सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल पर बैठने
सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर क्यों बैठे हैं? जानिए उनकी मांगें और भारत के सफल-असफल अनशनों का इतिहास
नई दिल्ली। प्रसिद्ध इंजीनियर, शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनका अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल है। वांगचुक ने अपनी मांगों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन शुरू किया है। उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आने की खबरों के बीच देशभर में इस आंदोलन पर बहस तेज हो गई है। कई सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों और सार्वजनिक हस्तियों ने उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है।
हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब भारत में किसी बड़े मुद्दे पर भूख हड़ताल हुई हो। महात्मा गांधी से लेकर अन्ना हजारे तक कई आंदोलनों ने देश की राजनीति और नीतियों को प्रभावित किया है, जबकि कई अनशन अपने उद्देश्य हासिल नहीं कर सके।
सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर क्यों बैठे हैं?
वर्तमान आंदोलन में सोनम वांगचुक शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने पारदर्शिता, जवाबदेही और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई है। उनके समर्थन में कई सामाजिक संगठन और छात्र समूह भी जंतर-मंतर पर जुटे हैं।
उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए कई प्रमुख हस्तियों ने उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उनका वजन काफी कम हुआ है और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने भी दिखाई गंभीरता
सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की गई। अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा कि उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।
भारत के सबसे सफल भूख हड़ताल आंदोलन
भारत के इतिहास में कई भूख हड़तालों ने सरकारों को फैसले बदलने या बातचीत के लिए मजबूर किया।
महात्मा गांधी का अनशन
महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कई बार उपवास किया। उनके कई अनशन सामाजिक और राजनीतिक बदलाव का कारण बने और ब्रिटिश शासन पर नैतिक दबाव बना।
पोट्टी श्रीरामुलु का अनशन (1952)
आंध्र प्रदेश के गठन की मांग को लेकर पोट्टी श्रीरामुलु ने लंबा अनशन किया। उनके निधन के बाद देशभर में आंदोलन तेज हुआ और अंततः अलग आंध्र राज्य का गठन हुआ।
अन्ना हजारे का जनलोकपाल आंदोलन (2011)
दिल्ली के रामलीला मैदान में हुए अन्ना हजारे के अनशन ने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा दी। इसके बाद लोकपाल कानून बनाने की प्रक्रिया तेज हुई।
ऐसे अनशन जिन्हें पूरी सफलता नहीं मिली
भारत में कई लंबे अनशन ऐसे भी रहे, जिनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो सकीं।
इरोम शर्मिला
मणिपुर में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) हटाने की मांग को लेकर उन्होंने लगभग 16 वर्षों तक अनशन किया। हालांकि उनकी प्रमुख मांग पूरी नहीं हुई और बाद में उन्होंने अनशन समाप्त कर राजनीति में आने का निर्णय लिया।
कुछ अन्य आंदोलनों में भी सरकारों ने बातचीत की, लेकिन सभी मांगों को स्वीकार नहीं किया गया।
भूख हड़ताल का लोकतंत्र में क्या महत्व है?
भूख हड़ताल भारतीय लोकतंत्र में लंबे समय से अहिंसक विरोध का एक महत्वपूर्ण माध्यम रही है।
इसका उद्देश्य नैतिक दबाव बनाकर सरकार या प्रशासन का ध्यान किसी मुद्दे की ओर आकर्षित करना होता है।
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय तक भूखे रहने से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
इसलिए ऐसे आंदोलनों के दौरान चिकित्सकीय निगरानी और समय पर संवाद बेहद आवश्यक होता है।
क्या होगा आगे?
सोनम वांगचुक का आंदोलन अभी जारी है। सरकार की ओर से अब तक उनकी सभी मांगों पर
अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की गई है। इस बीच अदालत की निगरानी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और
बढ़ते सार्वजनिक समर्थन के कारण आने वाले दिनों में इस मामले में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।
निष्कर्ष
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल केवल एक व्यक्ति का विरोध नहीं, बल्कि उन मुद्दों पर
राष्ट्रीय बहस का विषय बन गई है जिन्हें वे उठा रहे हैं।
भारत के इतिहास में कई भूख हड़तालों ने बड़े बदलाव किए हैं, जबकि
कई आंदोलनों को आंशिक सफलता मिली। इस बार भी सबकी नजर इस बात पर है कि बातचीत,
न्यायिक प्रक्रिया और सरकारी निर्णय इस आंदोलन को किस दिशा में ले जाते हैं।
FAQ Schema
Q1. सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर क्यों बैठे हैं?
उत्तर: वे शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही और
सुधार की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
Q2. सोनम वांगचुक की तबीयत कैसी है?
उत्तर: मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उनका वजन काफी कम हुआ है और स्वास्थ्य लगातार चिंता का विषय बना हुआ है।
Q3. क्या कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप किया है?
उत्तर: हां, दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
Q4. भारत का सबसे चर्चित सफल भूख हड़ताल आंदोलन कौन-सा रहा?
उत्तर: महात्मा गांधी, पोट्टी श्रीरामुलु और अन्ना हजारे के अनशन भारत के सबसे प्रभावशाली आंदोलनों में गिने जाते हैं।
Q5. सबसे लंबे अनशन का उदाहरण कौन है?
उत्तर: इरोम शर्मिला ने AFSPA हटाने की मांग को लेकर लगभग 16 वर्षों तक अनशन किया था।
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