JPSC-JSSC छात्र आंदोलन
झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन लगातार चर्चा में बना हुआ है। राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनकारियों के बीच खाना-पानी उपलब्ध कराने को लेकर चर्चा में आए मोहम्मद जुनैद भी रांची पहुंच गए हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की और उनके आंदोलन को समर्थन देने की बात कही।
जुनैद का कहना है कि वह किसी राजनीतिक दल या सरकार के समर्थन अथवा विरोध के लिए रांची नहीं आए हैं, बल्कि जहां भी छात्रों के साथ अन्याय महसूस होगा, वहां उनकी आवाज के साथ खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों के बीच पहुंचे जुनैद
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन चल रहा है। इसी प्रदर्शन स्थल पर मोहम्मद जुनैद पहुंचे और छात्रों से बातचीत की। रिपोर्ट के मुताबिक, जुनैद यहां प्रदर्शनकारियों के बीच भोजन की व्यवस्था में सहयोग करते दिखाई दिए। उनके पहुंचने के बाद उनके वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आए।
जुनैद इससे पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था में सहयोग करने के कारण सुर्खियों में आए थे। अब रांची में भी उन्होंने छात्रों के बीच पहुंचकर इसी तरह सहयोग करने की बात कही है।
‘जगह बदली है, लेकिन छात्रों का गुस्सा वही है’
मोहम्मद जुनैद ने दिल्ली और रांची के छात्र आंदोलनों के बीच तुलना करते हुए कहा कि दोनों जगहों की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन छात्रों की नाराजगी और अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाने की भावना में समानता दिखाई देती है।
उनके मुताबिक, दिल्ली के जंतर-मंतर और रांची के प्रदर्शन स्थल में सबसे बड़ा अंतर माहौल और जगह का है। रांची का प्रदर्शन स्थल अपेक्षाकृत बड़ा होने के कारण छात्रों की संख्या बढ़ने पर भी भीड़ को जगह मिल रही है।
जुनैद ने यह भी बताया कि सुबह के समय प्रदर्शन स्थल पर अपेक्षाकृत कम भीड़ रहती है, लेकिन दिन बढ़ने के साथ छात्रों की संख्या बढ़ती जाती है। उनके अनुसार, रात के समय यहां करीब डेढ़ से दो हजार तक छात्र मौजूद हो सकते हैं।
रांची और दिल्ली के आंदोलन में क्या अंतर बताया?
मोहम्मद जुनैद ने बताया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के बीच एकजुटता उन्हें ज्यादा नजर आई थी, जबकि रांची में उन्हें अलग-अलग समूह दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, उन्होंने इस बारे में कोई अंतिम निष्कर्ष देने से इनकार किया और कहा कि वह अभी ज्यादा लोगों से बातचीत नहीं कर पाए हैं।
उनका कहना है कि रांची का आंदोलन अभी जारी है और इसे समझने के लिए प्रदर्शनकारियों की मांगों और आंदोलन की परिस्थितियों को और करीब से जानना जरूरी है।
‘जहां छात्रों के साथ अन्याय होगा, वहां जाऊंगा’
रांची आने के पीछे अपनी वजह बताते हुए जुनैद ने कहा कि उन्हें किसी व्यक्ति या संगठन ने बुलाकर यहां नहीं भेजा है। वह अपनी इच्छा से रांची पहुंचे हैं।
उन्होंने कहा कि जहां छात्रों के साथ अन्याय होगा, वहां वह अपनी क्षमता के अनुसार उनके साथ खड़े होने की कोशिश करेंगे। उनके मुताबिक, सरकार किसी भी राजनीतिक दल की हो, छात्रों के भविष्य से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब झारखंड में JPSC और JSSC से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्र लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
पेपर और भर्ती प्रक्रिया को लेकर जुनैद ने उठाए सवाल
मोहम्मद जुनैद ने छात्रों की परेशानियों का जिक्र करते हुए भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे आरोपों पर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि कई अभ्यर्थी वर्षों तक मेहनत करने के बावजूद नौकरी हासिल नहीं कर पाते।
हालांकि, भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पेपर से जुड़े आरोपों की वास्तविकता जांच और आधिकारिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकती है। इसलिए इन आरोपों को अभी आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
छात्रों की मुख्य मांगों में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई जैसी मांगें शामिल हैं।
खाने की व्यवस्था को लेकर उठे फंडिंग के सवाल
मोहम्मद जुनैद के रांची पहुंचने के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में आया कि प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन की व्यवस्था का खर्च कौन उठा रहा है।
इस सवाल पर जुनैद ने स्पष्ट किया कि वह अकेले पूरे भोजन का खर्च नहीं उठा रहे हैं। उनके मुताबिक, दिल्ली की तरह रांची में भी स्थानीय लोग अपनी तरफ से राशन, भोजन और अन्य मदद लेकर सामने आ रहे हैं।
जुनैद ने बताया कि उनका काम मुख्य रूप से स्थानीय लोगों और प्रदर्शनकारियों के बीच समन्वय बनाने का है।
वह खाना बनवाने, उसे प्रदर्शन स्थल तक पहुंचाने और फिर बांटने की व्यवस्था में तालमेल कराने में मदद कर रहे हैं।
‘एक अकेला आदमी हजारों लोगों का खाना कैसे कराएगा?’
