यूपी में भारी बारिश से चित्रकूट में
उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश ने कई जिलों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। मध्य प्रदेश और पहाड़ी क्षेत्रों में हुई भारी बारिश का असर अब यूपी के कई हिस्सों में दिखाई दे रहा है। नदियों का जलस्तर बढ़ने से चित्रकूट में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं, जबकि प्रयागराज में गंगा और यमुना के बढ़ते पानी ने निचले इलाकों के लिए चिंता बढ़ा दी है।
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान ने सबसे ज्यादा परेशानी खड़ी की है। रामघाट और आसपास के इलाके पानी में डूब गए हैं। करीब 800 दुकानें बाढ़ की चपेट में आ गई हैं। कई परिवार और श्रद्धालु प्रभावित इलाकों में फंस गए, जिन्हें प्रशासन और राहत-बचाव दलों ने सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का अभियान शुरू किया। दूसरी तरफ रेलवे ट्रैक को भी नुकसान पहुंचने की सूचना है, जिससे रेल परिचालन प्रभावित हुआ है।
चित्रकूट में मंदाकिनी ने बदले हालात
शनिवार को मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा। पानी का बहाव इतना तेज हुआ कि चित्रकूट शहर के कई निचले हिस्से जलमग्न हो गए। रामघाट, आरोग्य धाम और आसपास के क्षेत्र में पानी भरने से सामान्य गतिविधियां ठप हो गईं।
झांसी-मिर्जापुर हाईवे पर कर्वी को जोड़ने वाले पुल के पास भी पानी पहुंच गया। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने पुल पर यातायात रोक दिया। इससे चित्रकूट से कानपुर, प्रयागराज, बांदा और हमीरपुर समेत कई दिशाओं में आने-जाने वाले लोगों को परेशानी हुई। रिपोर्ट के मुताबिक हाईवे बंद होने के कारण हजारों राहगीर रास्ते में फंस गए।
बाढ़ का असर केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहा। रामघाट के आसपास व्यापारिक प्रतिष्ठानों में पानी घुस गया और दुकानदारों को अपना सामान सुरक्षित जगहों पर ले जाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।
रामघाट की करीब 800 दुकानें पानी में डूबीं
चित्रकूट के प्रसिद्ध रामघाट इलाके में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला। मंदाकिनी का पानी बढ़ने के बाद घाट के आसपास स्थित करीब 800 दुकानें पानी में डूब गईं।
स्थानीय व्यापारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने सामान को बचाने की रही। कई दुकानदारों ने जरूरी सामान ऊंचे स्थानों पर पहुंचाया, जबकि कुछ लोग अपने घरों और दुकानों में फंसे रहे।
बाढ़ के कारण श्रद्धालुओं की आवाजाही भी प्रभावित हुई। चित्रकूट आने वाले कई लोग होटलों में फंस गए और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए प्रशासन को रेस्क्यू अभियान चलाना पड़ा। कुछ लोगों ने खिड़कियों और छतों से मदद की अपील की।
10 से 15 हजार यात्रियों पर पड़ा असर
चित्रकूट में मुख्य मार्गों के बंद होने से बड़ी संख्या में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार हाईवे पर आवाजाही बाधित होने के कारण करीब 10 से 15 हजार राहगीर रास्ते में फंस गए।
कानपुर, प्रयागराज, बांदा और हमीरपुर की ओर जाने वाले लोगों के लिए स्थिति ज्यादा मुश्किल रही। प्रशासन ने संवेदनशील रास्तों पर आवागमन रोककर लोगों को सुरक्षित रखने की कोशिश की।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए चित्रकूट-बांदा मार्ग को भी बंद किया गया। सतना की ओर जाने वाले रास्ते पर भी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। इसके अलावा मानिकपुर-सतना मार्ग पर स्थित कारी बराह पुल के क्षतिग्रस्त होने से आवागमन प्रभावित हुआ।
रेलवे ट्रैक धंसने से ट्रेनों पर असर
भारी बारिश और जलभराव का असर रेलवे व्यवस्था पर भी पड़ा है। चित्रकूट क्षेत्र में रेलवे ट्रैक धंसने की सूचना सामने आई है। इससे रेल यातायात प्रभावित हुआ और यात्रियों को अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ी।
बारिश के दौरान रेलवे ट्रैक की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि मिट्टी के कमजोर होने या पानी के दबाव से पटरी के नीचे का हिस्सा प्रभावित हो सकता है। ऐसे में रेलवे और स्थानीय प्रशासन की ओर से प्रभावित हिस्सों की निगरानी और आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं।
होटल और घरों में फंसे लोगों का रेस्क्यू
चित्रकूट में बाढ़ बढ़ने के साथ कई लोग ऐसे स्थानों पर फंस गए जहां से बाहर निकलना मुश्किल था।
