RSS प्रमुख मोहन भागवत
RSS Chief Mohan Bhagwat: अमेरिका दौरे पर पहुंचे RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के ISKCON मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने कहा कि दुनिया में मतभेद और टकराव के बीच एक ऐसी चेतना की जरूरत है जो लोगों को एक-दूसरे से जोड़ सके। भागवत ने कृष्ण चेतना को इसी एकता का माध्यम बताया।
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत इन दिनों अमेरिका के दौरे पर हैं। संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर चल रहे वैश्विक संपर्क कार्यक्रम के तहत उनका न्यूयॉर्क दौरा काफी चर्चा में है। इसी दौरान उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित ISKCON मंदिर पहुंचकर भगवान कृष्ण के दर्शन किए और वहां मौजूद लोगों को एकता तथा सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया।
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में दुनिया में बढ़ते मतभेद, संघर्ष और विभिन्न प्रकार के विरोधाभासों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग विचारों और परिस्थितियों के बावजूद लोगों को जोड़ने वाली एक साझा चेतना जरूरी है। उनके मुताबिक कृष्ण चेतना मनुष्य को यह समझने की प्रेरणा देती है कि मूल रूप से सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
कृष्ण चेतना को बताया एकता का माध्यम
ISKCON मंदिर में बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया में अलग-अलग प्रकार के संघर्ष मौजूद हैं। लोगों की भाषा, विचार, संस्कृति और जीवन जीने के तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन एक ऐसी चेतना है जो इन विविधताओं के बीच संबंध स्थापित कर सकती है।
उन्होंने कृष्ण चेतना को इसी भावना से जोड़ते हुए कहा कि यदि लोगों के भीतर यह समझ विकसित हो जाए कि पूरी मानवता एक व्यापक परिवार का हिस्सा है, तो समाज में टकराव कम किया जा सकता है।
भागवत के संदेश का केंद्र आध्यात्मिक एकता और आपसी जुड़ाव रहा। उन्होंने यह विचार रखा कि केवल बाहरी समानता जरूरी नहीं है, बल्कि लोगों के भीतर एक-दूसरे के प्रति जुड़ाव और साझा उद्देश्य की भावना पैदा होना अधिक महत्वपूर्ण है।
‘सब कुछ कृष्ण’ की भावना से बेहतर हो सकती है दुनिया
मोहन भागवत ने अपने विचार को समझाते हुए कहा कि दुनिया में विविधता स्वाभाविक है। अलग-अलग लोग अलग-अलग तरीके से काम करते हैं और उनके दायित्व भी अलग हो सकते हैं। इसके बावजूद किसी बड़े उद्देश्य के लिए सभी के बीच समन्वय संभव है।
उन्होंने इसके लिए एक संगठन और कंपनी का उदाहरण दिया। उनके अनुसार किसी संस्था में मालिक, अधिकारी और कर्मचारी की भूमिकाएं अलग होती हैं, लेकिन यदि सभी को अपने साझा लक्ष्य की जानकारी हो तो पूरी व्यवस्था अधिक प्रभावी ढंग से काम करती है।
इसी तरह समाज और दुनिया में भी लोगों की जिम्मेदारियां अलग-अलग हो सकती हैं। लेकिन यदि उनके भीतर एक साझा चेतना और एक-दूसरे के प्रति अपनत्व की भावना हो तो मतभेदों को टकराव में बदलने से रोका जा सकता है।
ISKCON के न्यूयॉर्क मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
मोहन भागवत का न्यूयॉर्क स्थित ISKCON मंदिर जाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका में कृष्ण भक्ति आंदोलन के विस्तार के इतिहास में इस स्थान की विशेष भूमिका रही है। ISKCON की स्थापना 1966 में न्यूयॉर्क में ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने की थी।
इसी कारण न्यूयॉर्क को ISKCON आंदोलन के शुरुआती अंतरराष्ट्रीय विस्तार के महत्वपूर्ण केंद्रों में गिना जाता है। यहां स्थित मंदिर भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं और कृष्ण भक्ति से जुड़े वैश्विक आंदोलन का प्रतिनिधित्व करता है।
भागवत की यात्रा को इसी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
बेघर लोगों के लिए भोजन वितरण में भी हुए शामिल
ISKCON मंदिर की यात्रा के दौरान मोहन भागवत ने केवल धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया, बल्कि न्यूयॉर्क में जरूरतमंद और बेघर लोगों की सहायता के लिए आयोजित भोजन वितरण अभियान में भी भाग लिया।
इस कार्यक्रम के जरिए जरूरतमंद लोगों तक भोजन पहुंचाने का प्रयास किया गया। भागवत की मौजूदगी ने इस गतिविधि को सामाजिक सेवा और मानव कल्याण से भी जोड़ दिया।
रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने इस तरह की सेवा गतिविधियों को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाली पहल के रूप में देखा। कृष्ण चेतना के संदेश को उन्होंने केवल आध्यात्मिक विचार तक सीमित न रखते हुए सामाजिक व्यवहार और मानव सेवा से भी जोड़ा।
