनी सरकार के
पतन को लेकर अलग दृष्टिकोण रखा है। वहीं बांग्लादेश की मौजूदा सत्ता
2024 के घटनाक्रम को बड़े जनआंदोलन और राजनीतिक परिवर्तन के रूप में प्रस्तुत करती है।
इसी वजह से दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती रही है।
क्या दिसंबर में वापस लौटेंगी शेख हसीना?
अब सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर है कि क्या शेख हसीना वास्तव में दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी।
उन्होंने वापसी का इरादा जाहिर किया है, लेकिन उनके खिलाफ मौजूद कानूनी मामलों और सुरक्षा
संबंधी जोखिमों को देखते हुए यह आसान कदम नहीं होगा। यदि वह वापस लौटती हैं तो इसका बांग्लादेश की
राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
हसीना के बयान के बाद अब दोनों देशों की कूटनीतिक
गतिविधियों पर नजर रहेगी। बांग्लादेश लगातार प्रत्यर्पण के
मुद्दे को उठा रहा है, जबकि भारत ने हसीना के सार्वजनिक कार्यक्रम से खुद को अलग बताया है।
अगर ढाका और दिल्ली के बीच इस मुद्दे पर बातचीत आगे बढ़ती है तो
आने वाले दिनों में दोनों देशों के आधिकारिक बयानों से तस्वीर और साफ हो सकती है।
निष्कर्ष
शेख हसीना की दिल्ली से हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस ने बांग्लादेश की राजनीति के साथ-साथ भारत-बांग्लादेश संबंधों को भी
एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। हसीना ने अपने राजनीतिक रुख को मजबूती से सामने रखा और
बांग्लादेश लौटने का इरादा जताया, वहीं ढाका ने उनके बयान पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
बांग्लादेश सरकार ने हसीना पर इतिहास को अलग तरीके से पेश करने और
2024 के घटनाक्रम को लेकर जनता की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर,
भारत ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के आयोजन से अपनी सरकार को अलग बताया है।
अब इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या शेख हसीना दिसंबर में
बांग्लादेश लौटेंगी और क्या उनकी वापसी भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा को बदल सकती है? आने
वाले राजनीतिक और कूटनीतिक घटनाक्रम इस सवाल का जवाब देंगे।
FAQ
Q1. शेख हसीना की दिल्ली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर विवाद क्यों हुआ?
बांग्लादेश सरकार ने हसीना के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि
उनके बयान से 2024 के घटनाक्रम को अलग तरीके से पेश करने की कोशिश हुई है।
Q2. शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने को लेकर क्या कहा?
उन्होंने बांग्लादेश वापस लौटने का इरादा जताया है और उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार दिसंबर में वापसी की बात कही है।
Q3. बांग्लादेश सरकार ने भारत से क्या मांग की है?
ढाका ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग दोहराई है और
दोनों देशों के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते का हवाला दिया है।
Q4. क्या भारत सरकार ने हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी?
भारत ने कहा है कि सरकार का इस कार्यक्रम के आयोजन में कोई रोल नहीं था और
वहां व्यक्त किए गए विचारों का वह समर्थन नहीं करती।
Q5. भारत-बांग्लादेश संबंधों पर इसका क्या असर हो सकता है?
इस विवाद से दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद कूटनीतिक तनाव बढ़ सकता है और
संबंध सामान्य करने की कोशिशों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
Q6. शेख हसीना भारत में क्यों रह रही हैं?
वह 2024 में बांग्लादेश में हुए बड़े राजनीतिक और छात्र आंदोलन के बाद
देश छोड़कर भारत आई थीं और तब से भारत में रह रही हैं।
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