PM मोदी की बागी सांसदों
संसद के मानसून सत्र के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कुछ ऐसे सांसदों के साथ ब्रेकफास्ट मीटिंग की, जो हाल के राजनीतिक घटनाक्रम में अपने पुराने दलों से अलग होकर एनडीए के करीब आए हैं। बैठक में महाराष्ट्र की शिवसेना और एनसीपी से जुड़े सांसदों के साथ-साथ ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे के गुटों से अलग हुए सांसद भी शामिल रहे।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों को संसद की कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी करने, बहस की तैयारी बेहतर तरीके से करने और अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों के विकास कार्यों पर ध्यान देने की सलाह दी। रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम ने सांसदों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि उन्हें किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है और वह उनके साथ हैं।
‘चिंता की जरूरत नहीं, मैं आपके साथ हूं’
ब्रेकफास्ट मीटिंग का सबसे चर्चित संदेश प्रधानमंत्री मोदी का सांसदों को दिया गया भरोसा रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी को भी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है और वह उनके साथ हैं।
पीएम मोदी ने इस दौरान एनडीए को एक परिवार के रूप में बताया। राजनीतिक रूप से यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें ऐसे सांसद शामिल हुए जो हाल के दिनों में अपने पुराने राजनीतिक गुटों से अलग हुए हैं।
हालांकि, इस मुलाकात को लेकर आगे की राजनीतिक दिशा क्या होगी, इसका आकलन आने वाले दिनों में सांसदों की गतिविधियों और गठबंधन की रणनीति से ही स्पष्ट होगा।
शिवसेना के 6 सांसदों से अलग बैठक
रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने शिवसेना में हाल ही में शामिल हुए छह सांसदों के साथ अलग से भी बैठक की। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के विभिन्न गुटों के बीच राजनीतिक मतभेद लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं।
ब्रेकफास्ट बैठक के दौरान महाराष्ट्र से जुड़े सांसदों के साथ प्रधानमंत्री ने स्थानीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी बातचीत की। रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मोदी ने महाराष्ट्र के शिवसेना शिंदे गुट और एनसीपी अजित पवार गुट से जुड़े कई सांसदों के साथ मराठी भाषा में बातचीत की।
सांसदों को संसद की बहस में सक्रिय रहने की सलाह
प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों से संसद की डिबेट में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने को कहा। इसके साथ ही उन्होंने सांसदों को संसदीय इतिहास पढ़ने और संसद में उपलब्ध सामग्री का इस्तेमाल करने की सलाह दी।
पीएम मोदी के मुताबिक, संसद में इतिहास से संबंधित काफी सामग्री उपलब्ध है, जिसका इस्तेमाल सांसद अपनी बहस और तैयारी को मजबूत करने के लिए कर सकते हैं।
इस सलाह का उद्देश्य सांसदों को संसद की कार्यवाही में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने और मुद्दों पर तैयारी के साथ अपनी बात रखने के लिए प्रेरित करना बताया गया।
‘संसदीय इतिहास को पढ़ें, समझें और जानें’
बैठक में प्रधानमंत्री ने सांसदों से संसदीय इतिहास को समझने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि संसद में उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड और सामग्री से सांसदों को अपनी बहस की तैयारी में मदद मिल सकती है।
संसद में नए सांसदों के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि संसदीय बहस के दौरान किसी मुद्दे की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और पहले हुए निर्णयों की जानकारी उपयोगी होती है।
प्रधानमंत्री की इस सलाह को सांसदों की संसदीय भूमिका मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
राज्यों के विकास पर भी पीएम मोदी का फोकस
बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों से अपने-अपने राज्यों के विकास के लिए सक्रिय रूप से काम करने की अपील की।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब राज्य विकास करेंगे, तभी देश भी आगे बढ़ेगा। ऐसे में सांसदों को अपने संसदीय क्षेत्रों में चल रही विकास परियोजनाओं की निगरानी करने और स्थानीय समस्याओं को संबंधित स्तर पर उठाने की सलाह दी गई।
पीएम मोदी ने सांसदों से उनके क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों और परियोजनाओं के बारे में व्यक्तिगत रूप से भी जानकारी ली।
विकास परियोजनाओं में दिक्कत हो तो PMO से संपर्क करें
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों को विकास परियोजनाओं से जुड़ी किसी भी समस्या के
समाधान के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO से संपर्क करने की बात कही।
इसका मतलब यह है कि अगर किसी संसदीय क्षेत्र में किसी बड़ी परियोजना को लेकर प्रशासनिक,
