Ayushman Card Complaint
नई दिल्ली: आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है। लेकिन अगर आपके पास आयुष्मान कार्ड है और इसके बावजूद अस्पताल इलाज करने से मना कर देता है, तो आपको परेशान होकर अस्पताल से लौटने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में सरकार के सामने शिकायत दर्ज कराने के लिए ऑनलाइन और फोन, दोनों विकल्प मौजूद हैं।
केंद्र सरकार के अनुसार, योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पताल किसी पात्र लाभार्थी को इलाज देने से मना नहीं कर सकते। इलाज से इनकार या योजना के लाभ में किसी तरह की अनियमितता होने पर लाभार्थी शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके लिए CGRMS यानी Centralized Grievance Redressal Management System और 24×7 टोल-फ्री हेल्पलाइन 14555 उपलब्ध हैं।
इसलिए अगर अस्पताल आयुष्मान कार्ड स्वीकार नहीं करता, इलाज के लिए अनावश्यक पैसे मांगता है या बिना उचित कारण इलाज से इनकार करता है, तो शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया जानना बेहद जरूरी है।
आयुष्मान कार्ड होने पर अस्पताल इलाज से मना करे तो सबसे पहले क्या करें?
अस्पताल में विवाद बढ़ाने के बजाय सबसे पहले पूरे मामले का रिकॉर्ड सुरक्षित करें। अस्पताल प्रशासन से पूछें कि आयुष्मान कार्ड के तहत इलाज क्यों नहीं दिया जा रहा है। संभव हो तो अस्पताल से इलाज से इनकार करने का कारण लिखित में मांगें।
इसके बाद जिस डॉक्टर या कर्मचारी ने इलाज से मना किया है, उसका नाम, तारीख और समय नोट कर लें। मरीज के डॉक्टर के पर्चे, जांच रिपोर्ट, अस्पताल की पर्ची, भर्ती से जुड़े दस्तावेज और आयुष्मान कार्ड की जानकारी सुरक्षित रखें।
अगर अस्पताल ने इलाज के लिए पैसे जमा कराए हैं या कोई भुगतान लिया है, तो उसकी रसीद और बिल जरूर संभालकर रखें। शिकायत करते समय अस्पताल का नाम, ब्रांच, शहर और संबंधित विभाग की जानकारी भी काम आएगी।
मोबाइल से ऑनलाइन शिकायत कैसे करें?
आयुष्मान कार्ड से जुड़ी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करने के लिए लाभार्थी CGRMS PMJAY पोर्टल का इस्तेमाल कर सकता है।
ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के स्टेप
1. सबसे पहले आधिकारिक शिकायत पोर्टल पर जाएं।
2. होमपेज पर Register Your Grievance विकल्प को चुनें।
3. योजना के विकल्प में PMJAY चुनें।
4. अब अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर और आयुष्मान कार्ड से संबंधित आवश्यक जानकारी भरें।
5. शिकायत की कैटेगरी में Hospital विकल्प चुनें।
6. जिस अस्पताल ने इलाज से इनकार किया है, उसका नाम और संबंधित जानकारी दर्ज करें।
7. शिकायत के विवरण वाले बॉक्स में पूरी घटना स्पष्ट रूप से लिखें। इसमें यह बताएं कि इलाज कब और क्यों रोका गया, अस्पताल के किस डॉक्टर या कर्मचारी ने मना किया और क्या आपसे पैसे मांगे गए।
8. अस्पताल की पर्ची, डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन, टेस्ट रिपोर्ट, लिखित रिजेक्शन, बिल या भुगतान की रसीद जैसे उपलब्ध दस्तावेज अपलोड करें।
9. शिकायत सबमिट करने के बाद मिलने वाला शिकायत नंबर सुरक्षित रख लें।
10. इसी नंबर की मदद से आगे शिकायत की स्थिति ट्रैक की जा सकती है।
इंटरनेट नहीं है तो 14555 पर करें शिकायत
अगर आपके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है, तब भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। इसके लिए आयुष्मान भारत की टोल-फ्री हेल्पलाइन 14555 पर कॉल करें। कॉल के दौरान IVR निर्देशों के अनुसार भाषा चुनकर कस्टमर केयर प्रतिनिधि से बात की जा सकती है।
कॉल करते समय मरीज का नाम, आयुष्मान कार्ड नंबर और अस्पताल की पूरी जानकारी तैयार रखें। अस्पताल का नाम, शहर, ब्रांच और इलाज से इनकार किए जाने की तारीख बतानी होगी।
अगर अस्पताल ने पैसे मांगे या भुगतान लिया है तो इसकी जानकारी भी शिकायत दर्ज करते समय दें। यदि आपके पास बिल या रसीद है, तो उसे सुरक्षित रखें।
कॉल के बाद मिलने वाला शिकायत नंबर भी नोट करना जरूरी है, क्योंकि इसी के आधार पर शिकायत की स्थिति के बारे में आगे जानकारी ली जा सकती है।
सूचीबद्ध अस्पतालों के लिए क्या नियम हैं?