फंडिंग से जुड़े सवालों पर जुनैद ने कहा कि सोशल मीडिया पर कई बार ऐसा चित्र पेश किया जाता है कि
वह अकेले ही हजारों प्रदर्शनकारियों के भोजन का पूरा खर्च उठा रहे हैं।
उन्होंने इस धारणा को गलत बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के लिए रोजाना भोजन की व्यवस्था
सामूहिक सहयोग से ही संभव है। उनके मुताबिक, स्थानीय लोग और
अन्य सहयोगी अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि रांची में जंतर-मंतर की तरह वेज बिरयानी भी प्रदर्शनकारियों के बीच बांटी जाएगी।
‘अकेला मैं नहीं बांट रहा खाना, हिंदू भाई भी सहयोग कर रहे’
मोहम्मद जुनैद ने रांची आंदोलन की एक और तस्वीर सामने रखते हुए कहा कि
भोजन बांटने में वह अकेले नहीं हैं। उनके मुताबिक, अलग-अलग समुदायों के लोग भी प्रदर्शनकारियों की मदद कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एक हिंदू व्यक्ति भी भगवा कपड़े पहनकर भोजन वितरण में
सहयोग कर रहा है। जुनैद ने इसे भारत की विविधता और एकता का उदाहरण बताया।
उनका कहना है कि धर्म और मान्यताएं अलग हो सकती हैं,
लेकिन छात्रों के मुद्दे पर लोग साथ खड़े हो सकते हैं।
जंतर-मंतर की पुरानी यादें भी साझा कीं
जुनैद ने दिल्ली के जंतर-मंतर आंदोलन के दिनों को याद करते हुए बताया कि वह शुरुआत में केवल
एक जोड़ी कपड़े लेकर वहां पहुंचे थे। कई दिनों तक उन्होंने प्रदर्शन स्थल पर रहकर छात्रों की मदद की।
उन्होंने बताया कि प्रदर्शन स्थल पर आम लोग भी अपने स्तर से चाय, इडली और
अन्य खाद्य सामग्री लेकर पहुंचते थे। बाद में स्वयंसेवी संस्थाएं और किसान भी
मदद के लिए आगे आए, जिससे भोजन-पानी की व्यवस्था को संभालना आसान हुआ।
JPSC-JSSC आंदोलन में बढ़ रहा समर्थन
रांची में JPSC-JSSC से जुड़े छात्र आंदोलन को लेकर पिछले दिनों प्रदर्शन लगातार तेज हुआ है।
रिपोर्टों के अनुसार, छात्र भर्ती परीक्षाओं में कथित
अनियमितताओं को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। आंदोलन के
दौरान भूख हड़ताल भी जारी रही और एक प्रदर्शनकारी की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल ले जाना पड़ा।
आंदोलन के बीच राजनीतिक स्तर पर भी मुद्दा उठ रहा है। झारखंड विधानसभा के
मानसून सत्र में भी JPSC-JSSC से जुड़े मुद्दे को लेकर हंगामा और प्रदर्शन देखने को मिला।
छात्रों की मांगों पर अब सरकार के रुख पर नजर
रांची में आंदोलन के बढ़ने के साथ अब सरकार और प्रशासन के रुख पर सबकी नजर है।
छात्रों की मांगों का समाधान किस तरह किया जाता है और भर्ती
परीक्षाओं से जुड़े आरोपों पर क्या कार्रवाई होती है, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगा।
मोहम्मद जुनैद के रांची पहुंचने से आंदोलन को एक नया सार्वजनिक चेहरा जरूर मिला है, लेकिन
आंदोलन की वास्तविक दिशा छात्रों की मांगों, प्रशासन की प्रतिक्रिया और सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों से तय होगी।
भाषा, धर्म और जाति से ऊपर छात्र मुद्दे की बात
मोहम्मद जुनैद ने कहा कि छात्रों की समस्याओं को भाषा, धर्म और जाति के आधार पर
नहीं बांटा जाना चाहिए। उनके अनुसार, यदि छात्र अपने भविष्य और भर्ती
प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं तो इस मुद्दे पर व्यापक एकजुटता होनी चाहिए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस तरह दिल्ली में छात्रों के आंदोलन को समर्थन मिला,
उसी तरह रांची में भी छात्रों की मांगों को सुना जाएगा।
निष्कर्ष: रांची में आंदोलन के बीच जुनैद की एंट्री से बढ़ी चर्चा
JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर रांची में जारी छात्र आंदोलन
अब लगातार सुर्खियों में है। इसी बीच मोहम्मद जुनैद का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचना और
प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच भोजन व्यवस्था में सहयोग करना चर्चा का विषय बन गया है।
जुनैद ने साफ किया है कि उनका उद्देश्य किसी सरकार के पक्ष या विपक्ष में खड़ा होना नहीं,
बल्कि छात्रों की आवाज के साथ खड़ा होना है। वहीं, छात्रों की ओर से भर्ती प्रक्रिया में
पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच जैसी मांगें उठाई जा रही हैं।
अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित
भर्ती आयोग छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं और
इस आंदोलन का आगे क्या स्वरूप सामने आता है। फिलहाल रांची का छात्र आंदोलन जारी है और
इसके साथ मोहम्मद जुनैद की मौजूदगी ने इस पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है।
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