समन्वय या अन्य स्तर पर अड़चन आती है, तो सांसद उसे PMO के संज्ञान में ला सकते हैं।
यह संदेश खास तौर पर उन सांसदों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो अपने क्षेत्रों में सड़क,
रेलवे, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार या अन्य विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
हर सांसद से व्यक्तिगत बातचीत
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में मौजूद सांसदों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की।
इस दौरान उन्होंने उनके संसदीय क्षेत्रों और वहां चल रहे विकास कार्यों के बारे में जानकारी ली।
इस तरह की व्यक्तिगत बातचीत के जरिए सांसदों के स्थानीय मुद्दों को सीधे सुनने और
उनकी प्राथमिकताओं को समझने का प्रयास किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत केवल राजनीतिक विषयों तक सीमित नहीं रही। प्रधानमंत्री ने
धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर से उनके योग अभ्यास के बारे में भी पूछा।
महाराष्ट्र के सांसदों से मराठी में संवाद
बैठक में महाराष्ट्र से जुड़े सांसदों के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने मराठी भाषा में भी बातचीत की।
रिपोर्ट के अनुसार, शिवसेना शिंदे गुट और एनसीपी अजित पवार गुट से जुड़े कई सांसदों के साथ मराठी में संवाद हुआ।
स्थानीय भाषा में बातचीत को सांसदों के साथ सहज संवाद
स्थापित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।
बैठक में महाराष्ट्र के राजनीतिक और विकास संबंधी मुद्दों पर भी बातचीत हुई।
एनडीए के भीतर राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से अहम बैठक
प्रधानमंत्री मोदी की यह बैठक ऐसे समय हुई है जब संसद में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और
विभिन्न दलों के बीच समीकरणों को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं।
ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे से अलग हुए सांसदों की
मौजूदगी तथा महाराष्ट्र के शिवसेना और एनसीपी गुटों से जुड़े
सांसदों के साथ बातचीत ने इस बैठक को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बना दिया है।
हालिया रिपोर्टों में एनसीपी से जुड़े कुछ सांसदों के
एनडीए की बैठकों से दूरी बनाने की खबरें भी सामने आई हैं।
ऐसे में प्रधानमंत्री की ओर से सांसदों के साथ सीधे संवाद को
गठबंधन के भीतर समन्वय बनाए रखने की कवायद के रूप में भी देखा जा रहा है।
संसद में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों से केवल अपने क्षेत्रों तक सीमित रहने के बजाय
संसद की बहस और कार्यवाही में भी सक्रिय भूमिका निभाने को कहा।
संसद में किसी मुद्दे पर प्रभावी तरीके से अपनी बात रखने के लिए विषय की जानकारी,
संसदीय नियमों की समझ और ऐतिहासिक संदर्भ जरूरी होते हैं। पीएम की ओर से संसदीय इतिहास और
उपलब्ध सामग्री का अध्ययन करने की सलाह इसी दिशा में महत्वपूर्ण है।
इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार चाहती है कि नए और
हाल में गठबंधन से जुड़े सांसद संसद में अपनी भूमिका को और मजबूत करें।
आने वाले समय में क्या होगा असर?
ब्रेकफास्ट मीटिंग के बाद अब नजर इस बात पर होगी कि
इन सांसदों की संसद में भूमिका किस तरह दिखाई देती है और
विकास परियोजनाओं को लेकर वे किस तरह केंद्र सरकार के साथ समन्वय करते हैं।
राजनीतिक तौर पर भी यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अलग-अलग दलों या गुटों से आए सांसद एनडीए के साथ
किस स्तर तक जुड़ते हैं और आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों में उनकी भूमिका क्या रहती है।
फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी की ओर से सांसदों को दिया गया संदेश स्पष्ट रूप से
संसद में सक्रिय भागीदारी और अपने क्षेत्रों के विकास पर केंद्रित रहा।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बागी और एनडीए के करीब आए सांसदों के साथ ब्रेकफास्ट
मीटिंग ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। बैठक में पीएम मोदी ने सांसदों को भरोसा देते हुए कहा कि
उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है और वह उनके साथ हैं।
इसके साथ ही उन्होंने संसद की बहस में सक्रिय हिस्सा लेने,
संसदीय इतिहास पढ़ने और अपने-अपने राज्यों व संसदीय क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।
विकास परियोजनाओं से जुड़ी समस्या आने पर PMO से संपर्क करने का संदेश भी बैठक के प्रमुख बिंदुओं में रहा।
प्रधानमंत्री ने सांसदों से व्यक्तिगत बातचीत कर उनके क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी ली।
अब इस बैठक का राजनीतिक और प्रशासनिक असर आने वाले दिनों में दिखाई देगा।
खास तौर पर महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से जुड़े सांसदों की भूमिका तथा एनडीए के भीतर समन्वय पर नजर रहेगी।
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