केंद्र सरकार की मार्च 2026 की जानकारी के मुताबिक, AB-PMJAY के तहत सूचीबद्ध अस्पताल पात्र लाभार्थियों को इलाज से इनकार नहीं कर सकते। इलाज से इनकार या योजना के लाभ में अनियमितता की शिकायत CGRMS या 14555 के जरिए दर्ज की जा सकती है। शिकायतों की निगरानी जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की तीन-स्तरीय व्यवस्था के माध्यम से की जाती है।
28 फरवरी 2026 तक देश में योजना के तहत 36,229 अस्पताल सूचीबद्ध थे, जिनमें सरकारी और निजी दोनों अस्पताल शामिल हैं। इससे बड़ी संख्या में पात्र लाभार्थियों को योजना के नेटवर्क के जरिए इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
शिकायत करते समय इन गलतियों से बचें
आयुष्मान कार्ड से इलाज न मिलने पर शिकायत करते समय केवल मौखिक आरोप लगाने के बजाय दस्तावेज और तथ्य सुरक्षित रखना बेहतर है। अस्पताल का नाम और पता सही लिखें। इलाज से इनकार करने वाले कर्मचारी या डॉक्टर का नाम उपलब्ध हो तो उसे दर्ज करें।
अगर पैसे मांगे गए हैं तो कितनी रकम मांगी गई, कब मांगी गई और भुगतान हुआ या नहीं—इन सभी बातों की जानकारी शिकायत में दें। भुगतान किया है तो बिल या रसीद जरूर रखें।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिकायत नंबर को संभालकर रखें। बाद में शिकायत की स्थिति जानने या मामले को आगे बढ़ाने में यही नंबर उपयोगी हो सकता है।
उत्तर प्रदेश के लाभार्थियों के लिए हेल्पलाइन
उत्तर प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी राष्ट्रीय हेल्पलाइन 14555 के अलावा राज्य की समर्पित हेल्पलाइन 1800 1800 4444 पर भी संपर्क कर सकते हैं।
इसलिए अगर किसी सूचीबद्ध अस्पताल में आयुष्मान कार्ड के बावजूद इलाज में परेशानी आ रही है, तो लाभार्थी पहले अस्पताल के आयुष्मान/संबंधित सहायता डेस्क से बात कर सकता है और जरूरत पड़ने पर शिकायत दर्ज कर सकता है।
क्या आयुष्मान कार्ड का मतलब हर इलाज मुफ्त है?
