इजरायल ने आठ हवाई हमले
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच इजरायल ने उत्तर-पश्चिमी सीरिया में स्थित अबू अल-दुहूर एयरबेस पर हवाई हमले किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक एयरबेस पर करीब आठ हवाई हमले किए गए, जिनमें रनवे और स्टोरेज क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
इजरायल ने हमले की वजह बताते हुए दावा किया कि सीरिया इस एयरबेस पर तुर्की की सैन्य तैनाती की अनुमति देने की तैयारी कर रहा था। इजरायल के मुताबिक ऐसी तैनाती क्षेत्र में उसके लिए सुरक्षा खतरा पैदा कर सकती थी। हालांकि तुर्की ने इस दावे को खारिज किया है और कहा है कि एयरबेस पर उसकी कोई सैन्य मौजूदगी नहीं थी।
अबू अल-दुहूर एयरबेस पर आठ हवाई हमले
मंगलवार को हुए हमलों में इजरायली विमानों ने सीरिया के इदलिब प्रांत में स्थित अबू अल-दुहूर एयरबेस को निशाना बनाया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार हमलों में एयरबेस के रनवे और भंडारण क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा है।
सीरियाई सरकारी मीडिया से मिली जानकारी में कहा गया कि हमले के दौरान एयरबेस को कई बार निशाना बनाया गया। शुरुआती रिपोर्टों में किसी नागरिक या सैन्यकर्मी के मारे जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
यह हमला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीरियाई सरकारी सैन्य ठिकाने पर मार्च के बाद इजरायल की पहली ऐसी कार्रवाई बताई जा रही है।
*इजरायल ने तुर्की की तैनाती को बताया वजह
इजरायल की ओर से कहा गया कि सीरिया और इजरायल के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बनी स्थिति को बदलने की कोशिश की जा रही थी। इजरायल का दावा है कि सीरिया अबू अल-दुहूर एयरबेस पर तुर्की सैनिकों को तैनात करने की दिशा में आगे बढ़ रहा था।
इजरायल ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए संभावित खतरा माना और इसी वजह से एयरबेस को निशाना बनाने की बात कही।
हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
*तुर्की ने इजरायल के दावे को नकारा
तुर्की ने इजरायल के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि एयरबेस पर तुर्की की कोई सैन्य मौजूदगी नहीं थी। अंकारा ने इजरायली हमले की आलोचना की और इसे सीरिया की संप्रभुता का उल्लंघन बताया।
तुर्की और इजरायल दोनों ही सीरिया में प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव पहले से मौजूद है। अब एयरबेस पर हुए हमले ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है।
*सीरिया ने भी जताया कड़ा विरोध
सीरिया ने इजरायल के हमले को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। सीरियाई विदेश मंत्री असद अल-शिबानी ने हमले की निंदा करते हुए इसे अनुचित उकसावे की कार्रवाई बताया।
सीरिया की ओर से संकेत दिया गया है कि वह इस तरह की कार्रवाई के खिलाफ कूटनीतिक स्तर पर अपना विरोध जारी रखेगा।
अमेरिका ने भी जताई चिंता
इस घटनाक्रम पर अमेरिका की ओर से भी चिंता व्यक्त की गई है। सीरिया के लिए अमेरिकी विशेष दूत टॉम बैरक ने एयरबेस पर इजरायली हमले को
क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अनावश्यक तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया।
अमेरिका अब तुर्की, इजरायल और सीरिया के बीच एक ऐसा संपर्क तंत्र विकसित करने की
कोशिश कर रहा है, जिससे भविष्य में सैन्य गतिविधियों को लेकर गलतफहमी या सीधा टकराव रोका जा सके।
तुर्की और इजरायल के बीच बढ़ सकता है तनाव
सीरिया में तुर्की की बढ़ती सैन्य और राजनीतिक भूमिका इजरायल के लिए चिंता का
विषय बनती जा रही है। तुर्की सीरिया की नई सरकार के साथ करीबी संबंध बनाए हुए है और
उसके सैन्य ढांचे को मजबूत करने में भी सहयोग कर रहा है।
दूसरी ओर इजरायल सीरिया में अपने सुरक्षा हितों को लेकर लगातार सतर्क है। ऐसे में किसी सीरियाई
सैन्य ठिकाने पर तुर्की की संभावित तैनाती दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा सकती है।
एयरबेस काफी समय से सक्रिय नहीं था
अबू अल-दुहूर एयरबेस सीरिया के इदलिब क्षेत्र में स्थित है।
लंबे समय से चले गृहयुद्ध के दौरान यह एयरबेस बुरी तरह
प्रभावित हुआ था और कई वर्षों से नियमित सैन्य गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं हो रहा था।
इसी वजह से इस ठिकाने पर संभावित नए सैन्य इस्तेमाल को लेकर क्षेत्रीय शक्तियों की नजर बनी हुई थी।
हालिया हमले ने इस एयरबेस को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
सीरिया में आमने-सामने आने का खतरा
सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि सीरिया में इजरायल और तुर्की की गतिविधियां भविष्य में
सीधे टकराव की स्थिति पैदा कर सकती हैं। दोनों देशों की सैन्य गतिविधियां एक-दूसरे के करीब आने से किसी
गलत आकलन या अचानक हुई घटना का खतरा बढ़ गया है।
अमेरिका द्वारा तीनों देशों के बीच सैन्य संपर्क व्यवस्था स्थापित करने की
कोशिश इसी जोखिम को कम करने के उद्देश्य से की जा रही है।
क्षेत्रीय तनाव के बीच बड़ा घटनाक्रम
पश्चिम एशिया पहले से ही कई मोर्चों पर तनाव का सामना कर रहा है। ऐसे समय में
सीरिया के सैन्य ठिकाने पर इजरायली हमला और उसमें तुर्की की संभावित सैन्य
तैनाती का मुद्दा सामने आना क्षेत्रीय समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
यदि तुर्की सीरिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाता है और इजरायल इसे अपनी सुरक्षा के लिए
खतरा मानता है, तो आने वाले समय में दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि तुर्की सीरिया में अपनी सैन्य
भूमिका को किस स्तर तक बढ़ाता है और इजरायल इस पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।
वहीं अमेरिका की कोशिश दोनों देशों के बीच सीधे टकराव को रोकने की है।
अबू अल-दुहूर एयरबेस पर हमले के बाद स्थिति संवेदनशील हो गई है। हालांकि अभी
किसी बड़े सैन्य टकराव की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सीरिया में तुर्की और इजरायल की बढ़ती
गतिविधियों के कारण क्षेत्रीय तनाव पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
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