US-ईरान तनाव
Hormuz Strait Crisis: सऊदी अरब और UAE ने कैसे तैयार किया ईरान के दबाव का विकल्प? जानिए पूरी रणनीति
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण पूरी दुनिया की नजर एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर टिक गई है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। हालिया घटनाक्रम के बीच सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुछ अन्य खाड़ी देशों ने पहले से तैयार वैकल्पिक तेल पाइपलाइन नेटवर्क का इस्तेमाल तेज कर दिया है ताकि तेल निर्यात बिना बाधा जारी रखा जा सके।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। ऐसे में वैकल्पिक पाइपलाइनें खाड़ी देशों के लिए रणनीतिक सुरक्षा कवच बनकर उभरी हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर, यूएई और अन्य खाड़ी देशों का अधिकांश तेल और गैस निर्यात इसी मार्ग से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है।
दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। इसलिए यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या अवरोध वैश्विक ऊर्जा बाजार को तुरंत प्रभावित करता है।
सऊदी अरब ने कैसे निकाला विकल्प?
सऊदी अरब ने वर्षों पहले ही संभावित जोखिम को देखते हुए East-West Crude Oil Pipeline (Petroline) का निर्माण किया था। यह पाइपलाइन देश के पूर्वी तेल क्षेत्रों को लाल सागर स्थित यानबू (Yanbu) बंदरगाह से जोड़ती है।
इस पाइपलाइन के जरिए सऊदी अरब बिना होर्मुज जलडमरूमध्य का उपयोग किए सीधे लाल सागर के रास्ते अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक तेल पहुंचा सकता है। मौजूदा तनाव के दौरान इस मार्ग का महत्व और बढ़ गया है।
UAE की रणनीति भी साबित हो रही कारगर
संयुक्त अरब अमीरात ने भी कई वर्ष पहले Habshan-Fujairah Pipeline विकसित की थी। यह पाइपलाइन अबू धाबी के तेल क्षेत्रों को फुजैराह बंदरगाह से जोड़ती है, जो सीधे अरब सागर पर स्थित है और होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर है।
इस वजह से यूएई का बड़ा हिस्सा बिना होर्मुज से गुजरे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकता है। इससे समुद्री जोखिम कम होता है और तेल आपूर्ति अपेक्षाकृत सुरक्षित रहती है।
भारत और वैश्विक बाजार पर क्या पड़ेगा असर?
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और खाड़ी देश उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिससे पेट्रोल-डीजल महंगे होने की संभावना बढ़ जाती है।
हालांकि सऊदी अरब और यूएई की वैकल्पिक पाइपलाइनें वैश्विक बाजार को कुछ राहत दे सकती हैं। इसके बावजूद इराक और कुवैत जैसे देश अभी भी काफी हद तक होर्मुज मार्ग पर निर्भर हैं, इसलिए जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
क्या भविष्य में होर्मुज पर निर्भरता कम होगी?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल एक समुद्री मार्ग पर निर्भर रहना दीर्घकालिक रणनीति नहीं हो सकती। यही कारण है कि खाड़ी देश नई पाइपलाइन, अतिरिक्त भंडारण सुविधाओं और वैकल्पिक निर्यात मार्गों में निवेश बढ़ा रहे हैं।
यदि भविष्य में ऐसे प्रोजेक्ट और विकसित होते हैं तो वैश्विक तेल बाजार अधिक सुरक्षित और स्थिर हो सकता है।
हालांकि निकट भविष्य में होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक अहमियत
पूरी तरह समाप्त होने की संभावना नहीं है।
निष्कर्ष
अमेरिका-ईरान तनाव ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य
वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।
हालांकि सऊदी अरब और यूएई ने वैकल्पिक पाइपलाइन नेटवर्क विकसित कर
अपनी रणनीतिक तैयारी मजबूत कर ली है, लेकिन पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति अभी भी
इस समुद्री मार्ग से काफी हद तक जुड़ी हुई है। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय हालात और
वैश्विक तेल बाजार की दिशा इसी भू-राजनीतिक तनाव पर काफी हद तक निर्भर करेगी।
FAQ
1. होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि दुनिया के समुद्री कच्चे तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
2. सऊदी अरब ने कौन-सी पाइपलाइन बनाई है?
सऊदी अरब ने East-West Crude Oil Pipeline विकसित की है, जो
तेल को लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है।
3. UAE होर्मुज पर निर्भरता कैसे कम करता है?
UAE Habshan-Fujairah Pipeline के जरिए तेल सीधे फुजैराह बंदरगाह तक पहुंचाता है,
जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास किया जा सकता है।
4. क्या इसका असर भारत पर पड़ेगा?
यदि होर्मुज मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है तो भारत में कच्चे तेल की लागत और
ईंधन कीमतों पर असर पड़ सकता है।
5. क्या वैकल्पिक पाइपलाइनें पूरी समस्या का समाधान हैं?
नहीं। ये जोखिम कम करती हैं, लेकिन सभी खाड़ी देश इनके जरिए अपना पूरा
तेल निर्यात नहीं कर सकते, इसलिए होर्मुज की रणनीतिक अहमियत अभी भी बनी हुई है।
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