RSS के 100 साल पूरे होने के बीच अमेरिका दौरा
मोहन भागवत का वर्तमान अमेरिका दौरा RSS के शताब्दी वर्ष से जुड़ा हुआ है।
संघ की स्थापना को 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विदेशों में भी कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
न्यूयॉर्क में भागवत का कार्यक्रम भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बीच विशेष चर्चा में है।
वह 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित
‘Universal Oneness Celebration’ कार्यक्रम में संबोधन देने वाले हैं। कार्यक्रम में
भारतीय प्रवासी समुदाय और विभिन्न संगठनों के लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
न्यूयॉर्क कार्यक्रम से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम को लेकर अमेरिका में भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
कुछ संगठनों ने उनके कार्यक्रम का समर्थन किया है, जबकि कुछ समूहों ने
RSS की विचारधारा और उसके राजनीतिक प्रभाव को लेकर आपत्ति जताई है।
न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने भी कार्यक्रम को लेकर आलोचनात्मक रुख व्यक्त किया है।
वहीं कुछ हिंदू-अमेरिकी संगठनों और प्रवासी नेताओं ने
कार्यक्रम को एकता, संवाद और सामुदायिक जुड़ाव का मंच बताया है।
इस विवाद के बीच भागवत का ISKCON मंदिर दौरा और
उनका एकता पर केंद्रित संदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उनके भाषण में संघर्ष की जगह आपसी जुड़ाव और साझा चेतना पर जोर दिया गया।
‘दुनिया एक परिवार’ की सोच पर जोर
मोहन भागवत के संदेश में एक ऐसी दुनिया की कल्पना दिखाई दी जिसमें
अलग-अलग विचारों और पहचान के बावजूद लोग एक-दूसरे को विरोधी के रूप में न देखें।
उनके मुताबिक यदि लोगों में यह समझ विकसित हो कि सभी का मूल संबंध
एक व्यापक चेतना से है, तो सामाजिक संघर्षों को कम करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कृष्ण चेतना को इसी दृष्टिकोण का आध्यात्मिक आधार बताया।
यह संदेश ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में राजनीतिक, धार्मिक और
सामाजिक मतभेदों को लेकर तनाव बना हुआ है। ऐसे वातावरण में आध्यात्मिक एकता और
मानवता को जोड़ने वाली सोच पर चर्चा स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है।
भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक संदेश को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की कोशिश
भागवत के अमेरिका दौरे को RSS के संगठनात्मक कार्यक्रम के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और
आध्यात्मिक विचारों के वैश्विक प्रसार से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
न्यूयॉर्क जैसे वैश्विक शहर में ISKCON मंदिर की यात्रा और कृष्ण चेतना पर उनका संबोधन भारतीय
आध्यात्मिक परंपरा के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को रेखांकित करता है। वहीं भोजन वितरण जैसे सामाजिक सेवा कार्यक्रम में
भागीदारी धार्मिक विचारों को मानवीय सेवा के साथ जोड़ने का संदेश देती है।
आगे मैडिसन स्क्वायर गार्डन में बड़ा संबोधन
अब सबकी नजर मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में होने वाले बड़े कार्यक्रम पर है।
‘Universal Oneness Celebration’ में उनका संबोधन भारतीय
प्रवासी समुदाय के साथ-साथ अमेरिकी सार्वजनिक जीवन में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
इस कार्यक्रम में भागवत वैश्विक स्तर पर एकता, भारतीय सभ्यतागत दृष्टिकोण और
RSS की विचारधारा से जुड़े विषयों पर बात कर सकते हैं। कार्यक्रम के समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाओं के
बीच उनका संबोधन महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को जन्म दे सकता है।
निष्कर्ष
न्यूयॉर्क के ISKCON मंदिर में मोहन भागवत का दौरा आध्यात्मिक संदेश और
सामाजिक सेवा, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने दुनिया में मौजूद मतभेदों के बीच
कृष्ण चेतना को लोगों को जोड़ने वाली शक्ति बताया। साथ ही जरूरतमंद लोगों के लिए
भोजन वितरण कार्यक्रम में शामिल होकर सेवा की भावना का संदेश दिया।
अब उनके आगामी न्यूयॉर्क संबोधन पर निगाहें हैं, जहां एकता और
भारतीय विचार पर उनका संदेश अमेरिकी भारतीय समुदाय के बीच प्रमुख चर्चा का विषय बनने वाला है।
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