झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं
रांची। झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर कई दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन अब खत्म हो गया है। सरकार की ओर से छात्रों की प्रमुख मांगों पर कार्रवाई किए जाने के बाद प्रदर्शनकारी संगठनों ने आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया है। हालांकि, आंदोलन से जुड़े एक अन्य छात्र गुट की बैठक और आगे की रणनीति पर चर्चा जारी रहने की जानकारी सामने आई है।
सरकार के फैसले के बाद आंदोलन समाप्त
रांची में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लंबे समय से चल रहा था। छात्र JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच, विवादित परीक्षाओं को रद्द करने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे थे।
सरकार ने 17 अगस्त को बड़ा फैसला लेते हुए JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की घोषणा की। इसके साथ ही आउटसोर्स एजेंसी TSR Data Processing Pvt Ltd (TDPL) से जुड़ी परीक्षाओं, प्रकाशित परिणामों और चयन प्रक्रिया की भी जांच और कार्रवाई का निर्णय लिया गया।
सरकार ने वर्ष 2014 से अब तक हुई भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की व्यापक जांच कराने की बात भी कही है।
44 भर्ती परीक्षाएं रद्द
सरकार ने इसके बाद कुल 44 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की सूची जारी की। इसमें JPSC तथा TDPL के माध्यम से आयोजित विभिन्न परीक्षाएं शामिल हैं। इन परीक्षाओं में कई प्रशासनिक, तकनीकी और अन्य सरकारी पदों से संबंधित भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं।
रद्द की गई परीक्षाओं में डिप्टी कलेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट इंजीनियर, सिविल जज, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर और अन्य पदों से जुड़ी परीक्षाएं शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
छात्रों की बड़ी मांगों पर सरकार ने किया फैसला
छात्र आंदोलन की प्रमुख मांगों में भर्ती परीक्षाओं की कथित गड़बड़ियों की जांच और विवादित परीक्षाओं को रद्द करना शामिल था।
सरकार ने JSSC-CGL को रद्द करने के साथ-साथ वर्ष 2014 से हुई भर्ती परीक्षाओं की जांच का आदेश दिया। इसके अलावा परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। समिति को भर्ती व्यवस्था में सुधार के सुझाव देने हैं।
परीक्षा व्यवस्था में सुधार की तैयारी
सरकार अब JPSC और JSSC की परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाने की तैयारी कर रही है। दोनों आयोगों में आंतरिक सतर्कता व्यवस्था मजबूत करने की योजना भी सामने आई है।
सरकार ने परीक्षा संबंधी अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट से फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने का अनुरोध करने की बात कही है।
छात्रों में खुशी का माहौल
सरकार के फैसले के बाद रांची में आंदोलनकारी छात्रों और छात्राओं के बीच खुशी का माहौल देखने को मिला। कई छात्राओं ने लोकगीतों के जरिए अपनी खुशी जाहिर की और भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चलाए गए आंदोलन को याद किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल परीक्षाएं रद्द कराने तक सीमित नहीं था, बल्कि वे सरकारी भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की मांग कर रहे थे।
आंदोलन खत्म, लेकिन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं
हालांकि एक तरफ आंदोलनकारी छात्रों ने प्रदर्शन समाप्त करने का फैसला लिया है,
वहीं दूसरी तरफ JSSC-CGL के जरिए पहले से चयनित अभ्यर्थियों ने परीक्षा रद्द किए जाने पर आपत्ति जताई है।
करीब 2,000 नियुक्त अभ्यर्थियों ने रांची में प्रदर्शन किया और कहा कि
यदि परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो
उसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन सभी चयनित अभ्यर्थियों को दोषी नहीं माना जाना चाहिए।
कुछ नियुक्त अभ्यर्थियों ने कानूनी रास्ता अपनाने की बात भी कही है।
CBI जांच की मांग का क्या हुआ?
छात्र आंदोलन के दौरान CBI जांच की मांग भी प्रमुख रही थी। पहले सरकार और छात्रों के बीच बातचीत
कई दौर तक बेनतीजा रही थी क्योंकि छात्रों का एक वर्ग CBI जांच की मांग पर अड़ा हुआ था।
सरकार द्वारा परीक्षाएं रद्द करने और व्यापक जांच की घोषणा के
बाद आंदोलन समाप्त करने का फैसला सामने आया है।
हालांकि CBI जांच को लेकर अलग-अलग छात्र समूहों की राय अभी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
सरकार के सामने अब बड़ी चुनौती
परीक्षाएं रद्द करने के बाद सरकार के सामने अब नई भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से
आयोजित करने की चुनौती होगी। हजारों अभ्यर्थी वर्षों से
सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में नई परीक्षा प्रक्रिया, समयसीमा और
पुरानी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर कई सवालों का जवाब देना होगा।
वहीं, पहले से नियुक्त JSSC-CGL अभ्यर्थियों की ओर से विरोध शुरू होने के बाद
सरकार के सामने एक नया पक्ष भी खड़ा हो गया है।
जांच में सामने आए तथ्यों पर रहेगी नजर
सरकार ने संकेत दिया है कि जांच एजेंसियों की पड़ताल में
भर्ती परीक्षाओं से जुड़े कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं।
इसी आधार पर वर्ष 2014 से अब तक की परीक्षाओं की व्यापक जांच का फैसला लिया गया है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में किन लोगों की भूमिका सामने आती है और
दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई होती है।
निष्कर्ष
झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चला
छात्र आंदोलन फिलहाल समाप्त हो गया है। सरकार द्वारा JSSC-CGL समेत कई भर्ती परीक्षाएं रद्द करने,
पुरानी परीक्षाओं की जांच कराने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए
समिति गठित करने के बाद प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन खत्म करने का फैसला लिया है।
हालांकि, चयनित JSSC-CGL अभ्यर्थियों के विरोध और कानूनी चुनौती की संभावना के चलते
यह मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में सरकार की जांच,
नई भर्ती प्रक्रिया और अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर होने वाले फैसले बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
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