यह समझना भी जरूरी है कि आयुष्मान कार्ड होने का अर्थ यह नहीं है कि हर
अस्पताल में हर तरह का इलाज स्वतः मुफ्त हो जाता है। योजना का लाभ पात्रता,
अस्पताल के सूचीबद्ध होने और संबंधित उपचार/पैकेज के कवरेज के अनुसार मिलता है।
इसलिए शिकायत करने से पहले यह सुनिश्चित करना उपयोगी है कि
अस्पताल योजना के तहत सूचीबद्ध है और जिस उपचार की जरूरत है वह योजना के दायरे में आता है।
आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए जरूरी जानकारी
आयुष्मान कार्ड को केवल बनवाकर रखना पर्याप्त नहीं है। लाभार्थियों को यह भी पता होना चाहिए कि
अस्पताल में समस्या आने पर किससे संपर्क करना है। इलाज से
इनकार होने पर अस्पताल से कारण पूछना, दस्तावेज सुरक्षित रखना और
जरूरत पड़ने पर सरकारी शिकायत प्रणाली का इस्तेमाल करना सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं।
सरकार की ओर से उपलब्ध शिकायत व्यवस्था का उद्देश्य योजना के लाभार्थियों की शिकायतों को संबंधित
अधिकारियों तक पहुंचाना और अनियमितताओं पर कार्रवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।
इसलिए यदि किसी पात्र लाभार्थी को सूचीबद्ध अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत मिलने वाली सुविधा से
वंचित किया जाता है, तो वह चुप रहने के बजाय निर्धारित शिकायत व्यवस्था का इस्तेमाल कर सकता है।
FAQ
1. आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अस्पताल इलाज से मना करे तो क्या करें?
सबसे पहले अस्पताल से इलाज से इनकार करने का कारण लिखित में मांगें और संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखें।
इसके बाद CGRMS पोर्टल या 14555 हेल्पलाइन के जरिए शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
2. आयुष्मान कार्ड की शिकायत के लिए कौन सा नंबर है?
राष्ट्रीय स्तर पर आयुष्मान भारत की शिकायत और सहायता के लिए 14555 टोल-फ्री हेल्पलाइन उपलब्ध है।
3. आयुष्मान कार्ड की ऑनलाइन शिकायत कैसे करें?
CGRMS PMJAY पोर्टल पर जाकर Register Your Grievance विकल्प चुनें, PMJAY योजना का चयन करें,
अस्पताल की जानकारी और शिकायत का विवरण भरें तथा उपलब्ध दस्तावेज अपलोड करें।
4. शिकायत करने के लिए कौन से दस्तावेज रखने चाहिए?
आयुष्मान कार्ड की जानकारी, मरीज के पहचान संबंधी दस्तावेज, अस्पताल की पर्ची, डॉक्टर का पर्चा, टेस्ट रिपोर्ट,
इलाज से इनकार का लिखित कारण और भुगतान की रसीद या बिल उपयोगी हो सकते हैं।
5. क्या शिकायत करने के बाद शिकायत नंबर मिलता है?
हां, ऑनलाइन शिकायत सबमिट करने के बाद शिकायत नंबर मिलता है।
इसे सुरक्षित रखने से शिकायत का स्टेटस आगे ट्रैक करने में मदद मिलती है।
6. क्या उत्तर प्रदेश में आयुष्मान योजना की अलग हेल्पलाइन है?
हां। उत्तर प्रदेश की आधिकारिक आयुष्मान भारत वेबसाइट के अनुसार राष्ट्रीय हेल्पलाइन
14555 के साथ राज्य की समर्पित हेल्पलाइन 1800 1800 4444 भी उपलब्ध है।
7. क्या हर अस्पताल में आयुष्मान कार्ड से मुफ्त इलाज मिलता है?
नहीं। योजना का लाभ पात्र लाभार्थियों को सूचीबद्ध अस्पतालों और योजना के अंतर्गत आने वाले उपचार/पैकेज के
अनुसार मिलता है। इसलिए अस्पताल और उपचार की पात्रता की जांच करना जरूरी है।
8. क्या सूचीबद्ध अस्पताल पात्र मरीज को इलाज से मना कर सकता है?
केंद्र सरकार के अनुसार AB-PMJAY के तहत सूचीबद्ध अस्पताल पात्र लाभार्थियों को
इलाज से इनकार नहीं कर सकते। ऐसी स्थिति में CGRMS या 14555 के जरिए शिकायत की जा सकती है।
9. अगर अस्पताल ने इलाज के लिए पैसे मांगे तो क्या करें?
पैसे मांगने की घटना का रिकॉर्ड रखें और यदि भुगतान किया है तो बिल/रसीद सुरक्षित रखें।
शिकायत में अस्पताल, रकम, तारीख और घटना का पूरा विवरण दें।
10. आयुष्मान कार्ड से जुड़ी शिकायत का समाधान कौन करता है?
शिकायतों के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तीन-स्तरीय शिकायत निवारण व्यवस्था मौजूद है।
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