इनमें श्रद्धालु और स्थानीय लोग दोनों शामिल रहे।
कुछ होटल में ठहरे लोगों ने ऊपरी मंजिलों और छतों से वीडियो बनाकर मदद मांगी।
इसके बाद राहत दलों ने अभियान चलाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना शुरू किया।
गोबरिया क्षेत्र में भी करीब 50 लोगों को सुरक्षित निकालने की जानकारी सामने आई है।
राहत और बचाव अभियान में प्रशासन के साथ सुरक्षाकर्मी और आपदा राहत दल जुटे रहे।
प्रयागराज में गंगा-यमुना का बढ़ता जलस्तर
चित्रकूट के साथ प्रयागराज में भी नदियों का जलस्तर बढ़ने से चिंता बढ़ी है।
गंगा और यमुना दोनों नदियां उफान पर हैं। संगम क्षेत्र में पानी तेजी से बढ़ने के कारण निचले हिस्सों पर असर पड़ रहा है।
संगम क्षेत्र स्थित हनुमान जी मंदिर के मुख्य द्वार और
कॉरिडोर की दीवारों तक पानी पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
ऐसे में प्रशासन की नजर नदी के जलस्तर और आसपास के निचले इलाकों पर बनी हुई है।
प्रयागराज में पहले भी गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ का खतरा सामने आ चुका है।
फिलहाल लगातार निगरानी जरूरी है, क्योंकि ऊपरी क्षेत्रों में होने वाली बारिश और
नदियों में आने वाला अतिरिक्त पानी हालात को तेजी से बदल सकता है।
मुख्यमंत्री योगी ने किया हवाई सर्वेक्षण
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने
प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। सरकार की ओर से प्रशासनिक
अधिकारियों को राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
ऐसी परिस्थितियों में प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, प्रभावित इलाकों में
जरूरी सामान पहुंचाने और सड़क व अन्य संपर्क मार्गों को बहाल करने की होती है।
प्रशासन की टीमें संवेदनशील इलाकों में लगातार स्थिति का आकलन कर रही हैं।
जहां जरूरत पड़ रही है, वहां लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
मध्य प्रदेश और पहाड़ी क्षेत्रों की बारिश का असर
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने के पीछे मध्य प्रदेश और आसपास के
पहाड़ी इलाकों में हुई भारी बारिश का भी असर बताया जा रहा है। बारिश के बाद नदियों और
जलस्रोतों में तेजी से पानी बढ़ा, जिसका दबाव निचले इलाकों पर पड़ा।
मंदाकिनी के बढ़ते जलस्तर से चित्रकूट में पहले भी बाढ़ जैसी स्थिति बनती रही है।
इस बार पानी का बहाव तेज होने के कारण घाट, दुकानें, सड़कें और संपर्क मार्ग प्रभावित हुए हैं।
पड़ोसी मध्य प्रदेश के सतना और चित्रकूट क्षेत्र में भी भारी बारिश के कारण गंभीर जलभराव और बाढ़
जैसे हालात की खबरें सामने आई हैं। कुछ क्षेत्रों में नदी का जलस्तर सामान्य से काफी ऊपर पहुंचा है।
किसानों और कारोबारियों की बढ़ी चिंता
बाढ़ और जलभराव का सबसे सीधा असर स्थानीय कारोबार और खेती पर पड़ता है।
चित्रकूट में दुकानों के डूबने से व्यापारियों को
आर्थिक नुकसान की आशंका है। जिन दुकानों में सामान पानी में डूब गया,
उनके सामने कारोबार दोबारा शुरू करने की चुनौती होगी।
ग्रामीण इलाकों में खेतों में पानी भरने से फसलों को भी नुकसान हो सकता है।
लगातार बारिश के कारण मिट्टी में अत्यधिक नमी और जलभराव खेती के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
प्रशासन के सामने अब राहत पहुंचाने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के नुकसान का आकलन करने की चुनौती भी होगी।
फिलहाल राहत और बचाव पर फोकस
यूपी के कई हिस्सों में बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच प्रशासन की
प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित रखना है। चित्रकूट में जहां बड़ी संख्या में दुकानें और सड़कें प्रभावित हुई हैं,
वहीं प्रयागराज में गंगा-यमुना की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने और
प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की जरूरत है।
नदी के किनारे या जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से जाने से बचना जरूरी है।
फिलहाल चित्रकूट की मंदाकिनी और प्रयागराज की गंगा-यमुना पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।
आने वाले घंटों में बारिश और जलस्तर की स्थिति तय करेगी कि
बाढ़ का असर और बढ़ता है या पानी उतरना शुरू होता है।
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